Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में किस दिन करें किस पूर्वज का श्राद्ध? यहां देखें पूरी तिथि और श्राद्ध लिस्ट - Haribhoomi

Published on 2 सित॰ 2026

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। जानें किस तिथि को किस पूर्वज का श्राद्ध करना है।

Pitru Paksha 2026

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  • Published: 02 Sep 2026, 01:37 PM IST
  • Last Updated: 02 Sep 2026, 01:37 PM IST

पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का श्राद्ध करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। परिवार में जिन लोगों का निधन हो चुका है, उनके लिए उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। यही वजह है कि पितृपक्ष शुरू होने से पहले श्राद्ध की तिथियों को लेकर लोगों के बीच जानकारी लेने की उत्सुकता रहती है।

पंचांग के अनुसार, 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से होगी। इस दिन पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृपक्ष की नियमित तिथियां शुरू होंगी। वहीं 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन होगा।

किस तिथि को किस पूर्वज का श्राद्ध?

26 सितंबर, शनिवार- पूर्णिमा श्राद्ध
इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसे पितृपक्ष की शुरुआत का महत्वपूर्ण श्राद्ध माना जाता है।

27 सितंबर, रविवार- प्रतिपदा श्राद्ध
प्रतिपदा तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा।

28 सितंबर, सोमवार- द्वितीया श्राद्ध
जिन पूर्वजों का निधन द्वितीया तिथि को हुआ था, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाएगा।

29 सितंबर, मंगलवार- तृतीया और महाभरणी श्राद्ध
इस दिन तृतीया श्राद्ध के साथ महाभरणी श्राद्ध भी होगा। तृतीया तिथि में दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है। भरणी नक्षत्र से जुड़ा होने के कारण इस दिन पितृ कर्म का विशेष महत्व माना जाता है।

30 सितंबर, बुधवार- चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
इस दिन चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध किया जाएगा। यानी इन दोनों तिथियों में दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इसी दिन श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।

1 अक्टूबर, गुरुवार- षष्ठी श्राद्ध
षष्ठी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा।

2 अक्टूबर, शुक्रवार- सप्तमी श्राद्ध
सप्तमी तिथि में जिन पूर्वजों का निधन हुआ था, उनके लिए इस दिन श्राद्ध कर्म किया जाएगा।

3 अक्टूबर, शनिवार- अष्टमी श्राद्ध
अष्टमी तिथि में दिवंगत हुए पूर्वजों का श्राद्ध इस दिन किया जाएगा।

4 अक्टूबर, रविवार- नवमी श्राद्ध और मातृ नवमी
पितृपक्ष में नवमी का दिन विशेष माना जाता है। इसे मातृ नवमी भी कहा जाता है। इस दिन दिवंगत माता, दादी, नानी और परिवार की अन्य महिला पूर्वजों के लिए श्राद्ध करने की परंपरा है।

5 अक्टूबर, सोमवार- दशमी श्राद्ध
दशमी तिथि में जिन पूर्वजों का निधन हुआ था, उनके लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा।

6 अक्टूबर, मंगलवार- एकादशी श्राद्ध
एकादशी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इस दिन श्राद्ध कर्म किया जाएगा।

7 अक्टूबर, बुधवार- द्वादशी और मघा श्राद्ध
इस दिन द्वादशी श्राद्ध के साथ मघा श्राद्ध भी होगा। धार्मिक परंपरा में मघा नक्षत्र को पितरों से संबंधित माना जाता है, इसलिए इस दिन किए जाने वाले पितृ कर्म का विशेष महत्व बताया जाता है।

8 अक्टूबर, गुरुवार- त्रयोदशी श्राद्ध
त्रयोदशी तिथि में दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।

9 अक्टूबर, शुक्रवार- चतुर्दशी श्राद्ध
चतुर्दशी तिथि में दिवंगत हुए पूर्वजों का श्राद्ध इस दिन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं में असामान्य या अकाल मृत्यु से जुड़े पितृ कर्म के लिए भी चतुर्दशी का विशेष महत्व बताया जाता है।

10 अक्टूबर, शनिवार- सर्वपितृ अमावस्या
पितृपक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या होगा। यह उन पूर्वजों के लिए महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका।

सर्वपितृ अमावस्या क्यों है खास?

पितृपक्ष में सर्वपितृ अमावस्या को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि परिवार को याद नहीं है या किसी वजह से उस तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया, तो इस दिन उनके लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। इसी वजह से पितृपक्ष की अंतिम तिथि पर बड़ी संख्या में लोग अपने ज्ञात-अज्ञात सभी पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।

ध्यान रखें: श्राद्ध की तिथि और मुहूर्त में क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर या क्षेत्र के पंचांग के अनुसार अंतिम तिथि और श्राद्ध मुहूर्त की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।