Ranchi News : झारखंड की राजनीति में रविवार की सुबह एक बड़ी दुखद खबर लेकर आई. झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता, गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार विधायक और हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया. वह 56 वर्ष के थे. देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 3:30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. शुरुआती जानकारी के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट को मौत की वजह बताया जा रहा है.


26 जुलाई 1970 को जन्मे सुदिव्य कुमार का राजनीतिक जीवन लंबे संघर्ष और संगठन के प्रति समर्पण से भरा रहा. शंभूनाथ विश्वकर्मा के पुत्र सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू वर्ष 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े थे. उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया और धीरे-धीरे पार्टी के मजबूत संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई. शुरुआती दौर में वे दीवार लेखन से लेकर गांव-गांव पार्टी का संदेश पहुंचाने और कंधे पर झामुमो का झंडा लेकर संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे.
गिरिडीह नगर कमेटी के पहले अध्यक्ष बने
संगठन के प्रति उनकी सक्रियता को देखते हुए वर्ष 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया. वे नगर कमेटी के संस्थापक अध्यक्ष रहे. इसके बाद 2003 में उन्हें झामुमो का गिरिडीह जिलाध्यक्ष बनाया गया. वर्ष 2003 से 2010 तक उन्होंने जिलाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उनके राजनीतिक जीवन में 1991 का लोकसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण रहा. पार्टी के निर्देश पर वे गोड्डा पहुंचे थे, जहां झामुमो प्रत्याशी सूरज मंडल के पक्ष में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाली. इसी दौरान 21 मई 1991 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव स्थगित हो गया. इसके बावजूद सुदिव्य कुमार पार्टी के काम में जुटे रहे.
2009 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा
सुदिव्य कुमार ने वर्ष 2009 में पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा. हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली और वे छठे स्थान पर रहे. वर्ष 2014 में झामुमो ने एक बार फिर उन्हें प्रत्याशी बनाया. इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी से हुआ. वे चुनाव हार गए, लेकिन उनका प्रदर्शन बेहतर रहा और वे दूसरे स्थान पर पहुंचे.
वर्ष 2019 में पार्टी ने फिर उन पर भरोसा जताया. सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर अपेक्षाकृत कम समय में तेजी से आगे बढ़ा. गिरिडीह विधानसभा सीट से 2019 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने 2024 में लगातार दूसरी जीत दर्ज की. इसके बाद हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया. वह सरकार में पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य, नगर विकास एवं आवास तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. झारखंड सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी इन विभागों के मंत्री के रूप में उनका नाम दर्ज है.
गिरिडीह से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल थे. 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी से चुनाव हार गए. 2014 के चुनाव में सुदिव्य कुमार को 47,517 वोट मिले थे, जबकि शाहाबादी को 57,450 वोट मिले थे.
इसके बाद 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने वापसी की. झामुमो उम्मीदवार के तौर पर सुदिव्य कुमार ने 80,871 वोट हासिल किए और भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 15,884 वोटों के अंतर से हराया. यह उनकी पहली विधानसभा जीत थी. इसके साथ ही वह पहली बार झारखंड विधानसभा पहुंचे.
2019 में विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू झामुमो की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे. विधानसभा में पार्टी की ओर से वह कई मुद्दों पर मुखर नजर आए. उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी नेताओं में भी गिना जाता था.
2024 में फिर जीते, इस बार कांटे का मुकाबला
2024 के विधानसभा चुनाव में गिरिडीह सीट पर सुदिव्य कुमार सोनू और भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी के बीच एक बार फिर सीधा मुकाबला हुआ. इस बार चुनाव बेहद करीबी रहा. मतगणना के शुरुआती दौर में भाजपा उम्मीदवार बढ़त में थे, लेकिन बाद के राउंड में सुदिव्य कुमार ने बढ़त बना ली.
हिन्दुस्तान की चुनावी रिपोर्ट के मुताबिक, सुदिव्य कुमार सोनू को 93,179 वोट मिले और उन्होंने 3,838 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. इस जीत के साथ वह लगातार दूसरी बार गिरिडीह के विधायक बने.
चुनावी रिकॉर्ड के दूसरे डेटाबेस में भी 2024 में उनकी जीत दर्ज है और उन्हें 94,042 वोट मिले बताए गए हैं. अलग-अलग चुनावी डेटाबेस में आंकड़ों में मामूली अंतर दिखाई देता है, लेकिन सभी स्रोत उनकी जीत की पुष्टि करते हैं.
गिरिडीह से झामुमो के पहले मंत्री बनने का गौरव
2024 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में जगह मिली. वह गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से झामुमो के पहले मंत्री बने. हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, उनके मंत्री बनने के साथ गिरिडीह को करीब 24 साल बाद राज्य मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिला था.
मंत्री के तौर पर उनके पास कई महत्वपूर्ण विभाग थे. इनमें नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला एवं संस्कृति और खेलकूद एवं युवा कार्य शामिल थे. झारखंड सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी उनके पास इन विभागों की जिम्मेदारी दर्ज थी.
शिक्षा को लेकर भी सक्रिय रहे
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री के तौर पर सुदिव्य कुमार सोनू शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहे. निधन से ठीक एक दिन पहले, 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्होंने गिरिडीह में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था. रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने इस दौरान स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध कराने की बात भी कही थी. यानी निधन से कुछ घंटे पहले तक वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय थे.
छात्रों और शिक्षा से जुड़े आंदोलनों के दौरान भी उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की. हाल के छात्र आंदोलन में सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में उनकी भूमिका का उल्लेख भी सामने आया है.
संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
सुदिव्य कुमार सोनू केवल विधायक और मंत्री ही नहीं थे, बल्कि झामुमो के संगठन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. उन्हें पार्टी के केंद्रीय महासचिव के रूप में भी बताया गया है. पार्टी और सरकार से जुड़े मुद्दों पर वह सार्वजनिक रूप से अपनी बात मजबूती से रखते थे.
उनकी राजनीतिक शैली को लेकर रिपोर्टों में उन्हें सहज, मिलनसार और जनता के बीच आसानी से घुल-मिल जाने वाला नेता बताया गया है. गिरिडीह क्षेत्र में वह स्थानीय मुद्दों और लोगों की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहते थे.
पढ़ाई कितनी थी?
सुदिव्य कुमार सोनू की शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट थी. उनके 2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने बिहार के पूर्णिया स्थित डीएस कॉलेज से 1986 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी. PRS India के विधायक प्रोफाइल में भी उनकी शिक्षा Inter/Higher Secondary दर्ज है.
राजनीति से पहले क्या करते थे?
सुदिव्य कुमार सोनू ने चुनावी हलफनामों में अपने पेशे के रूप में अलग-अलग वर्षों में व्यवसाय और विधानसभा से मिलने वाली आय का उल्लेख किया था. 2014 और 2019 के हलफनामे में उनका पेशा व्यवसाय दर्ज था, जबकि 2024 के हलफनामे में विधानसभा से वेतन के साथ राजनीतिक और व्यवसायिक गतिविधियों का उल्लेख है.
संपत्ति में भी हुआ इजाफा
सुदिव्य कुमार सोनू की संपत्ति में पिछले कुछ चुनावों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई. 2014 के हलफनामे में उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब 1.26 करोड़ रुपये थी. 2019 में यह बढ़कर करीब 3.80 करोड़ रुपये हुई, जबकि 2024 के हलफनामे में कुल संपत्ति करीब 15.17 करोड़ रुपये घोषित की गई. 2024 में उनकी देनदारियां करीब 3.52 करोड़ रुपये दर्ज थीं.
अचानक थम गया राजनीतिक सफर
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर ऐसे समय में थम गया, जब वह झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. शनिवार को शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी.
उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. रविवार तड़के उनके निधन की खबर सामने आते ही झारखंड की राजनीति में शोक की लहर फैल गई.
गिरिडीह के दो बार के विधायक, हेमंत सोरेन सरकार के मंत्री और झामुमो के संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सुदिव्य कुमार सोनू का जाना पार्टी के साथ-साथ झारखंड की राजनीति के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है. झामुमो ने उनके निधन को पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.
सुदिव्य कुमार को दिशोम गुरु शिबू सोरेन का करीबी माना जाता था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ भी उनके घनिष्ठ राजनीतिक संबंध रहे. एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ उनका सफर संगठन के विभिन्न दायित्वों से गुजरते हुए विधायक और मंत्री तक पहुंचा.
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