अमीर होने से पहले ही बूढ़ा हो जाएगा भारत, रिपोर्ट में चौंकाने वाले दावे - india aging population 20 over 60 by 2050 study reveals

Published on 7 अग॰ 2026

एक अध्ययन के अनुसार, भारत अमीर बनने से पहले ही बूढ़ा हो जाएगा, 2050 तक देश की 20% आबादी 60 वर्ष से अधिक उम्र की होगी। ...और पढ़ें

(यह तस्वीर AI से बनाई गई है)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि अमीर बनने से पहले ही भारत बूढ़ा हो जाएगा। एक अध्ययन में कहा गया है कि 2050 तक 20 प्रतिशत आबादी 60 साल से अधिक उम्र की होगी। औसतन हर पांच में से एक भारतीय की उम्र 60 साल से अधिक होगी और इनमें से लगभग 10 में से सात बुजुर्ग ग्रामीण भारत में रहते होंगे।

यह अध्ययन ट्रांसफार्म रूरल इंडिया की ओर से किया गया है। इसमें कहा गया है कि अमीर बनने से पहले ही भारत की आबादी बूढ़ी हो रही है, जबकि कई विकसित देश अपनी आबादी के बूढ़े होने से पहले ही अमीर बन गए थे। हर बुजुर्ग व्यक्ति की देखभाल के लिए उपलब्ध कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या 2001 में 8.4 थी, जो 2026 तक घटकर औसतन 5.2 रह जाने का अनुमान है।

यह रिपोर्ट नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे, भारत में उम्र बढ़ने पर हुए लंबे समय के अध्ययन, जनगणना के अनुमानों, समय के इस्तेमाल से जुड़े सर्वे और दूसरे राष्ट्रीय डाटा के अध्ययन पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि भारत का पारंपरिक परिवार-आधारित देखभाल माडल बढ़ते दबाव में है।

इसकी वजह यह है कि परिवार पहले के मुकाबले छोटे हो गए हैं, युवा पीढ़ी काम के लिए बाहर जा रही है और लोग अधिक समय तक जीवित रह रहे हैं। इसके बावजूद, बुजुर्गों की देखभाल का लगभग 94 प्रतिशत काम अब भी घरों के भीतर ही किया जाता है, जिससे देखभाल की बढ़ती और ज़्यादा जटिल जरूरतों को पूरा करने के लिए परिवार के कम सदस्य ही उपलब्ध रह पाते हैं।'

निवेश से 1.1 करोड़ नौकरियां संभव

अध्ययन के अनुसार, महिलाएं हर दिन बिना पैसे वाले देखभाल के काम में लगभग 305 मिनट बिताती हैं, जबकि पुरुष 56 मिनट बिताते हैं। बिना पैसे वाले देखभाल के काम का यह असमान बंटवारा महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी को बेहतर बनाने की राह में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है।

इसमें 'केयर' (देखभाल) को एक आर्थिक अवसर के तौर पर भी पेश किया गया है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि भारत की जीडीपी का दो प्रतिशत हिस्सा 'केयर इकानमी' में निवेश करने से लगभग 1.1 करोड़ नौकरियां पैदा हो सकती हैं, जिनमें से ज़्यादातर नौकरियां ग्रामीण महिलाओं के लिए होंगी।