PM Modi Turban: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से PM मोदी की पगड़ी हर साल खास रही है। 2014 से 2026 तक उनके 13 अलग-अलग पगड़ी और आउटफिट लुक देखें।
2026 में लाल बांधनी पगड़ी के खास अंदाज में नजर आए PM मोदी।
- Published: 15 Aug 2026, 01:00 PM IST
- Last Updated: 15 Aug 2026, 01:15 PM IST
PM Modi Turban: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से देश को संबोधित किया। इस दौरान वह राजस्थान में तैयार की गई पारंपरिक लाल रंग की टाई-एंड-डाई बांधनी पगड़ी में नजर आए। पगड़ी पर सफेद और पीले रंग के छोटे पैटर्न दिखाई दिए, जबकि इसका एक सिरा पीछे की ओर लंबा और लहराता हुआ था।
पीएम मोदी ने लाल बांधनी पगड़ी के साथ सफेद कुर्ता-पायजामा और चॉकलेट-ब्राउन नेहरू जैकेट पहनी। उनकी जेब में तिरंगे रंगों वाला पॉकेट स्क्वायर भी नजर आया, जिसने पूरे पहनावे को स्वतंत्रता दिवस के रंगों से जोड़ दिया।
2026 की यह पगड़ी उनके स्वतंत्रता दिवस के पारंपरिक पहनावे की लंबी श्रृंखला में एक और खास अंदाज है। 2014 से हर साल लाल किले पर उनके पगड़ी और साफे के रंग, पैटर्न और शैली में बदलाव देखने को मिला है।
2026: लाल बांधनी पगड़ी में दिखे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से संबोधन के दौरान लाल रंग की पारंपरिक बांधनी पगड़ी पहनी। पगड़ी के साथ सफेद कुर्ता-पायजामा और चॉकलेट-ब्राउन नेहरू जैकेट उनके इस साल के Independence Day look का हिस्सा रहे।
2014 से 2026 तक लाल किले पर पीएम मोदी की पगड़ियों के रंग, पैटर्न और अंदाज में कैसे बदलाव आया, तस्वीरों में देखें पूरी झलक।
2025: केसरिया रंग में नजर आए PM मोदी

2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने 12वें लगातार Independence Day संबोधन के दौरान केसरिया साफा पहना था। उन्होंने सफेद कुर्ता-चूड़ीदार के साथ केसरिया बंदगला जैकेट और तिरंगा स्टोल पहना था। उनका पूरा पहनावा केसरिया और तिरंगे के रंगों के संयोजन के कारण खास चर्चा में रहा।
2024: लहरिया पगड़ी में दिखी राजस्थान की रंगीन विरासत

2024 में प्रधानमंत्री ने बहुरंगी राजस्थानी लहरिया पैटर्न वाली पगड़ी पहनी थी। नारंगी, पीले और हरे रंगों वाली इस पगड़ी को सफेद कुर्ता-चूड़ीदार और हल्के नीले रंग की जैकेट के साथ पहना गया था।
2023: बांधनी प्रिंट की बहुरंगी पगड़ी

2023 में PM मोदी ने राजस्थान की पारंपरिक बांधनी प्रिंट वाली बहुरंगी पगड़ी पहनी। पीले, नारंगी, हरे और लाल रंगों की यह पगड़ी उनके Independence Day look का प्रमुख आकर्षण रही।
2022: तिरंगे रंगों वाली पगड़ी

2022 में प्रधानमंत्री ने तिरंगे से प्रेरित रंगों वाली पगड़ी पहनी। सफेद और हरे रंग के साथ इसमें राष्ट्रीय ध्वज के रंगों की झलक दिखाई दी।
2021: रंगीन फेटा स्टाइल ने खींचा ध्यान

2021 में प्रधानमंत्री ने बहुरंगी कोल्हापुरी फेटा-स्टाइल की पगड़ी पहनी थी। इसके साथ सफेद कुर्ता और जैकेट का संयोजन था।
2020: केसरिया और हल्के रंगों का संयोजन

2020 में PM मोदी ने केसरिया और हल्के पीले/क्रीम रंग की पगड़ी पहनी। इसके साथ सफेद और नारंगी रंग के elements उनके Independence Day look का हिस्सा थे।
2019: बहुरंगी पगड़ी में नजर आए PM मोदी

2019 में प्रधानमंत्री ने कई रंगों वाली पगड़ी चुनी। इसके साथ उनके पारंपरिक सफेद पहनावे और स्टोल ने पूरे look को अलग पहचान दी।
2018: केसरिया-लाल रंग की पगड़ी

2018 में PM मोदी की पगड़ी में केसरिया और लाल रंग का प्रमुख प्रभाव था। सफेद कुर्ते के साथ इसका contrast खास दिखाई दिया।
2017: पीले-लाल रंगों की पगड़ी

2017 में प्रधानमंत्री ने पीले और लाल रंगों वाली आकर्षक पगड़ी पहनी। इसमें पारंपरिक pattern की झलक दिखाई दी।
2016: गुलाबी-पीले रंगों की टाई-डाई पगड़ी

2016 में PM मोदी ने गुलाबी और पीले रंगों वाली tie-dye style पगड़ी पहनी थी। यह उनके Independence Day के सबसे रंगीन looks में से एक रही।
2015: पीले रंग वाली बहुरंगी पगड़ी

2015 में प्रधानमंत्री की पगड़ी का base yellow था, जिस पर अलग-अलग रंगों की धारियां और pattern दिखाई दिए। यह उनके शुरुआती Independence Day looks में खास तौर पर याद की जाने वाली पगड़ी रही।
2014: पहली बार लाल किले से दिखा राजस्थानी रंग

प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले Independence Day समारोह में नरेंद्र मोदी ने चमकीले नारंगी और हरे रंगों वाली राजस्थानी बांधेज पगड़ी पहनी थी। यह उनके Independence Day के पारंपरिक headgear की शुरुआत भी बनी।
13 बार, 13 अंदाज और भारतीय संस्कृति की झलक
2014 से 2026 तक लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Independence Day looks में एक बात लगातार दिखाई देती है- पगड़ी के जरिए भारतीय रंगों और क्षेत्रीय परंपराओं को सामने लाना। हर साल पगड़ी का रंग, pattern और style अलग रहा, लेकिन इसके जरिए भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने की परंपरा लगातार बनी रही।