'सीमा पर हालात तय करेंगे आपसी रिश्ते', भारत-चीन संबंध और 'मक्का डील' पर विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान - india on china border arunachal mecca deal mea statement

Published on 11 अग॰ 2026

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत-चीन सीमा पर हालात ही दोनों देशों के रिश्ते तय करेंगे, LAC पर शांति महत्वपूर्ण है। ...और पढ़ें

भारत-चीन सीमा पर शांति से तय होंगे द्विपक्षीय संबंध: MEA

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबानसिरी जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की आई खबरों के बीच भारत ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारत और चीन की सीमा पर कैसे हालात रहते हैं, इससे ही दोनों देशों के रिश्ते तय होंगे। सीमा की स्थिति दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर असर डालेगी।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ तौर पर यह नहीं कहा कि चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की थी, लेकिन उनका बयान बता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में स्थिति सामान्य नहीं है।

सीमा पर हालात तय करेंगे भारत-चीन संबंध 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'भारत और चीन के बीच सीमा क्षेत्रों से जुड़े मामलों में हमने हमेशा जोर दिया है कि ये मुद्दे सबसे गंभीर हैं। इन क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना सर्वाधिक जरूरी है। हमने यह भी स्पष्ट किया है कि सीमा मामलों की स्थिति हमारे बड़े द्विपक्षीय संबंधों को प्रतिबिंबित करेगी।'

भारत ने यही बात छह अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित भारत व चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 36वीं बैठक में भी कही थी। बैठक में दोनों पक्षों ने एलएसी की स्थिति की समीक्षा की और मौजूदा कूटनीतिक व सैन्य चैनलों के जरिये मुद्दों को सुलझाने पर सहमति जताई।

सनद रहे कि कुछ दिन पहले अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में स्थित पुकार ला और ओल्लो इलाके के नागरिकों ने बताया था कि उन्होंने चीनी सैनिकों को घुसपैठ करते देखा था। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इन रिपोर्टों से इन्कार करते हुए कहा कि सेना सीमा पर तैनात है और वह सुरक्षा करने में सक्षम है। वह सेना और स्थानीय संगठनों से बात करके वास्तविक स्थिति जानेंगे।

'अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग'

अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को मानक नामों से चिह्नित करने के सरकार के फैसले पर चीन की तरफ से जताई गई आपत्ति को भी विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। जायसवाल ने कहा, 'अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है।

यह स्वयंसिद्ध तथ्य है। इस निर्विवाद वास्तविकता को कुछ भी नहीं बदल सकता।' चीन अरुणाचल को ‘जांगनान’ कहता है और भारत की संप्रभुता को नहीं मानता। भारत ने सर्वे आफ इंडिया के नक्शे पर इन स्थानों को आधिकारिक रूप से चिह्नित किया है, जिसमें ऐतिहासिक महत्व वाले पास और स्मारक शामिल हैं। इस कदम को चीन के बार-बार नाम बदलने के प्रयासों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

'मक्का समझौते' पर भारत का बयान

विदेश मंत्रालय ने मक्का समझौते को लेकर कहा कि भारत, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हाल ही में हुए मक्का समझौते के असर की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के नजरिए से कर रहा है।

बयान में कहा गया, 'हाल ही में जो डील हुई है, उसके बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि हम पश्चिम एशिया के टकराव से जुड़ी घटनाओं पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। जहां तक इस खास समझौते की बात है, तो हम राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के नजरिए से भी इसके असर की जांच कर रहे हैं।'