बड़वानी में नर्मदा किनारे अवैध रेत खनन: पीपलूद, बड़दा, खेड़ी घाट पर पोकलेन, डंपर से खुदाई; मेधा पाटकर बोलीं- जिम्मेदार कार्रवाई नहीं करते - Barwani News

Published on 11 जुल॰ 2026

जिला मुख्यालय से महज 10-12 किलोमीटर दूर नर्मदा के डूब क्षेत्र में आने वाले पीपलूद, बड़दा और खेड़ी घाटों पर बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन का खेल चल रहा है। 'दैनिक भास्कर' की टीम ने मौके पर जाकर देखा तो वहां दिनदहाड़े पोकलेन मशीनों और डंपरों से रेत निकाल

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इस गंभीर स्थिति पर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने चिंता जताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी (NGT) के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है।

शनिवार दोपहर जब मीडिया की टीम इन गांवों में ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो नर्मदा किनारे का नजारा हैरान करने वाला था। भारी-भरकम पोकलेन मशीनें बिना किसी डर के लगातार नदी का सीना चीर रही थीं।

घाटों पर गहरे-गहरे गड्ढे बनाकर रेत निकाली जा रही थी और उसे डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरा जा रहा था। गाड़ियों का आना-जाना बिना रुके लगातार जारी था, जिससे ऐसा लग रहा था मानो वहां कोई वैध और व्यवस्थित खनन साइट चल रही हो।

टपरियों से रखी जा रही है आने-जाने वालों पर नजर

मौके पर करीब 6 पोकलेन मशीनें, एक दर्जन से ज्यादा डंपर और भारी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अवैध उत्खनन में लगी दिखाई दीं। स्थानीय ग्रामीणों ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पीपलूद गांव से लेकर खदान वाले रास्ते तक जगह-जगह अस्थायी टपरियां (झोपड़ियां) बनाई गई हैं।

इन टपरियों में बैठे लोग रास्ते से आने-जाने वाले अनजान लोगों और अधिकारियों पर नजर रखते हैं और पल-पल की सूचना खनन करने वालों को देते हैं।

जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे सवाल

इतने संगठित और बड़े पैमाने पर चल रहे इस अवैध कारोबार को देखकर अब प्रशासन और खनिज विभाग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध धंधा कोई एक-दो दिन से नहीं, बल्कि लंबे समय से लगातार चल रहा है।

ऐसे में यह बात गले नहीं उतरती कि दिन-रात सैकड़ों डंपरों की आवाजाही और भारी मशीनों का शोर जिम्मेदार अधिकारियों के कानों और नजरों से कैसे ओझल बना हुआ है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रेसवार्ता में भी उठा मुद्दा

इसी बीच शनिवार दोपहर नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मेधा पाटकर ने भी जिले में जारी अवैध रेत उत्खनन को लेकर जिला प्रशासन और खनिज विभाग पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बावजूद नर्मदा तटीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उत्खनन हो रहा है।

उनका आरोप था कि बाहरी लोग रॉयल्टी और ठेके की आड़ में नियमों के विपरीत खनन कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।

पर्यावरण पर गंभीर खतरे की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदी के किनारों पर इसी तरह अनियंत्रित खनन जारी रहा तो इससे नर्मदा के प्राकृतिक प्रवाह, तटों की स्थिरता, जैव विविधता और भविष्य में बाढ़ की स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर कटाव बढ़ चुका है और नदी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।

जिम्मेदार क्या बोले?

खनिज अधिकारी दिनेश डुडवे से बात की गई तो उन्होंने कहा कि रेत खनन का तीन वर्ष का टेंडर है। खनन कहां हो रहा है? इसकी जानकारी नहीं है।