गन्ने की सीओ-0238 किस्म पर अत्यधिक निर्भरता किसानों के लिए रेड राट रोग का कारण बन रही है, जिससे चीनी उत्पादन में संकट गहरा रहा है।
HighLights
सीओ-0238 पर निर्भरता से रेड राट रोग का खतरा बढ़ा।
लाल सड़न से गन्ने की पैदावार और चीनी रिकवरी घटी।
आईसीएआर रोग प्रतिरोधी गन्ने की नई किस्में विकसित कर रहा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। गन्ने की एक ही किस्म पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता किसानों को भारी पड़ने लगी है और चीनी संकट का कारण भी। कभी किसानों की पसंदीदा रही सीओ-0238 ने पैदावार और चीनी की रिकवरी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन बड़े क्षेत्र में लगातार इसकी खेती होने से रेड राट (लाल सड़न) रोग का खतरा बढ़ गया।
अब गन्ना वैज्ञानिक खेतों में किस्मों की विविधता बढ़ाकर विकल्प तैयार करने पर जोर दे रहे हैं। सरकार ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए आईसीएआर को सीओ-0238 के विकल्प विकसित करने की जिम्मेदारी दी है।
क्या है किसान की जरूरत?
कृषि विज्ञानियों की जरूरत ऐसी किस्में विकसित करने की है जो अधिक पैदावार और चीनी की अच्छी मात्रा के साथ रेड राट और बदलते मौसम का भी मुकाबला कर सकें। क्योंकि चीनी का संकट मिल के गेट से नहीं, खेत से शुरू होता है। गन्ना कमजोर पड़ा तो मिल की रिकवरी घटेगी और उसका असर अंततः चीनी की कीमत पर भी पड़ेगा।
गन्ने के रकबे में बढ़ोतरी
देश में मौजूदा वर्ष में करीब 58.87 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई है। दस साल पहले इसका रकबा 49.27 लाख हेक्टेयर था। यानी इस दौरान गन्ने का रकबा 10 लाख हेक्टेयर बढ़ा। सीओ-0238 की व्यापकता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उत्तर भारत के पांच प्रमुख राज्यों में कभी 27.9 लाख हेक्टेयर में इसी किस्म की खेती होती थी, जो इन राज्यों के कुल गन्ना क्षेत्र का करीब 84 प्रतिशत था।
हालांकि अब तस्वीर बदल रही है। उत्तर प्रदेश में 2025-26 में सीओ-0238 का रकबा घटकर 8.34 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो राज्य के कुल गन्ना क्षेत्र का 29.17 प्रतिशत है। 2023-24 में इसकी खेती 17.76 लाख हेक्टेयर में होती थी। मतलब दो वर्षों में इसका रकबा आधे से भी कम हो गया है। इसकी जगह को-0118, सीओ-एलके-94184, सीओएस-13235 और सीओ-एलके-14201 जैसी किस्मों का क्षेत्र बढ़ा है।
रेड राट गन्ना का कैंसर
रेड राट को गन्ने का कैंसर कहा जाता है। इससे गन्ने का वजन और रस दोनों घटते हैं और उसमें सुक्रोज की मात्रा कम हो जाती है। आईसीएआर के शोध में भी बीमारी से प्रभावित गन्ने में वजन, रस, ब्रिक्स, सुक्रोज और चीनी रिकवरी में कमी दर्ज की गई है। यानी खेत में कम गन्ना और मिल में कम चीनी।
उत्तर प्रदेश में मौजूदा पेराई सत्र में 6,372 हेक्टेयर गन्ना इस रोग से प्रभावित हुआ, जो 2023-24 में लगभग 61,900 हेक्टेयर से अधिक था। कुछ इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर रही। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के निचले क्षेत्रों में सीओ-0238 के खेतों में 60 से 100 प्रतिशत तक पौधों के प्रभावित होने की स्थिति सामने आई।
आईसीएआर ने सीओ-0238 के विकल्प के तौर पर कई नई किस्में विकसित की हैं, जिन्हें खेतों तक पहुंचना अभी बाकी है। इनमें इक्षु-14 को रेड राट के प्रति प्रतिरोधी बताया गया है। सीओ-16030, इक्षु-10 और इक्षु-15 को भी रेड राट के प्रतिरोधी पाया गया है।