विवि ने पीजी विभागों व संबद्ध कॉलेजों को जारी किया निर्देश - Purnia News

Published on 8 अग॰ 2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के छह वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 को लेकर पूर्णिया विश्वविद्यालय ने सभी स्नातकोत्तर विभागों तथा अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के लिए नया निर्देश जारी किया है।

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विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन महाविद्यालयों ने अब तक इस अभियान के तहत कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया है, वे 10 अगस्त तक अनिवार्य रूप से कम-से-कम एक कार्यक्रम आयोजित करें। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद उसकी विस्तृत रिपोर्ट 11 अगस्त तक विश्वविद्यालय को उपलब्ध करानी होगी।

कुलसचिव की ओर से जारी पत्र में उच्च शिक्षा विभाग, बिहार सरकार तथा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, उसकी उपलब्धियों और नवाचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।

विश्वविद्यालय के निर्देश के अनुसार महाविद्यालय अपनी सुविधा के अनुसार एक या एक से अधिक गतिविधियों का आयोजन कर सकते हैं। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की छह वर्षों की उपलब्धियों पर विशेष व्याख्यान, संगोष्ठी, परिचर्चा, पैनल चर्चा और हितधारक परामर्श शामिल हैं। इसके अलावा अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और बेस्ट प्रैक्टिस की प्रदर्शनी भी लगाई जा सकती है। विद्यार्थियों के लिए वाद-विवाद, क्विज, पोस्टर, कविता, निबंध, नवाचार, हैकाथॉन और वीडियो प्रतियोगिताएं आयोजित करने की भी अनुमति दी गई है। भारतीय भाषाओं, भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक गतिविधियों, उद्योग-शिक्षा संवाद, कौशल विकास तथा रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों पर भी विशेष जोर देने को कहा गया है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिजिटल शिक्षा, बहुविषयक शिक्षा, छात्र कल्याण, अनुसंधान, आधारभूत संरचना और विकसित भारत 2047 जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करने का भी निर्देश दिया गया है।

मीडिया प्रभारी प्रो. संतोष कुमार सिंह ने बताया विश्वविद्यालय ने कार्यक्रमों को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखने की सलाह दी है। निर्देश में कहा गया है कि कार्यक्रमों में शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी, पूर्ववर्ती छात्र, उद्योग प्रतिनिधियों तथा अन्य हितधारकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा और इसके प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी। प्रशासन का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों से नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों, नवाचारों और भविष्य की संभावनाओं के प्रति विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में बेहतर समझ विकसित होगी।