मैरीलैंड ने डिजिटल विज्ञापन टैक्स किया रद्द: अब टेक दिग्गज कंपनियों को मिलेगा वसूला गया पैसा, जानें पूरा मामला
Sat, 15 Aug 2026 09:44 AM IST
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Sat, 15 Aug 2026 09:44 AM IST
सार
Maryland Tax Court: अमेरिका में डिजिटल विज्ञापन पर लगाए गए टैक्स को बड़ा झटका लगा है। मैरीलैंड टैक्स कोर्ट ने राज्य के डिजिटल विज्ञापन टैक्स को रद्द कर दिया है। आइए जानते हैं इसके पीछे की प्रमुख वजह क्या है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
विस्तार
Maryland Digital Ad Tax: अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में डिजिटल विज्ञापन पर लगाए टैक्स को रद्द कर दिया गया है। साथ ही अधिकारियों को एपल, गूगल और पिकॉक टीवी जैसी कंपनियों से पहले वसूली गई टैक्स राशि वापस करने का आदेश दिया है।
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कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह टैक्स अमेरिकी संविधान और संघीय कानूनों के कई प्रावधानाें से टकराता है। अदालत का कहना है कि यह कानून फेडरल इंटरनेट टैक्स फ्रीडम एक्ट, संविधान के फर्स्ट अम्बेडमेंट, कॉमर्स क्लॉस और ड्यू प्राेसेस क्लॉस से जुड़ी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करता है।
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आखिर मैरीलैंड का डिजिटल विज्ञापन टैक्स क्या था?
- मैरीलैंड ने साल 2021 में डिजिटल विज्ञापन पर टैक्स लगाने वाला अमेरिका का पहला कानून लागू किया था। इसका उद्देश्य बड़ी टेक कंपनियों से अतिरिक्त राजस्व जुटाकर राज्य के K-12 शिक्षा कार्यक्रमों के लिए फंड उपलब्ध कराना था। राज्य का अनुमान था कि इस टैक्स से हर साल करीब 250 मिलियन डॉलर की आय हो सकती है।
- इसमें कानून के तहत उन कंपनियों को निशाना बनाया गया था, जिनका वैश्विक सालाना ग्रॉस रेवेन्यू 100 मिलियन डॉलर से अधिक था। डिजिटल विज्ञापन से होने वाली आय पर टैक्स की शुरुआती दर 2.5 प्रतिशत रखी गई थी। कंपनियों के ग्लोबल रेवेन्यू बढ़ने के साथ यह दर भी बढ़ती थी और 15 बिलियन डॉलर या उससे अधिक के ग्लोबल रेवेन्यू वाली कंपनियों के लिए यह दर 10 प्रतिशत तक पहुंच सकती थी।
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बड़ी टेक कंपनियों ने दी थी चुनौती
- इस कानून को लेकर बड़ी टेक कंपनियों और उनके प्रतिनिधियों ने कई अदालतों में कानूनी चुनौती दी थी। मेटा और अमेजन जैसी कंपनियाें की ओर से दलील दी गई कि कानून डिजिटल कंपनियों को अनुचित तरीके से निशाना बनाता है।
- पिछले साल अमेरिकी फोर्थ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी कानून के एक हिस्से को असंवैधानिक माना था। अदालत ने कहा था कि कंपनियों को अपने ग्राहकों को टैक्स के बारे में जानकारी देने से रोकना उनके First Amendment के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
टैक्स कोर्ट ने क्यों रद्द किया कानून?
- टैक्स कोर्ट ने कहा कि अंतर-राज्यीय व्यापार को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से अमेरिकी कांग्रेस की है, न कि किसी राज्य की विधानसभा की। साथ ही अदालत से यह भी सवाल उठाया कि टैक्स की गणना कंपनियों के वैश्विक रेवेन्यू के आधार पर की जा रही थी, जबकि टैक्स मैरीलैंड में दिखाए जाने वाले डिजिटल विज्ञापनों से जुड़े रेवेन्यू पर लगाया जा रहा था।
- कोर्ट ने इंटरनेट टैक्स फ्रीडम एक्ट के प्रावधानों का भी हवाला दिया। इस संघीय कानून के तहत इंटरनेट आधारित सेवाओं पर ऐसे टैक्स लगाने पर रोक है, जहां समान ऑफलाइन सेवाओं पर वैसा टैक्स नहीं लगाया जाता। अदालत ने पाया कि फिलहाल डिजिटल विज्ञापन और प्रिंट या बिलबोर्ड विज्ञापन के बीच ऐसा पर्याप्त अंतर नहीं है, जो डिजिटल विज्ञापनों पर अलग टैक्स को उचित ठहरा सके।
राज्य के नेताओं ने असहमति क्यों जताई?
- मैरीलैंड सीनेट के प्रेसिडेंट बिल फर्ग्यूसन और हाउस स्पीकर जोसलीन पेना-मेल्निक ने फैसले पर असहमति जताई है। दोनों डेमोक्रेट नेताओं ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
- उनका मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में आए बदलावों को देखते हुए राज्य के टैक्स सिस्टम को भी आधुनिक बनाना जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि मैरीलैंड का टैक्स सिस्टम निष्पक्ष, टिकाऊ और मौजूदा अर्थव्यवस्था के अनुरूप बनाने के लिए राज्य आगे भी काम करता रहेगा।
दूसरे राज्यों के लिए भी अहम फैसला
- मैरीलैंड के इस मामले पर दूसरे अमेरिकी राज्यों की भी नजर थी। कई राज्य डिजिटल विज्ञापन और बड़ी टेक कंपनियों की ऑनलाइन कमाई पर टैक्स लगाने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
- ऐसे में मैरीलैंड टैक्स कोर्ट का फैसला भविष्य में राज्यों की डिजिटल टैक्स नीतियों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि राज्य के नेताओं ने संकेत दिया है कि मामले में आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इसलिए इस विवाद का अंतिम परिणाम अभी पूरी तरह तय नहीं माना जा सकता।