'आप श्रीकृष्ण, मैं आपका सुदामा', जन्मदिन से पहले PM मोदी के लिए वडनगर से आई दोस्त की भावुक कर देने वाली चिट्ठी

Published on 16 सित॰ 2026

PM Modi Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से पहले वडनगर से उनके बचपन के साथी शामलदास मोदी ने एक भावुक चिट्ठी लिखी है. उन्होंने पीएम को अपना श्रीकृष्ण और खुद को सुदामा बताया.

PM Modi Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से पहले वडनगर से उनके बचपन के साथी शामलदास मोदी ने एक भावुक चिट्ठी लिखी है. उन्होंने पीएम को अपना श्रीकृष्ण और खुद को सुदामा बताया.

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PM Modi friend letter

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PM Modi Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से पहले गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित उनके पैतृक कस्बे वडनगर से एक बेहद आत्मीय और भावुक संदेश सामने आया है. यह पैगाम किसी राजनीतिक दल या विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की तरफ से नहीं, बल्कि उनके बचपन के पुराने साथी शामलदास मोदी की ओर से भेजा गया है. 17 सितंबर को प्रधानमंत्री का जन्मदिन पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन उससे पहले आई इस चिट्ठी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इस पत्र में औपचारिकता की जगह बचपन की सादगी, गहरा अपनापन और एक पुराने दोस्त की बेपनाह मोहब्बत साफ नजर आती है. शामलदास ने अपने इस पत्र में नरेंद्र मोदी को महाभारत के श्रीकृष्ण की उपमा दी है और खुद को उनका सुदामा बताया है.

बचपन के गलियारों से देश के सर्वोच्च पद तक का सफर

वडनगर की तंग गलियों में कभी एक साथ धूल फांकने वाले और वक्त बिताने वाले दो साथियों की यह दास्तान आज एक नए मुकाम पर पहुंच चुकी है. शामलदास ने अपनी चिट्ठी में उस दौर को याद किया है जब वे दोनों साधारण जिंदगी जी रहे थे. वक्त का पहिया घूमा और नरेंद्र मोदी निरंतर आगे बढ़ते हुए देश की सत्ता के शीर्ष पद पर विराजमान हो गए. शामलदास लिखते हैं कि जब वे अपने पुराने साथी को इतने बड़े लोकतंत्र की बागडोर संभालते हुए देखते हैं, तो उनका सीना फख्र और गर्व से चौड़ा हो जाता है. उनके लिए यह सिर्फ एक राजनेता की तरक्की नहीं, बल्कि अपने ही एक साथी की असाधारण कामयाबी है जिसने पूरे कस्बे का नाम रोशन कर दिया.

संकल्प शक्ति और नए भारत के निर्माण की सोच

पत्र में शामलदास ने प्रधानमंत्री के दृढ़ निश्चय और काम करने की शैली की जमकर सराहना की है. उन्होंने लिखा कि नरेंद्र मोदी की यह खासियत बचपन से रही है कि वे जिस काम को करने की ठान लेते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं. सार्वजनिक जीवन में उनके पच्चीस साल पूरे होने के अनुभव को रेखांकित करते हुए शामलदास ने उन्हें नूतन भारत का सच्चा शिल्पकार करार दिया. दोस्त का कहना है कि आज का नया भारत जिस आत्मविश्वास और रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है, उसके पीछे मोदी की अटूट इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की बड़ी भूमिका है.

वडनगर की ऐतिहासिक धरोहर को नई पहचान

इस पत्र का एक बड़ा हिस्सा वडनगर की धरती और उसके कायाकल्प से जुड़ा हुआ है. वडनगर प्रधानमंत्री का जन्मस्थान है और उनका शुरुआती जीवन इसी ऐतिहासिक नगरी में बीता है. शामलदास ने इस बात पर विशेष आभार प्रकट किया कि देश और दुनिया की व्यस्तताओं के बीच भी मोदी अपनी जड़ों को नहीं भूले. उन्होंने वडनगर की प्राचीन सभ्यता, पुरातात्विक महत्व और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के साथ-साथ उसे दुनिया के नक्शे पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित किया है. अपने गृह नगर के लिए किए गए इन प्रयासों के प्रति शामलदास ने दिल से धन्यवाद दिया है.

दुनिया भर में गूंज रहा है भारत का डंका

चिट्ठी में केवल पुरानी यादें ही नहीं हैं, बल्कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत का भी उल्लेख किया गया है. शामलदास ने लिखा कि आज अमेरिका से लेकर दुनिया के हर कोने में भारत और नरेंद्र मोदी के नाम की गूंज सुनाई दे रही है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का मान-सम्मान जिस तेजी से बढ़ा है, उसे देखकर हर हिंदुस्तानी का दिल खुशी से झूम उठता है. एक पुराने साथी के तौर पर यह देखना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है कि उनका बचपन का दोस्त आज पूरी दुनिया में भारत का नेतृत्व कर रहा है.

पत्र के अंतिम हिस्से में शामलदास ने अपने प्रिय मित्र नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की ढेर सारी मंगलकामनाएं भेजी हैं. उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि प्रधानमंत्री को लंबी उम्र मिले और उनका स्वास्थ्य हमेशा उत्तम बना रहे, ताकि वे निरंतर देश सेवा में लगे रहें. यह पूरी चिट्ठी बड़े-बड़े दावों या दिखावे से कोसों दूर, केवल दो दोस्तों के अटूट प्रेम और बचपन के उस रिश्ते की गवाही देती है जो वक्त और ओहदे के बदलने के बाद भी अपनी जगह अडिग खड़ा है.