महाराष्ट्र में खुले तेल की बिक्री पर फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, व्यापारियों को एक साल की राहत
Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने खुले तेल की बिक्री करने वाले कारोबारियों को एक साल की अस्थायी राहत दी है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यापारियों के साथ बैठक कर यह फैसला लिया.
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Devendra Fadnavis Photograph: (File Photo)
Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के खुदरा तेल कारोबारियों और आम जनता से जुड़ा एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुले तेल की बिक्री पर रोक से जुड़े नियमों में व्यापारियों को एक साल की अस्थायी छूट देने का ऐलान किया है. इस फैसले के बाद राज्य भर के छोटे और पारंपरिक किराना व्यापारियों ने राहत की सांस ली है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि खाद्य तेल की शुद्धता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत को देखते हुए कारोबारियों को जरूरी बदलाव करने के लिए वक्त दिया जा रहा है.
व्यापारियों के साथ बैठक में बनी सहमति
यह पूरा मामला तब सुलझा जब तेल कारोबारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और अपनी व्यावहारिक परेशानियां उनके सामने रखीं. व्यापारियों का कहना था कि खुले तेल पर अचानक पूरी पाबंदी लगाने से न केवल उनका पारंपरिक कारोबार चौपट हो जाएगा, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी भारी असर पड़ेगा. मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और स्वीकार किया कि कानून का पालन कराने के साथ-साथ कारोबारियों की आजीविका को सुरक्षित रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है.
गरीब तबके की जरूरतों का रखा ध्यान
मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान माना कि देश और राज्य में आज भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो अपनी सीमित आय के कारण बड़े पैकेट या डिब्बे वाला महंगा तेल खरीदने में असमर्थ है. यह तबका रोजमर्रा की जरूरत के हिसाब से दुकानों से थोड़ा-थोड़ा खुला तेल खरीदता है. अगर खुले तेल की बिक्री पर एकदम से रोक लगा दी जाती है, तो ऐसे गरीब परिवारों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा. इसलिए संतुलन बनाते हुए आम आदमी की सुविधा और व्यापारियों के हित में यह अस्थायी मोहलत दी गई है.
गुणवत्ता और कानून दोनों जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में ही खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर कड़ा कानून बनाया था. खुले तेल में मिलावट की आशंका हमेशा बनी रहती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए तेल की गुणवत्ता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है. कानून का उद्देश्य लोगों को मिलावटी सामान से बचाना है और सरकार इस उद्देश्य से पीछे नहीं हटेगी. हालांकि नियमों को लागू करने का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिससे किसी का नुकसान न हो.
FDA और व्यापारियों की संयुक्त समिति
नियमों को सही तरीके से लागू करने के लिए सरकार ने फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन और व्यापारी प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाने का निर्णय लिया है. यह समिति मिलकर यह तय करेगी कि पारंपरिक तेल कारोबारियों को नए नियमों के अनुसार अपने कारोबार में किस तरह के तकनीकी और ढांचागत बदलाव करने होंगे. समिति ऐसे व्यावहारिक रास्ते तलाशेगी, जिससे छोटे व्यापारी पैकेजिंग और स्वच्छता के मानकों को आसानी से अपना सकें.
सरकार करेगी कारोबारियों की मदद
पारंपरिक कारोबार को आधुनिक मानकों के अनुरूप ढालने में छोटे दुकानदारों को कई तरह की आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इस बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि जरूरत पड़ने पर सरकार व्यापारियों की हर संभव सहायता करेगी. सरकार का प्रयास रहेगा कि कोई भी छोटा व्यापारी इस बदलाव के दौर में बेरोजगार न हो और उसका काम सुचारू रूप से चलता रहे.
एक साल बाद नहीं मिलेगा कोई अतिरिक्त समय
सरकार ने यह साफ कर दिया है कि यह राहत सिर्फ एक साल के लिए है और इसे किसी भी हाल में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि एक साल की अवधि समाप्त होते ही सभी कारोबारियों को पूरी तरह कानून का पालन करना होगा. व्यापारियों को इसी समय सीमा के भीतर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा, ताकि एक साल बाद राज्य में केवल गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य तेल की ही बिक्री हो सके.
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