जमशेदपुर एफसी के हटने से भारतीय फुटबॉल को गहरा आघात: सुनील छेत्री

Published on 2 अग॰ 2026

नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) भारतीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी सुनील छेत्री ने इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) से जमशेदपुर एफसी के हटने के फैसले पर गहरी निराशा जताते हुए इसे ‘दिल पर जोरदार चोट’ करार दिया है।

उन्होंने टाटा समूह से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि भारतीय फुटबॉल को इस समय उनकी सबसे अधिक जरूरत है।

आईएसएल 2021-22 की ‘विनर्स शील्ड’ विजेता जमशेदपुर एफसी ने 31 जुलाई को आगामी सत्र में भागीदारी शुल्क जमा करने की समयसीमा चूकने के कुछ घंटे बाद 2026-27 सत्र से लीग से हटने की घोषणा की थी। क्लब ने इंस्टाग्राम पर जारी बयान में पुष्टि की कि वह आगामी सत्र से आईएसएल का हिस्सा नहीं होगा। इसके साथ ही चार सितंबर से शुरू होने वाले नए सत्र में अब 13 टीमें ही खेलेंगी।

भारत के सर्वकालिक सर्वाधिक गोल करने वाले और सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी छेत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘यह जानकर कि जमशेदपुर ने अपनी सीनियर टीम का संचालन बंद कर दिया है, दिल पर गहरी चोट लगी है। खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ क्लब के बिना हो जाएंगे। हो सकता है कि उन्हें बाद में कोई नया क्लब मिल जाए। लीग एक टीम कम के साथ आगे बढ़ जाएगी, लेकिन शीर्ष स्तर के भारतीय फुटबॉल में टाटा समूह का नहीं होना एक ऐसी त्रासदी की तरह होगी, जिसकी कोई भरपाई नहीं हो सकती।’’

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जमशेदपुर एफसी ने हालांकि स्पष्ट किया है कि क्लब की संचालक कंपनी ‘जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (जेएफएसपीएल)’ लीग से हटने के बावजूद जमीनी स्तर पर फुटबॉल के विकास और प्रतिभाओं को बढ़ावा देने का काम जारी रखेगी।

छेत्री ने भारतीय फुटबॉल में टाटा समूह के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पहले टाटा फुटबॉल अकादमी (टीएफए) और बाद में जमशेदपुर एफसी के जरिए समूह ने भारतीय फुटबॉल को मजबूत आधार दिया है।

उन्होंने लिखा, ‘‘भारतीय फुटबॉल में हिस्सेदार बने रहना आसान नहीं है। लेकिन जब सब कुछ बिखरता हुआ नजर आता है, तब परिवार के साथ खड़े रहने की उम्मीद होती है। टाटा समूह भारतीय फुटबॉल के उन मजबूत स्तंभों में से एक रहा है, जिस पर हमेशा भरोसा किया गया।’’

सूत्रों के अनुसार, क्लब के इस फैसले के पीछे अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) का वह निर्देश भी एक कारण माना जा रहा है, जिसके तहत क्लबों को 1.10 करोड़ रुपये का प्रशासनिक शुल्क दो किस्तों में जमा करना था। बताया जा रहा है कि क्लब के निदेशक मंडल ने फिलहाल सीनियर टीम को बंद करने का भी फैसला किया है।

छेत्री ने टाटा समूह से भावनात्मक अपील करते हुए लिखा, ‘‘मैं समझता हूं कि खेलों में कई कठिन फैसले बोर्डरूम में व्यावसायिक दृष्टि से लिए जाते हैं। लेकिन मैं केवल यही अनुरोध और उम्मीद कर सकता हूं कि टाटा समूह का नेतृत्व इस बार दिमाग से ज्यादा दिल की सुने और अपने फैसले पर पुनर्विचार करे। यह कारोबारी नजरिए से शायद अच्छा फैसला न हो, लेकिन भारतीय फुटबॉल के लिए इस समय यही सबसे जरूरी फैसला होगा।’

भाषा आनन्द नमिता

नमिता