Moradabad Nagar Assembly Caste Equations: मुरादाबाद नगर के जातिगत समीकरण 2027

Published on 31 जुल॰ 2026

मुरादाबाद नगर विधानसभा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे दिलचस्प शहरी सीटों में शामिल है। Moradabad Nagar Assembly Caste Equations की बात करें तो यहां मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी के साथ वैश्य, ठाकुर, दलित, ब्राह्मण, सैनी और दूसरे पिछड़े वर्ग चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2026 की अंतिम SIR मतदाता सूची में मुरादाबाद नगर विधानसभा के कुल 4,71,327 मतदाता दर्ज हैं। संख्या के लिहाज से यह मुरादाबाद जिले की सबसे बड़ी विधानसभा सीट है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

मुरादाबाद नगर की राजनीति को केवल हिंदू-मुस्लिम समीकरण में बांधकर देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। सीट पर मुस्लिम आबादी बड़ी है, लेकिन भाजपा 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। खास बात यह है कि 2022 में जीत का अंतर केवल 782 वोट था। ऐसे में वैश्य वोट, मुस्लिम वोटों की एकजुटता, दलित और OBC मतदाताओं का रुख तथा मतदान प्रतिशत में छोटा बदलाव भी 2027 में परिणाम बदल सकता है।

मुरादाबाद नगर विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभामुरादाबाद नगर
विधानसभा संख्या28
जिलामुरादाबाद
लोकसभा क्षेत्रमुरादाबाद
आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकरितेश कुमार गुप्ता
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
2022 विजेतारितेश कुमार गुप्ता
2022 जीत का अंतर782 वोट
2026 कुल मतदाता4,71,327
सीट का स्वरूपपूरी तरह शहरी
प्रमुख सामाजिक समूहमुस्लिम, वैश्य, ठाकुर, दलित, ब्राह्मण, सैनी व अन्य OBC
प्रमुख चुनावी मुद्देरोजगार, कारोबार, पीतल उद्योग, यातायात, सड़क, जलनिकासी, बिजली और नगरीय सुविधाएं

वर्तमान में भाजपा के रितेश कुमार गुप्ता मुरादाबाद नगर से विधायक हैं। उन्होंने 2017 और 2022 में लगातार दो बार इस सीट पर जीत दर्ज की है।

Moradabad Nagar Assembly Caste Equations में मुस्लिम और वैश्य मतदाता सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं। पुराने चुनावी आकलनों में सीट पर करीब 55 प्रतिशत मुस्लिम और 45 प्रतिशत हिंदू मतदाता बताए गए थे। हिंदू मतदाताओं में वैश्य समाज की मौजूदगी विशेष रूप से प्रभावशाली मानी गई है। मुस्लिम मतदाताओं के भीतर अंसारी समुदाय की संख्या भी महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।

हालांकि इन पुराने प्रतिशतों को 2026 की आधिकारिक समुदायवार मतदाता संख्या नहीं माना जाना चाहिए। 2011 की जनगणना आधारित विधानसभा प्रोफाइल में मुरादाबाद नगर की आबादी में लगभग 51.68 प्रतिशत हिंदू और 46.79 प्रतिशत मुस्लिम हिस्सेदारी का अनुमान मिलता है। दोनों आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि एक चुनावी मतदाता अनुमान है और दूसरा जनसंख्या आधारित आकलन।

इसलिए 2027 के चुनाव के लिए किसी समुदाय की निश्चित मतदाता संख्या बताने के बजाय उसकी सामाजिक मौजूदगी, पुराने मतदान व्यवहार और बूथवार प्रभाव को देखना अधिक उचित होगा।

मुरादाबाद नगर का अनुमानित सामाजिक समीकरण

सामाजिक समूहचुनावी भूमिका
मुस्लिमसबसे बड़े और निर्णायक समूहों में शामिल
अंसारीमुस्लिम मतदाताओं के भीतर महत्वपूर्ण सामाजिक समूह
वैश्यहिंदू मतदाताओं में सबसे प्रभावशाली समूहों में शामिल
ठाकुर/राजपूतगैर-मुस्लिम वोटों के समीकरण में अहम
अनुसूचित जाति/दलितकरीबी मुकाबले में निर्णायक
ब्राह्मणभाजपा के सवर्ण आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा
सैनीOBC वोटों में महत्वपूर्ण
यादवसपा के पारंपरिक सामाजिक आधार का हिस्सा
अन्य OBCछोटे अंतर वाले चुनाव में परिणाम प्रभावित करने की क्षमता

नोट: निर्वाचन आयोग विधानसभा स्तर पर जाति या धर्म के हिसाब से मौजूदा मतदाता संख्या प्रकाशित नहीं करता। इसलिए ऊपर दिया गया सामाजिक वर्गीकरण चुनावी आकलनों और जनसांख्यिकीय संकेतों पर आधारित है।

2026 में मुरादाबाद नगर में 4,71,327 मतदाता

2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार मुरादाबाद नगर विधानसभा में कुल 4,71,327 मतदाता हैं। इनमें 2,49,377 पुरुष, 2,21,916 महिला और 34 अन्य मतदाता शामिल हैं। मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा मतदाता इसी सीट पर हैं।

मतदाता वर्गसंख्या
पुरुष मतदाता2,49,377
महिला मतदाता2,21,916
अन्य34
कुल मतदाता4,71,327

2026 के पुनरीक्षण में मुरादाबाद नगर से नए मतदाता जोड़ने के लिए 45,203 आवेदन आए थे। इनमें 43,075 नाम स्वीकार किए गए। इसके अलावा 4,228 नाम हटाए गए और 16,305 संशोधन आवेदन दर्ज हुए। जिले में नए मतदाताओं को जोड़ने और प्रविष्टियों में सुधार के मामले में मुरादाबाद नगर सबसे सक्रिय विधानसभा रही।

2022 के मुकाबले वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव

2022 विधानसभा चुनाव के समय मुरादाबाद नगर में करीब 5.29 लाख मतदाता दर्ज थे। 2026 में यह संख्या घटकर 4,71,327 रह गई है। यानी पुराने चुनावी मतदाता आधार की तुलना में लगभग 58 हजार का अंतर दिखाई देता है।

इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण असर जातीय समीकरण पर पड़ता है। 2017 या 2022 में किसी समुदाय की जो अनुमानित संख्या बताई जाती थी, उसे सीधे 2026 की सूची पर लागू करना ठीक नहीं होगा।

राजनीतिक दलों को 2027 से पहले बूथ स्तर पर नए सिरे से यह समझना होगा कि किन इलाकों में वोटर संख्या बदली है, नए मतदाता कहां जुड़े हैं और किन क्षेत्रों में मतदाता सूची का आकार कम हुआ है।

मुस्लिम मतदाता क्यों हैं निर्णायक?

मुरादाबाद नगर में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी किसी भी चुनावी रणनीति का केंद्रीय हिस्सा रही है। 2012 में समाजवादी पार्टी ने इसी सीट पर बड़ी जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 और 2022 में भाजपा ने लगातार दो बार सपा को बेहद प्रतिस्पर्धी मुकाबलों में हराया।

मुस्लिम मतदाताओं में अंसारी समाज की बड़ी मौजूदगी मानी जाती है। इसके अलावा कुरैशी, सैफी और दूसरे मुस्लिम समुदाय भी सीट की सामाजिक संरचना का हिस्सा हैं।

सपा के लिए मुस्लिम वोटों की अधिकतम एकजुटता सबसे बड़ा चुनावी आधार है। दूसरी ओर बसपा, कांग्रेस या किसी तीसरे दल का मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में आता है तो मुस्लिम वोटों का बंटवारा भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है।

2022 का नतीजा इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है। भाजपा सिर्फ 782 वोट से जीती, जबकि तीसरे स्थान पर रहे बसपा उम्मीदवार को भी हजारों वोट मिले।

वैश्य वोट भाजपा की ताकत क्यों?

मुरादाबाद नगर की राजनीति में वैश्य मतदाताओं का प्रभाव लंबे समय से रहा है। शहर का व्यापारिक चरित्र और पीतल उद्योग से जुड़ी कारोबारी अर्थव्यवस्था इस समुदाय की राजनीतिक भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाती है।

वर्तमान विधायक रितेश कुमार गुप्ता स्वयं वैश्य समाज से आते हैं। भाजपा ने 2017 और 2022 दोनों चुनाव उनके नेतृत्व में जीते।

मुरादाबाद शहर में व्यापारी और कारोबारी वर्ग के मुद्दे भी विधानसभा चुनाव को प्रभावित करते हैं। जीएसटी, कारोबार, बाजारों की सुविधाएं, यातायात, बिजली, औद्योगिक ढांचा और पीतल उद्योग से जुड़े सवाल इस वोट बैंक की राजनीतिक प्राथमिकताओं में रह सकते हैं।

अगर भाजपा वैश्य मतदाताओं के साथ ठाकुर, ब्राह्मण, सैनी, दलित और दूसरे हिंदू समूहों को जोड़ने में सफल रहती है तो सीट पर उसकी स्थिति मजबूत होती है।

ठाकुर, ब्राह्मण और सैनी मतदाता भी महत्वपूर्ण

मुरादाबाद नगर में गैर-मुस्लिम मतदाता किसी एक जाति तक सीमित नहीं हैं। वैश्य समाज के साथ ठाकुर, ब्राह्मण, सैनी, दलित और दूसरे OBC समूह भी बड़ी चुनावी भूमिका निभाते हैं।

भाजपा के लिए इन मतदाताओं का अधिकतम एकीकरण महत्वपूर्ण रहा है। 2017 में भाजपा को लगभग 44.6 प्रतिशत वोट मिले थे। 2022 में पार्टी का वोट शेयर बढ़कर 46.12 प्रतिशत हो गया।

यह वोट शेयर मुस्लिम मतदाताओं की मजबूत मौजूदगी के बावजूद भाजपा को लगातार दो बार जीत दिलाने के लिए पर्याप्त रहा।

लेकिन 2022 के सिर्फ 782 वोट के अंतर को देखते हुए किसी एक सामाजिक समूह में कुछ हजार वोटों का बदलाव भी सत्ता का समीकरण उलट सकता है।

दलित मतदाता किस तरफ जाएंगे?

2011 आधारित विधानसभा प्रोफाइल में मुरादाबाद नगर की अनुसूचित जाति आबादी करीब 11.51 प्रतिशत बताई गई है। इसे मौजूदा मतदाता प्रतिशत नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन सीट पर दलित मतदाताओं के राजनीतिक महत्व का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है।

इतनी हिस्सेदारी वाले वोट बैंक का झुकाव सपा और भाजपा के बीच करीबी लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

बसपा के लिए दलित मतदाता उसका परंपरागत आधार रहे हैं। लेकिन यदि बसपा का वोट शेयर कमजोर होता है और दलित मतदाता भाजपा तथा सपा के बीच बंटते हैं तो मुख्य मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है।

भाजपा गैर-जाटव दलित समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती रही है, जबकि सपा PDA रणनीति के जरिए दलित और पिछड़े वर्गों को मुस्लिम वोट बैंक के साथ जोड़ने की कोशिश कर सकती है।

मुरादाबाद नगर पूरी तरह शहरी सीट

मुरादाबाद नगर की एक बड़ी खासियत यह है कि इसका चुनावी चरित्र पूरी तरह शहरी है। उपलब्ध विधानसभा प्रोफाइल में इसे 100 प्रतिशत शहरी आबादी वाली सीट बताया गया है।

इस कारण यहां गांवों और कृषि आधारित विधानसभा क्षेत्रों से चुनावी मुद्दे अलग हैं।

सड़क, ट्रैफिक, जलभराव, सीवर, पेयजल, बिजली, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, बाजार, औद्योगिक ढांचा, रोजगार और व्यापार मुरादाबाद नगर के प्रमुख सवाल हैं।

पीतल उद्योग और उससे जुड़े निर्यात कारोबार का असर भी शहर की अर्थव्यवस्था पर सीधे पड़ता है। कारोबारी वर्ग के साथ कारीगर, मजदूर और छोटे उद्यमी भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मतदाता समूह हैं।

2022 में सिर्फ 782 वोट से जीती भाजपा

2022 विधानसभा चुनाव मुरादाबाद नगर के इतिहास के सबसे करीबी चुनावों में शामिल रहा। भाजपा के रितेश कुमार गुप्ता को 1,48,384 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के मोहम्मद यूसुफ अंसारी को 1,47,602 वोट मिले।

भाजपा की जीत केवल 782 वोट से हुई।

उम्मीदवारपार्टीवोटवोट प्रतिशत
रितेश कुमार गुप्ताभाजपा1,48,38446.12%
मोहम्मद यूसुफ अंसारीसपा1,47,60245.88%
अन्य उम्मीदवारविभिन्नशेष वोट
जीत का अंतर7820.24%

जीत का अंतर कुल वैध मतों का करीब 0.24 प्रतिशत था। यानी यदि कुछ बूथों पर कुछ सौ वोटों का रुख बदल जाता तो परिणाम उलट सकता था।

यही आंकड़ा 2027 में जातीय समीकरण की अहमियत और बढ़ाता है।

2017 में भी भाजपा-सपा की थी करीबी लड़ाई

2017 में भी भाजपा और सपा के बीच बेहद कड़ा मुकाबला हुआ था। भाजपा के रितेश कुमार गुप्ता को 1,23,467 वोट मिले, जबकि सपा के मोहम्मद यूसुफ अंसारी को 1,20,274 वोट मिले।

भाजपा ने सिर्फ 3,193 वोट के अंतर से सीट जीती थी।

चुनाव वर्षविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012मोहम्मद यूसुफ अंसारीसपा88,34120,238
2017रितेश कुमार गुप्ताभाजपा1,23,4673,193
2022रितेश कुमार गुप्ताभाजपा1,48,384782

यह तालिका मुरादाबाद नगर में बदलते राजनीतिक संतुलन को साफ दिखाती है। 2012 में सपा ने 20 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। 2017 में भाजपा ने सीट पलटी, लेकिन अंतर सिर्फ 3,193 वोट रहा। 2022 में यह अंतर और घटकर 782 वोट पर आ गया।

2012 में सपा ने भाजपा को 20 हजार से ज्यादा वोट से हराया

2012 विधानसभा चुनाव में सपा के मोहम्मद यूसुफ अंसारी को 88,341 वोट मिले थे। भाजपा के रितेश कुमार गुप्ता 68,103 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

सपा ने तब 20,238 वोट से जीत दर्ज की थी।

इसके बाद भाजपा ने अपना वोट आधार तेजी से बढ़ाया। रितेश गुप्ता के वोट 2012 के 68 हजार से बढ़कर 2017 में 1.23 लाख और 2022 में 1.48 लाख से अधिक हो गए।

दूसरी तरफ सपा का वोट भी लगातार बढ़ा। इसी कारण यह सीट अब उत्तर प्रदेश की सबसे करीबी भाजपा-सपा सीटों में शामिल हो गई है।

मुरादाबाद नगर का चुनावी इतिहास

मुरादाबाद नगर का पुराना चुनावी इतिहास कांग्रेस, जनसंघ, जनता पार्टी, जनता दल, भाजपा और सपा के बीच बदलता रहा है।

1957 और 1962 में हलीमुद्दीन ने जीत दर्ज की। 1967 में कांग्रेस के ओंकार सरन जीते। 1974 में भारतीय जनसंघ के दिनेश चंद्र रस्तोगी ने बेहद करीबी मुकाबला जीता।

1980 में कांग्रेस, 1989 और 1991 में जनता दल ने सीट जीती। इसके बाद 1993 और 1996 में भाजपा के संदीप अग्रवाल ने लगातार जीत दर्ज की।

2002 में भी संदीप अग्रवाल भाजपा से जीते, जबकि 2007 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर सीट जीती। 2012 में सपा के मोहम्मद यूसुफ अंसारी विधायक बने।

2017 में भाजपा ने सीट वापस हासिल की और रितेश कुमार गुप्ता लगातार 2017 और 2022 में विधायक चुने गए।

इस इतिहास से साफ है कि मुरादाबाद नगर किसी एक दल की स्थायी सुरक्षित सीट नहीं रही। मजबूत उम्मीदवार और सामाजिक गठबंधन समय-समय पर चुनावी तस्वीर बदलते रहे हैं।

2024 में विधानसभा क्षेत्र में बदला था समीकरण

2024 लोकसभा चुनाव के दौरान मुरादाबाद नगर विधानसभा क्षेत्र में सपा ने भाजपा पर बढ़त बनाई थी। विधानसभा सेगमेंट के मतों में सपा उम्मीदवार को भाजपा के मुकाबले करीब 10 हजार वोट की बढ़त मिली।

यह आंकड़ा 2027 के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा 782 वोट से आगे थी, जबकि 2024 के लोकसभा मतदान में इसी क्षेत्र में सपा आगे रही। इसका मतलब है कि मुरादाबाद नगर में किसी दल के लिए वोट बैंक पूरी तरह स्थिर नहीं है।

भाजपा के लिए 2027 की चुनौती अपने विधानसभा चुनाव वाले सामाजिक गठबंधन को वापस मजबूत करना होगी। सपा यह साबित करने की कोशिश करेगी कि 2024 में मिली बढ़त विधानसभा चुनाव में भी कायम रह सकती है।

सपा का रास्ता मुस्लिम वोट के साथ अतिरिक्त सामाजिक समर्थन से

सपा के लिए मुरादाबाद नगर में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा आधार हैं। लेकिन 2017 और 2022 के नतीजे बताते हैं कि अकेले बड़े मुस्लिम वोट बैंक के बावजूद सीट जीतना आसान नहीं है।

2022 में सपा सिर्फ 782 वोट से हारी थी। इसलिए पार्टी को चुनाव पलटने के लिए बहुत बड़े अतिरिक्त वोट की जरूरत नहीं है।

अगर मुस्लिम मतदाता बड़े स्तर पर एकजुट रहते हैं और सपा दलित, यादव, सैनी तथा दूसरे OBC मतदाताओं से अतिरिक्त समर्थन हासिल करती है तो मुकाबला उसके पक्ष में जा सकता है।

2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार मतदान ने भी सपा को यह संकेत दिया कि शहर में भाजपा को चुनौती देने की क्षमता मौजूद है।

भाजपा का गणित: वैश्य के साथ व्यापक हिंदू गठजोड़

भाजपा के लिए मुरादाबाद नगर का सबसे मजबूत मॉडल वैश्य वोटों के साथ व्यापक गैर-मुस्लिम सामाजिक गठबंधन रहा है।

वैश्य, ठाकुर, ब्राह्मण, सैनी, दलित और दूसरे OBC मतदाताओं का बड़ा हिस्सा एक तरफ आता है तो भाजपा मुस्लिम बहुलता के बावजूद सीट जीत सकती है। 2017 और 2022 इसका उदाहरण हैं।

वर्तमान विधायक रितेश गुप्ता की व्यक्तिगत पकड़ और लगातार दो चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है।

लेकिन जीत का लगातार घटता अंतर भी पार्टी के लिए चेतावनी है। 2017 में अंतर 3,193 था और 2022 में सिर्फ 782 रह गया।

इसलिए 2027 में भाजपा को अपने पुराने मतदाताओं की केवल एकजुटता ही नहीं, बल्कि मतदान प्रतिशत भी बढ़ाना होगा।

बसपा का वोट तय कर सकता है भाजपा-सपा की जीत

मुरादाबाद नगर में मुख्य मुकाबला भले भाजपा और सपा के बीच रहा हो, लेकिन बसपा का वोट शेयर तीसरे कोण के रूप में बेहद महत्वपूर्ण है।

2012 में बसपा को 32 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। 2017 में पार्टी करीब 24 हजार वोट तक पहुंची थी। 2022 में उसका वोट शेयर और नीचे आया।

बसपा अगर 2027 में मजबूत दलित आधार और मुस्लिम प्रत्याशी के जरिए अपना वोट बढ़ाती है तो इसका असर सीधे भाजपा-सपा के करीबी मुकाबले पर पड़ सकता है।

सपा के लिए मुस्लिम वोटों का विभाजन नुकसानदेह हो सकता है, जबकि भाजपा के लिए दलित वोटों का बसपा की ओर वापस जाना चुनौती बन सकता है।

यानी तीसरे स्थान पर रहने वाला प्रत्याशी भी मुरादाबाद नगर में विजेता तय कर सकता है।

2027 में इन छह समीकरणों पर रहेगी नजर

2027 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद नगर की लड़ाई छह बड़े सवालों पर टिक सकती है।

सबसे पहले मुस्लिम वोट कितनी मजबूती से एक उम्मीदवार के पक्ष में जाता है। दूसरा, वैश्य मतदाता किस हद तक भाजपा के साथ बने रहते हैं।

तीसरा, ठाकुर, ब्राह्मण और सैनी जैसे गैर-मुस्लिम समूहों में भाजपा का समर्थन कितना रहता है। चौथा, दलित मतदाताओं का वोट भाजपा, सपा और बसपा के बीच किस तरह बंटता है।

पांचवां सवाल प्रत्याशियों का होगा। मुरादाबाद नगर के पिछले चुनाव बताते हैं कि प्रत्याशी की व्यक्तिगत पहचान वोटों पर स्पष्ट असर डालती है।

छठा और सबसे नया फैक्टर 2026 की मतदाता सूची है। कुल वोटर संख्या में बदलाव और हजारों नए मतदाताओं के जुड़ने के बाद बूथवार पुराना गणित भी बदल चुका है।

अगर चुनाव भाजपा और सपा के बीच सीधा रहता है तो हर सामाजिक समूह के कुछ हजार मतदाता निर्णायक होंगे। यदि बसपा या किसी तीसरे दल का प्रत्याशी मजबूत हुआ तो मुकाबला और जटिल हो सकता है।

782 वोट की 2022 की जीत ने पहले ही साबित कर दिया है कि मुरादाबाद नगर में कोई भी दल छोटी बढ़त को सुरक्षित मानकर नहीं चल सकता।

उत्तर प्रदेश की सभी सीटों की सामाजिक संरचना और चुनावी गणित जानने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण पर विस्तृत जानकारी पढ़ी जा सकती है।

प्रत्याशी, टिकट वितरण, गठबंधन, सीटवार रणनीति और राजनीतिक गतिविधियों के अपडेट के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विस्तृत कवरेज पढ़ें।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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