ईरानी राष्ट्रपति ने जिन हिंदू संत के छुए पैर? कौन हैं स्वामी सतीशाचार्य महाराज? आमिर खान भी कर चुके मुलाकात
By Oneindia Staff
Published: Sunday, September 13, 2026, 15:22 [IST]
दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से जुड़ा एक वीडियो चर्चा में है। वीडियो में पेजेशकियन एक हिंदू धर्मगुरु के सामने झुकते दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे संत के चरण स्पर्श से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी के साथ उस संत को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। संत के पैर छूने वाले दावे सोशल मीडिया पर ही किए जा रहे है। कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि वो किसी सामान को उठाने के लिए झुके थे। लेकिन इतना तो तय है कि दोनों की मुलाकात की चर्चा हो रही।
इन संत का नाम जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी सतीशाचार्य महाराज बताया जा रहा है। वह कानपुर के कल्याणपुर स्थित प्रेमेश्वर धाम से जुड़े हैं। धार्मिक गतिविधियों के अलावा उनका नाम वैदिक शिक्षा, योग, ध्यान, संस्कृत और सामाजिक कार्यों से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं स्वामी सतीशाचार्य महाराज और उन्हें जगद्गुरु की उपाधि कैसे मिली?
ईरानी राष्ट्रपति के साथ वीडियो ने क्यों बढ़ाई चर्चा?
अब स्वामी सतीशाचार्य महाराज की चर्चा की सबसे बड़ी वजह मसूद पेजेशकियन से जुड़ा वीडियो है। वीडियो में ईरान के राष्ट्रपति एक भारतीय हिंदू धर्मगुरु के सामने झुकते नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर इसे चरण स्पर्श कहा जा रहा है।
इसी वीडियो के बाद सनातन परंपरा और संत के आध्यात्मिक परिचय को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे हर दावे को अलग-अलग तथ्य मानना ठीक नहीं होगा। उपलब्ध इनपुट में यह जरूर बताया गया है कि धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को लेकर दोनों के बीच बातचीत हुई।
कौन हैं स्वामी सतीशाचार्य महाराज?
स्वामी सतीशाचार्य महाराज को हिंदू आध्यात्मिक गुरु, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर उनके काम का केंद्र वेद, सनातन धर्म, योग, ध्यान और आयुर्वेद बताया गया है। उनका आध्यात्मिक केंद्र नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम से भी जुड़ा बताया जाता है।
उनकी सार्वजनिक गतिविधियों में धार्मिक आयोजन, यज्ञ, रामकथा, वैदिक शिक्षा और युवाओं को भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने की कोशिशें शामिल रही हैं। वह संस्कृत और शास्त्रों की पढ़ाई को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर देते हैं।
अगस्त 2026 में उज्जैन में हुए आजतक धर्म संसद के एक सत्र में भी उन्होंने हिस्सा लिया था। वहां सनातन धर्म, उज्जैन की आध्यात्मिक विरासत और युवाओं के लिए शास्त्रों को समझने की जरूरत जैसे विषयों पर उन्होंने अपनी बात रखी थी।
महाकुंभ 2025 में मिली 'जगद्गुरु' की उपाधि
स्वामी सतीशाचार्य महाराज के नाम के साथ 'जगद्गुरु रामानंदाचार्य' जुड़ने की कहानी 2025 के महाकुंभ से जोड़ी जाती है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, तीन प्रमुख अखाड़ों ने उन्हें इस उपाधि से सम्मानित किया था।
इनमें निर्वाणी अनी अखाड़ा, निर्मोही अनी अखाड़ा और दिगंबर अनी अखाड़ा शामिल हैं। उनकी वेबसाइट इस सम्मान को लंबे अंतराल के बाद मिला बड़ा धार्मिक सम्मान बताती है। मीडिया रिपोर्टों में भी उन्हें कानपुर के प्रेमेश्वर धाम और महर्षि महेश योगी की परंपरा से जुड़ा संत बताया गया है। 2025 में संस्कृत विश्वविद्यालय, मथुरा के दीक्षांत समारोह में भी वह आध्यात्मिक अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे।
महर्षि महेश योगी की परंपरा से क्या रिश्ता है?
स्वामी सतीशाचार्य महाराज का आध्यात्मिक जुड़ाव महर्षि महेश योगी की परंपरा से बताया जाता है। उनके आधिकारिक परिचय में वैदिक ज्ञान और महर्षि महेश योगी की परंपरा को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
गुरु पूर्णिमा 2025 के मौके पर नोएडा के महर्षि आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में भी उन्होंने महर्षि महेश योगी को श्रद्धांजलि दी थी। उनके धार्मिक काम में ध्यान, योग और वैदिक शिक्षा को खास जगह दी जाती है।
सनातन, शिक्षा और गोवंश को लेकर क्या काम करते हैं?
स्वामी सतीशाचार्य महाराज का काम केवल प्रवचन और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं बताया जाता। उनकी वेबसाइट के मुताबिक वह वैदिक शिक्षा, गुरुकुल परंपरा, संस्कृत, योग, ध्यान और सनातन संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय हैं।
वह अयोध्या स्थित महर्षि रामायण विश्वविद्यालय के संरक्षक और संस्कृत विश्वविद्यालय, मथुरा के प्रो-चांसलर के तौर पर भी सूचीबद्ध हैं। 2025 में नोएडा के महर्षि आश्रम में हुए भारत उत्कर्ष महायज्ञ में उन्होंने वेद, योग और सनातन परंपरा को समाज से जोड़ने की बात रखी थी।
उनका नाम गोवंश संरक्षण से जुड़े अभियानों के साथ भी सामने आता रहा है। वह गोहत्या पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। युवाओं को भारतीय संस्कृति, मूल्यों और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना भी उनके सार्वजनिक संदेशों का हिस्सा रहा है।

आमिर खान से भी हो चुकी है मुलाकात
स्वामी सतीशाचार्य महाराज का नाम केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा। अभिनेता आमिर खान के साथ उनकी मुलाकात भी चर्चा में आ चुकी है। 2025 में दोनों की मुलाकात मुंबई में हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक यह बातचीत करीब छह घंटे तक चली। बताया गया कि आमिर खान ने स्वामी सतीशाचार्य महाराज को अपने आवास पर बुलाया था।
मुलाकात के दौरान संत ने आमिर खान को भगवद्गीता की पुस्तक भेंट की। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अभिनेता से फिल्मों के जरिए धर्म और भारतीय परंपराओं की सही तस्वीर सामने रखने की अपेक्षा भी जताई थी।