
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा
दिल्ली सरकार राजधानी को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, हरित परिवहन और औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार पर जोर दे रही है. इसी दिशा में साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी और उसके दिल्ली केंद्र के छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से मुलाकात कर Promoting Clean Air in Delhi NCR विषय पर अध्ययन प्रस्तुत किया. अध्ययन में दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण को केवल दिल्ली तक सीमित समस्या न मानते हुए पूरे एयरशेड से जुड़ी चुनौती बताया गया.
छात्रों ने प्रदूषण की बेहतर निगरानी, स्रोत-विशिष्ट कार्रवाई, मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान तथा पूरे एनसीआर में समन्वित रणनीति अपनाने की जरूरत बताई.
‘युवाओं के सुझाव परिवर्तनकारी हो सकते हैं’
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने छात्रों के अध्ययन की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के पास नए विचार और पारंपरिक सोच को बदलने का साहस है. सरकार युवाओं और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर ऐसे समाधान तलाशना चाहती है जो व्यावहारिक होने के साथ-साथ परिवर्तनकारी भी हों.
दिल्ली में रोजाना 13 हजार मीट्रिक टन कचरा
सिरसा ने दिल्ली की कचरा प्रबंधन चुनौती का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राजधानी में प्रतिदिन करीब 13,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है। इसके अलावा वर्षों से जमा करीब 30,000 से 35,000 मीट्रिक टन पुराने कचरे के प्रसंस्करण की चुनौती भी मौजूद है. उन्होंने कहा कि सरकार वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों की अधिकतम पुनर्प्राप्ति और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे रही है, ताकि कचरे को केवल समस्या के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सके.
ई-बसों और ग्रीन मोबिलिटी पर जोर
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या देश के प्रमुख शहरों में सबसे अधिक है और सरकार सार्वजनिक परिवहन को और अधिक इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने ग्रीन मोबिलिटी को दिल्ली की स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. इसके साथ ही सरकार ई-कचरा और बैटरी कचरे के रिसाइक्लिंग, संसाधन पुनर्प्राप्ति और उभरते अपशिष्ट स्रोतों के जिम्मेदार प्रबंधन को मजबूत करने पर भी काम कर रही है.
यमुना में बिना उपचार औद्योगिक पानी जाने की अनुमति नहीं. औद्योगिक प्रदूषण पर मंत्री सिरसा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में Effluent Treatment को प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल को यमुना में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. इसके लिए अपशिष्ट जल उपचार व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है.
छात्रों ने दिए कई अहम सुझाव
साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के अध्ययन में परिवहन के लिए उत्सर्जन आधारित नियमन, ईंट भट्ठों के प्रदर्शन मानकों में सुधार, पराली को आर्थिक मूल्य देने, अनौपचारिक रीसाइक्लिंग नेटवर्क को औपचारिक बनाने, खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और पूर्वानुमान आधारित एयरशेड प्रबंधन प्रणाली विकसित करने जैसे सुझाव दिए गए.
अध्ययन में सैटेलाइट डेटा, जमीनी निगरानी, मौसम पूर्वानुमान और प्रदूषण स्रोतों के वैज्ञानिक विश्लेषण को एक साथ जोड़कर पूरे एनसीआर में समन्वित कार्रवाई की सिफारिश की गई. इस अवसर पर दिल्ली पर्यावरण एवं वन विभाग के सचिव विजय कुमार बिधूड़ी सहित विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिकारी और छात्र मौजूद रहे. सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं के साथ सहयोग बढ़ाकर राजधानी को अधिक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

जीतेन्द्र भाटी
करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.
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