भूमि विवाद के स्थायी समाधान की उम्मीद में अंचल कार्यालय में जमीन की मापी के लिए आवेदन करने वाले लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। सरकार ने जमीन की मापी की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए ई-मापी पोर्टल शुरू किया है, लेकिन प
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जिले में ई-मापी पोर्टल के अनुसार 1015 आवेदन अब भी लंबित हैं। स्थिति यह है कि कई लोगों ने मापी शुल्क की राशि भी जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद महीनों से उनकी जमीन की मापी नहीं हो सकी है। मापी नहीं होने के कारण जमीन से जुड़े विवादों का समाधान भी अटका हुआ है। सबसे अधिक लंबित मामले रहिका अंचल में 94 हैं। यहां कई ऐसे आवेदन भी हैं, जो वर्ष 2024 से ही लंबित बताए जा रहे हैं। आवेदकों का कहना है कि जमीन की मापी के लिए आवेदन करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत अमीन स्थल पर पहुंचकर मापी करेंगे और रिपोर्ट उपलब्ध कराएंगे। लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने से आवेदनकर्ता अंचल कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। खासकर वैसे मामलों में परेशानी अधिक है, जहां जमीन की सीमा को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा है।
ई-मापी व्यवस्था में आवेदन के बाद निर्धारित शुल्क जमा करने पर मापी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। लोगों का कहना है कि शुल्क जमा करने के बाद उन्हें मापी की तिथि निर्धारित होने का इंतजार रहता है। कई मामलों में तिथि बीत जाने के बाद भी मापी नहीं होती। इसके बाद आवेदक अंचल कार्यालय में जानकारी लेने पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें अगली तिथि अथवा कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती। वहीं जमीन की मापी समय पर नहीं होने का सीधा असर उन मामलों पर पड़ता है, जिनमें सीमा विवाद, रास्ते का विवाद, कब्जे का विवाद अथवा हिस्सेदारी को लेकर विवाद चल रहा है। कई बार यही विवाद बाद में आपसी तनाव और मुकदमेबाजी का कारण बन जाते हैं। ऐसे में समयबद्ध मापी को भूमि विवाद के निपटारे की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
अंधराठाढ़ी 51 बाबूबरही 25 बासोपट्टी 45 बेनीपट्टी 30 बिस्फी 87 घोघरडीहा 80 हरलाखी 41 जयनगर 72 झंझारपुर 44 कलुआही 21 खजौली 18 खुटौना 35 लदनियां 41 लखनौर 47 लौकही 68 मधेपुर 76 मधवापुर 23 पंडौल 24 फुलपरास 54 रहिका 94 राजनगर 19
जमीन की मापी में देरी का सबसे बड़ा असर विवादित जमीन के पक्षकारों पर पड़ता है। जब तक जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमांकन स्पष्ट नहीं होता, तब तक दोनों पक्ष अपने-अपने दावे करते रहते हैं। कई मामलों में जमीन पर निर्माण, रास्ते के इस्तेमाल अथवा कब्जे को लेकर विवाद बढ़ता जाता है। ऐसे में मापी रिपोर्ट विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आवेदकों का कहना है कि यदि विभाग ने ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की है तो आवेदन की स्थिति, मापी की तिथि और रिपोर्ट की जानकारी भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। लंबित आवेदनों की नियमित समीक्षा कर पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाना चाहिए। वहीं, एडीएम मुकेश रंजन ने बताया कि संबंधित मामले की समीक्षा की जाएगी। जो भी जिम्मेदार हैं, उनकी जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।