दिल्ली पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में हैकिंग का खेल! रिमोट एक्सेस से सॉल्वर ने कैसे दिए सारे जवाब?

Published on 7 सित॰ 2026

दिल्ली पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में हैकिंग का खेल! रिमोट एक्सेस से सॉल्वर ने कैसे दिए सारे जवाब?

Time Published: Monday, September 7, 2026, 13:57 [IST]

Delhi Police Recruitment Scam: दिल्ली पुलिस कांस्टेबल और हवलदार भर्ती परीक्षा में नकल का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ऑनलाइन परीक्षा की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब के जालंधर और पटियाला में हुए परीक्षा केंद्रों पर कुछ अभ्यर्थी कंप्यूटर के सामने परीक्षा देते नजर आए, लेकिन आरोप है कि उनके सवालों के जवाब कहीं दूर बैठा सॉल्वर दे रहा था।

पंजाब स्टेट क्राइम ब्रांच ने मोहाली में इस कथित 'रिमोट एक्सेस फ्रॉड' को लेकर तीन नामजद और एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच में कंप्यूटर में रिमोट डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और बाहर बैठे व्यक्ति द्वारा माउस-कीबोर्ड चलाने की बात सामने आई है। यह मामला दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुई परीक्षाओं से जुड़ा बताया जा रहा है।

Delhi Police Recruitment Scam

कंप्यूटर का कंट्रोल था बाहर बैठे सॉल्वर के हाथ में

जांच में आरोप है कि परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर में बैकग्राउंड में रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर सक्रिय था। यह AnyDesk या AnyViewer जैसे रिमोट डेस्कटॉप सिस्टम की तरह काम करता था। इसके जरिए बाहर बैठा सॉल्वर परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी की स्क्रीन देख सकता था और कथित तौर पर उसके माउस और कीबोर्ड को दूर से कंट्रोल कर रहा था। यानी परीक्षा केंद्र में मौजूद अभ्यर्थी कंप्यूटर के सामने बैठा था, लेकिन सवालों के जवाब देने का काम कथित तौर पर कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा था।

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जालंधर और पटियाला के सेंटर जांच के घेरे में

यह मामला जालंधर के एलपीयू सेंटर और पटियाला के ग्लोबल पॉलिटेक्निक कॉलेज से जुड़ा बताया गया है। पुलिस ने कुलदीप, दिनेश, प्रदीप और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों पर एंटी करप्शन एक्ट और पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। मामले में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा केंद्र के सिस्टम तक रिमोट एक्सेस कैसे पहुंचा और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

बताया गया है कि कथित गड़बड़ी दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच आयोजित परीक्षाओं के दौरान हुई। SSC के नॉर्थ-वेस्टर्न रीजनल ऑफिस के पास इस मामले से जुड़े लाइव स्क्रीनशॉट और माउस मूवमेंट की रिकॉर्डिंग होने की बात सामने आई है। इन रिकॉर्डिंग और तकनीकी जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर में रिमोट एक्सेस की सुविधा कैसे सक्रिय हुई।

कई महीने बाद शुरू हुई कार्रवाई

मामले को लेकर पहले स्थानीय स्तर पर पुलिस कार्रवाई धीमी रहने की बात कही गई। इसके बाद SSC चेयरमैन की ओर से DGP को पत्र लिखा गया। इसके बाद पंजाब स्टेट क्राइम ब्रांच ने मामले को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू की और FIR दर्ज की। अब जांच एजेंसियां परीक्षा केंद्र, कंप्यूटर सिस्टम और वहां काम करने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।

आखिर कैसे होता है रिमोट एक्सेस वाला खेल?

ऑनलाइन यानी CBT परीक्षा में हर कंप्यूटर को सुरक्षित रखने के लिए कई इंतजाम किए जाते हैं। लेकिन अगर सिस्टम में बाहरी रिमोट एक्सेस मिल जाए तो परीक्षा की सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इस मामले में जांच के अनुसार कथित तरीका कुछ ऐसा था-

  • परीक्षा शुरू होने से पहले कंप्यूटर में रिमोट डेस्कटॉप या स्क्रीन शेयरिंग सॉफ्टवेयर सक्रिय किया जाता है।
  • बाहर बैठा सॉल्वर कंप्यूटर की स्क्रीन को रिमोट तरीके से देखता है।
  • अभ्यर्थी कंप्यूटर के सामने बैठा रहता है, जबकि सॉल्वर कथित तौर पर माउस और कीबोर्ड से जवाब देता है।
  • परीक्षा केंद्र के तकनीकी सिस्टम तक पहुंच मिलने के बाद बाहर बैठे व्यक्ति को परीक्षा कंप्यूटर को कंट्रोल करने का मौका मिल जाता है।
  • जांच में सेंटर के तकनीकी स्टाफ की संभावित भूमिका भी देखी जा रही है, क्योंकि बिना सिस्टम तक पहुंच मिले इस तरह का रिमोट कनेक्शन बनना सामान्य स्थिति में आसान नहीं होता।

परीक्षा देते समय इन संकेतों पर दें ध्यान

अगर कोई उम्मीदवार ऑनलाइन सरकारी परीक्षा दे रहा है और कंप्यूटर में असामान्य गतिविधि दिखाई देती है तो उसे तुरंत परीक्षा स्टाफ को बताना चाहिए।

  • माउस अपने आप चलना: अगर माउस को हाथ लगाए बिना कर्सर खुद हिल रहा है या कोई जवाब अपने आप चुना जा रहा है, तो तुरंत इन्विजिलेटर को जानकारी दें।
  • स्क्रीन अचानक ब्लिंक होना: स्क्रीन का अचानक फ्लिकर करना, रिजॉल्यूशन बदलना या डिस्प्ले में कुछ पल के लिए बदलाव आना भी तकनीकी समस्या का संकेत हो सकता है।
  • कंप्यूटर अचानक बहुत धीमा होना: रिमोट कनेक्शन या किसी दूसरे प्रोग्राम के चलने पर सिस्टम सामान्य से ज्यादा धीमा हो सकता है। कर्सर भी रुक-रुककर चल सकता है।
  • अनजान विंडो या आइकॉन दिखाई देना: अगर स्क्रीन या टास्कबार पर कोई ऐसा आइकॉन, पॉप-अप या विंडो दिखाई दे जिसे आपने खुद नहीं खोला है, तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत परीक्षा अधिकारी को बताएं।

नकल पर कड़े कानून का प्रावधान

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और तकनीकी तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 लागू किया गया है। संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है। गंभीर मामलों में 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, किस आरोपी पर कौन सी सजा लागू होगी, यह मामले के तथ्यों और अदालत में साबित होने वाली भूमिका पर निर्भर करेगा।

अभ्यर्थियों पर भी हो सकती है कार्रवाई

परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह के साथ-साथ नकल का फायदा उठाने वाले अभ्यर्थियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित भर्ती एजेंसी अपने नियमों के अनुसार उम्मीदवार को परीक्षा से बाहर करने, उम्मीदवारी रद्द करने या भविष्य की परीक्षाओं से कुछ समय के लिए रोकने जैसी कार्रवाई कर सकती है। कुछ मामलों में 3 से 5 साल तक डिबार किए जाने की बात भी सामने आती है, लेकिन इसकी अवधि संबंधित भर्ती नियमों और मामले की कार्रवाई पर निर्भर करती है।

सेंटर स्टाफ की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस मामले में केवल अभ्यर्थियों और कथित सॉल्वर की भूमिका ही नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्र के तकनीकी स्टाफ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी कर्मचारी ने जानबूझकर सिस्टम में बाहरी व्यक्ति को पहुंच दिलाई या नकल में मदद की, तो उसके खिलाफ भी भ्रष्टाचार और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पंजाब स्टेट क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परीक्षा कंप्यूटर में रिमोट एक्सेस किसने और किस तरीके से सक्रिय किया था।

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