हरियाणा के किसान दिल्ली के जंतर-मंतर तक क्यों करेंगे पैदल मार्च? क्या है इनकी मांग? पुलिस हाई अलर्ट पर

Published on 16 अग॰ 2026

हरियाणा के किसान दिल्ली के जंतर-मंतर तक क्यों करेंगे पैदल मार्च? क्या है इनकी मांग? पुलिस हाई अलर्ट पर

Time Published: Sunday, August 16, 2026, 12:01 [IST]

हरियाणा के जींद में खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर किसान आंदोलन को लेकर माहौल गरमा गया है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 16 अगस्त से 'किसान बचाओ पदयात्रा' शुरू हो रही है। इसमें 51 पदयात्री शामिल होंगे। इनका लक्ष्य पैदल दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचना है। किसानों ने 29 अगस्त को दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम बनाया है। इसे देखते हुए हरियाणा पुलिस और प्रशासन ने बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी है।

किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद प्रशासन ने खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर हरियाणा की तरफ जाने वाला रास्ता बंद कर दिया है। यहां कई लेयर में बैरिकेड लगाए गए हैं। बड़े पत्थर और कंटेनर भी सड़क पर रखे गए हैं। कुछ जगहों पर कंटीले तार लगाए गए हैं। भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।

kisan bachao padyatra

प्रशासन का फोकस साफ है। किसान जत्था हरियाणा में दाखिल होकर दिल्ली की तरफ आगे न बढ़ सके। इसी वजह से बॉर्डर पर देर रात से ही सुरक्षा और सख्त कर दी गई। वाहनों की आवाजाही के लिए रूट में भी बदलाव किया गया है।

आज से शुरू होगी 228 किलोमीटर की पदयात्रा

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की ओर से घोषित इस मार्च की शुरुआत 16 अगस्त को दाता सिंहवाला से होगी। करीब 228 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद किसान 29 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

इस पदयात्रा की कमान किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल संभालेंगे। कुल 51 पदयात्री इस सफर में शामिल होंगे। यानी यह कोई बड़ा ट्रैक्टर-ट्रॉली काफिला नहीं है। किसान नेताओं ने पैदल मार्च के जरिए अपनी बात दिल्ली तक पहुंचाने का प्लान बनाया है।

दाता सिंहवाला में पहले सभा और अरदास, फिर दिल्ली मार्च

पदयात्रा शुरू होने से पहले दाता सिंहवाला गांव में गुरुद्वारे के पास सभा और अरदास रखी गई है। इसके बाद किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले शुभकरण सिंह के शहीदी स्थल से मिट्टी लेकर पदयात्री दिल्ली की तरफ रवाना होंगे।

तय कार्यक्रम के मुताबिक पदयात्रा दोपहर करीब 3 बजे शुरू होगी। पहले दिन उझाना गांव में किसानों के स्वागत की तैयारी है। इसके बाद बेलरखा गांव में रात रुकने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस पूरे कार्यक्रम में शहीदी स्थल की मिट्टी साथ ले जाने को आंदोलन के भावनात्मक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। किसान नेता इसे अपने संघर्ष की याद और किसानों के मुद्दों को दिल्ली तक ले जाने के प्रतीक के तौर पर पेश कर रहे हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध क्यों?

किसानों का यह मार्च सिर्फ दिल्ली पहुंचने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ा मुद्दा प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता है। किसान संगठनों का कहना है कि इस डील को रद्द किया जाना चाहिए। किसान संगठनों को आशंका है कि प्रस्तावित ट्रेड डील का असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर वे जंतर-मंतर पहुंचकर विरोध दर्ज कराना चाहते हैं।

29 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचने का लक्ष्य

दाता सिंहवाला बॉर्डर पर किसान जुटने लगे हैं और दूसरी तरफ प्रशासन भी पूरी तैयारी में है। सड़क पर बैरिकेड, कंटेनर और पत्थर लगाए गए हैं। पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 51 पदयात्री हरियाणा की सीमा पार करके दिल्ली की तरफ बढ़ पाएंगे? या फिर प्रशासन उन्हें बॉर्डर पर ही रोक देगा।

फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। किसानों का कहना है कि वे तय कार्यक्रम के मुताबिक पैदल दिल्ली जाएंगे। प्रशासन की तैयारी से साफ है कि बॉर्डर पर किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है।

किसानों ने 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने का लक्ष्य तय किया है। अगले करीब दो हफ्ते इस पूरे मार्च के लिए अहम होंगे। खासकर खनोरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर आज होने वाली गतिविधि से आगे की तस्वीर साफ होगी।

फिलहाल दाता सिंहवाला से शुरू होने वाली यह पदयात्रा एक बड़े सवाल के साथ आगे बढ़ रही है। क्या 51 किसानों का यह पैदल मार्च बिना रुकावट दिल्ली तक पहुंचेगा, या हरियाणा बॉर्डर पर ही प्रशासन और किसान आमने-सामने आ जाएंगे? आने वाले दिनों में यही इस किसान आंदोलन की सबसे बड़ी कहानी होगी।