राजस्थान हाई कोर्ट के सीजे बने संजय अग्रवाल: वकीलों ने बहिष्कार किया, एक्टिंग सीजे रोस्टर से अलग हुए - Jaipur News

Published on 1 सित॰ 2026

राजस्थान हाई कोर्ट के सीजे बने संजय अग्रवाल:वकीलों ने बहिष्कार किया, एक्टिंग सीजे रोस्टर से अलग हुए

जयपुर41 मिनट पहले

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जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का सीजे बनाने की सिफारिश, अभी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में तैनात हैं जस्टिस अग्रवाल

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस संजय अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। साथ ही राजस्थान के वरिष्ठतम जज जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का सीजे बनाया जाएगा। जस्टिस अग्रवाल को सितंबर 2013 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और बाद में उन्हें स्थायी जज नियुक्त किया गया। कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद जल्द ही नए सीजे की हाईकोर्ट में नियुक्ति हो सकेगी।

जस्टिस शर्मा को लेकर क्या विवाद है सुप्रीम कोर्ट जज मेहता ने कामकाज पर उठाए थे सवाल...हटाने की मांग की थी

सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस संदीप मेहता ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस एसपी शर्मा के प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज पर सवाल उठाते हुए सीजेआई सूर्यकांत से दूसरे राज्य से ‘तत्काल प्रभाव से’ चीफ जस्टिस नियुक्त करने का आग्रह किया था। जस्टिस मेहता ने 2,7 और 10 अगस्त को लिखे पत्र में कहा था कि दूसरी बेंचों में सूचीबद्ध कुछ केस ‘बिना वाजिब वजह’ जस्टिस शर्मा की बेंच में लाए गए। इनमें उदयपुर की ‘बेशकीमती जमीन’ से जुड़ी अपीलों का भी उल्लेख था जो जोधपुर मुख्य पीठ से संबंधित होने के बावजूद जयपुर में जस्टिस शर्मा की बेंच में सूचीबद्ध हुई। जोधपुर में 40 अदालतों वाली तैयार इमारत के उद्घाटन में देरी और बदलाव के निर्देश देने का मुद्दा भी उठाया गया।

ACJ एसपी शर्मा 5 तक रोस्टर से अलग, मामले दूसरी पीठ को भेजे जयपुर| हाईकोर्ट के कार्यवाहक सीजे एसपी शर्मा के खिलाफ वकीलों ने प्रदर्शन किया। वकीलों सुप्रीम कोर्ट जज संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर बहिष्कार कर दिया। इससे एक्टिंग सीजे की कोर्ट में केसों की सुनवाई नहीं हो पाई। एक्टिंग सीजे सवा घंटे ही सुनवाई कर सके। हालांकि, 5 सितंबर तक जस्टिस एसपी शर्मा ने खुद को रोस्टर से अलग कर लिया है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल का कहना है कि इस संबंध में बार एसोसिएशन सीजेआई को प्रतिवेदन भेजेगी और जस्टिस मेहता द्वारा लिखे गए पत्रों की जांच करवाए जाने का आग्रह किया जाएगा।

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