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हिंदी न्यूज़ऐस्ट्रोPitru Paksha 2026: बेटा विदेश में तो भारत की तिथि से श्राद्ध करे या वहां के पंचांग से?
Pitru Paksha Abroad: विदेश में रहने वाला बेटा माता-पिता का श्राद्ध भारत की तिथि से करे या वहां के पंचांग से? जानें श्राद्ध की सही तारीख तय करने का नियम और अपराह्न काल का महत्व.
Written By : Hirdesh Kumar Singh | Updated at : 29 Sep 2026 06:41 PM (IST)

विदेश में रहने वाले किस दिन करें माता-पिता का श्राद्ध?
Source : abplive
Pitru Paksha Abroad: भारत में माता-पिता हैं, लेकिन बेटा अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन या किसी दूसरे देश में रहता है. पितृ पक्ष आते ही एक सवाल अक्सर सामने आता है कि श्राद्ध भारत में बताई गई तारीख पर किया जाए या जिस देश में बेटा रह रहा है, वहां के पंचांग के अनुसार?
इसका सीधा नियम है, श्राद्ध जहां किया जा रहा है, उस स्थान की स्थानीय तिथि और समय को देखा जाना चाहिए. केवल भारत में चल रही तारीख देखकर विदेश में श्राद्ध करना सही तरीका नहीं है.
विदेश में रहने वाले व्यक्ति को कौन सा पंचांग देखना चाहिए?
अगर बेटा न्यूयॉर्क में रहकर स्वयं पिता या माता का श्राद्ध कर रहा है तो उसे न्यूयॉर्क की लोकेशन के अनुसार पंचांग देखना चाहिए. इसी तरह लंदन में रहने वाला व्यक्ति लंदन और सिडनी में रहने वाला व्यक्ति सिडनी के अनुसार श्राद्ध की तिथि और समय निकालेगा.
इसकी वजह भी आसान है. हिंदू पंचांग की तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से बनती है, लेकिन किसी स्थान पर उसका उपयोग वहां के स्थानीय सूर्योदय, समय और दिन के अलग-अलग हिस्सों के अनुसार किया जाता है. श्राद्ध में तो खास तौर पर अपराह्न काल (Afternoon) का महत्व माना गया है.
पितृ पक्ष के पार्वण श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और उसके बाद अपराह्न काल तक का समय महत्वपूर्ण माना जाता है. पंचांग में भी श्राद्ध के समय प्रत्येक शहर की लोकेशन के अनुसार अलग दिए जाते हैं.
भारत और विदेश में श्राद्ध की तारीख अलग भी हो सकती है
यही वह बात है जहां सबसे ज्यादा भ्रम होता है. 2026 का उदाहरण लें. न्यूयॉर्क के Centereach में चतुर्थी श्राद्ध 29 सितंबर 2026 को है. वहां चतुर्थी तिथि 29 सितंबर को सुबह 7:39 बजे शुरू होकर 30 सितंबर सुबह 5:25 बजे तक है और स्थानीय अपराह्न में चतुर्थी मिल रही है.
वहीं भारत में कई स्थानों पर चतुर्थी श्राद्ध 30 सितंबर 2026 को निर्धारित है. उदाहरण के तौर पर राजस्थान और असम में स्थानीय अपराह्न के आधार पर चतुर्थी श्राद्ध 30 सितंबर को है.
इसलिए यह मान लेना कि दिल्ली में 30 सितंबर को श्राद्ध है तो अमेरिका में भी 30 सितंबर को ही करना है, सही नहीं होगा.
अगर परिवार भारत में श्राद्ध कर रहा हो तो?
मान लीजिए बेटा विदेश में है, लेकिन उसकी ओर से भाई या परिवार के दूसरे सदस्य भारत में पुरोहित के साथ श्राद्ध कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में जहां वास्तविक श्राद्ध कर्म हो रहा है, उसी स्थान का पंचांग देखा जाएगा.
यानी श्राद्ध दिल्ली में हो रहा है तो दिल्ली की तिथि और अपराह्न काल लिया जाएगा. बेटा विदेश से केवल संकल्प में शामिल है तो उसके देश की तारीख के कारण भारत में होने वाले कर्म की तिथि नहीं बदलेगी.
इसके उलट अगर बेटा स्वयं विदेश में तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर रहा है तो वहां की स्थानीय तिथि देखी जाएगी.
मृत्यु भारत में हुई थी, तब भी विदेश का पंचांग?
यह भी एक आम भ्रम है. किसी व्यक्ति की मृत्यु भारत में हुई हो और बेटा बाद में विदेश जाकर रहने लगा हो, तब भी हर साल श्राद्ध करते समय मृत्यु वाली तिथि जरूर देखी जाएगी, लेकिन उस तिथि का निर्धारण श्राद्ध करने वाले स्थान के पंचांग में किया जाएगा.
श्राद्ध सामान्य अंग्रेजी तारीख से नहीं बल्कि मृत्यु की हिंदू तिथि से किया जाता है. पंचांग परंपरा में भी संबंधित तिथि पर ही श्राद्ध करने का विधान बताया गया है.
एक बात जरूर ध्यान रखें
विदेश में रहने वाले लोग इंटरनेट पर केवल Pitru Paksha 2026 India dates देखकर श्राद्ध की तारीख तय न करें. पंचांग में पहले अपनी सिटी और देश की सही लोकेशन सेट करें, फिर देखें कि संबंधित तिथि स्थानीय अपराह्न में किस दिन पड़ रही है.
यही कारण है कि भारत, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया में एक ही पितृ पक्ष होने के बावजूद किसी विशेष श्राद्ध की अंग्रेजी तारीख अलग हो सकती है.
बेटा विदेश में स्वयं श्राद्ध कर रहा है तो भारत की तारीख नहीं, बल्कि उस शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध करे. और यदि श्राद्ध भारत में परिवार या पुरोहित कर रहे हैं तो भारत में जिस स्थान पर कर्म हो रहा है, वहां की तिथि मानी जाएगी.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader
'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'
हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.
वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.
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हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.
वर्तमान में Youth Protest, CJP आंदोलन और एक्टर शाहरुख खान को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.
वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.
डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.
उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.
श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.
ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.
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Published at : 29 Sep 2026 05:27 PM (IST)
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