जानिए भारत के उस अनोखे गांव की कहानी जहां से गुजरती है दो देशों की सीमा, यहां के लोग सोते हैं देश में और खाने के लिए जाते हैं विदेश

Published on 9 अग॰ 2026

नई दिल्ली। क्या आपने कभी किसी ऐसे घर के बारे में सुना है? जहां का मुख्य दरवाजा एक देश में खुलता है और पिछला दरवाजा दूसरे देश में? सुनने में भले ही यह किसी काल्पनिक फिल्म की कहानी लगे, लेकिन भारत के पूर्वोत्तर हिस्से में यह पूरी तरह सच है। यहां एक ऐसा घर मौजूद है जहाँ इंसान सोता भारत की सीमा में है, लेकिन सुबह का खाना खाने के लिए उसे म्यांमार जाना पड़ता है।

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यह दिलचस्प और अनोखा स्थान भारत के नागालैंड राज्य के मोन जिले में स्थित ‘लॉन्गवा गांव’ (Longwa Village) है। घने जंगलों और खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा यह गांव अपनी भौगोलिक बनावट और अनूठी संस्कृति के कारण दुनिया भर में मशहूर है।
एक घर, दो देश: राजा का अनोखा महल लॉन्गवा गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भारत और म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा (International Border) इस गांव को दो हिस्सों में बांटती हुई सीधे इसके राजा के घर के बीचों-बीच से होकर गुजरती है। गांव के पारंपरिक राजा को स्थानीय भाषा में ‘अंग’ (Angh) कहा जाता है। ‘अंग’ का महल इतना विशाल है कि इसका आधा हिस्सा भारत में आता है और आधा हिस्सा म्यांमार की सीमा में। इसी भौगोलिक स्थिति के कारण राजा के घर का बेडरूम भारत के क्षेत्र में पड़ता है, जबकि उनका मुख्य रसोईघर (Kitchen) म्यांमार में स्थित है। यानी राजा और उनका शाही परिवार एक ही छत के नीचे रहते हुए हर दिन बिना किसी पासपोर्ट या वीज़ा के दर्जनों बार दो देशों के बीच आवाजाही करता है।

बिना वीज़ा दो देशों पर हुकूमत

लॉन्गवा के राजा का प्रभाव केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। वे भारत के नागालैंड और म्यांमार के अरुणाचल-सीमावर्ती इलाकों में फैले लगभग 70 से अधिक गांवों के मुखिया माने जाते हैं। कोंयाक नागा जनजातियों (Konyak Naga Tribe) का यह गाँव दो देशों में विभाजित होने के बावजूद अपनी पारंपरिक व्यवस्था और राजा के प्रति निष्ठा से एकजुट है। यहां के निवासियों को दोनों देशों की सीमा पार करने के लिए किसी वीज़ा या पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती। इस गांव के लोगों के पास दोनों देशों की दोहरी नागरिकता जैसी सुविधाएँ व्यावहारिक रूप से उपलब्ध हैं, और वे दोनों सीमाओं के पार बिना किसी रोक-टोक के खेती और व्यापार करते हैं।

लॉन्गवा गांव न केवल सीमा के अनोखे विभाजन के लिए जाना जाता है, बल्कि यह कोंयाक जनजाति की समृद्ध संस्कृति और उनके ऐतिहासिक हेडहंटिंग (Headhunting) अतीत का भी साक्षी रहा है। आज यह गाँव भारत और दुनिया भर के पर्यटकों के लिए उत्सुकता और आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

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रिपोर्ट : दीपांजली मिश्रा