Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी कब है? नोट कर लें पूजा और पारण का मुहूर्त

Published on 16 अक्टू॰ 2026

Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी कब है? नोट कर लें पूजा और पारण का मुहूर्त

पापांकुशा एकादशी 2026Image Credit source: PTI

Papankusha Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व माना गया है, और आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पापांकुशा एकादशी का व्रत भक्तों के लिए विशेष फलदायी होता है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में यह पावन व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा. इस विशेष व्रत से जुड़ी तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और व्रत पारण का सही समय इस प्रकार है. जीवन में सुख-शांति और पुण्य प्राप्ति के लिए इस एकादशी को बहुत खास माना जाता है. व्रत रखने वाले सभी भक्तों को नियमों का पालन करते हुए भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इस साल पापांकुशा एकादशी की तिथि और मुहूर्त क्या रहेगा.

पापांकुशा एकादशी 2026 की तिथि और अचूक शुभ मुहूर्त

पंचांग की गणना के अनुसार, पापांकुशा एकादशी की तिथि का आरंभ 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 02:11 बजे से हो जाएगा. इसके बाद यह तिथि अगले दिन यानी 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर 02:47 बजे तक मान्य रहेगी. उदयातिथि और शास्त्रीय नियमों को ध्यान में रखते हुए मुख्य व्रत 22 अक्टूबर को ही रखा जाएगा. इस दौरान भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने का विधान है. जो लोग इस व्रत का पालन करते हैं, वे इस निश्चित समय को ध्यान में रखकर अपनी पूजा की तैयारी कर सकते हैं. सही मुहूर्त में पूजा करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व और स्वरूप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत मनुष्य के सभी प्रकार के पापों और गलतियों का नाश करने वाला माना गया है. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, और इस दिन सच्चे मन से उपासना करने वाले भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बरसती है. व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन संयम और नियम का पालन करना चाहिए. इस दिन दान-पुण्य करने का भी बहुत अधिक महत्व बताया गया है. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हुए इस पावन दिन को बिताने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है.

पूजा की सही सामग्री और चरण-दर-चरण पूरी विधि!

  • सुबह का स्नान और संकल्प: एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
  • पूजा स्थल की सफाई: घर के मंदिर की अच्छी तरह सफाई करके वहां एक चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  • पूजन सामग्री अर्पित करें: भगवान विष्णु को पीले फूल, रो अक्षत, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें. एकादशी की पूजा में तुलसी का होना बहुत जरूरी माना जाता है.
  • भोग और आरती: भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद धूप-दीप जलाकर श्री हरि की आरती करें और विष्णु सहस्त्रनाम या मंत्रों का जाप करें.
  • व्रत कथा और रात्रि जागरण: दिनभर उपवास रखें और कथा सुनें या पढ़ें. संभव हो तो रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करें और जागरण करें.
  • दान और पारण: द्वादशी तिथि को सुबह स्नान करने के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन और दान दें, उसके बाद ही अपना व्रत खोलें.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए astropatri.com पर संपर्क करें.

चंद्रेश शर्मा

चंद्रेश शर्मा

चंद्रेश शर्मा एक अनुभवी वैदिक ज्योतिषी हैं, जिनका ज्योतिष से जुड़ाव 35 से अधिक सालों का है. किशोरावस्था में शुरू हुई उनकी ज्योतिष यात्रा समय के साथ गहरे अध्ययन, निरंतर अभ्यास और आध्यात्मिक समझ में विकसित हुई. पिछले 15 सालों से वे पेशेवर रूप से लोगों को वैदिक ज्योतिष के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं. ज्योतिष के साथ-साथ उन्होंने लगभग 38 वर्षों तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी कार्य किया. इस दौरान उन्हें टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, थिसेनक्रुप और भूषण स्टील जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला. व्यावसायिक जीवन के अनुभव और वैदिक ज्योतिष का गहन अध्ययन उनके दृष्टिकोण को संतुलित और व्यावहारिक बनाता है. उन्होंने भारतीय विद्या भवन से ज्योतिष आचार्य और ज्योतिष अलंकार की उपाधियां प्राप्त की हैं. उनका मानना है कि वैदिक ज्योतिष केवल भविष्य जानने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को खुद को समझने, सही समय पर उचित निर्णय लेने और जीवन की परिस्थितियों का बेहतर सामना करने की दिशा भी देता है. वे करियर, विवाह, व्यवसाय, वित्त, ग्रह गोचर, कुंडली विश्लेषण, पंचांग और वैदिक ज्योतिष से जुड़े विषयों पर अपने वर्षों के अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. उनका उद्देश्य लोगों तक प्रामाणिक वैदिक ज्योतिष को सरल, व्यावहारिक और विश्वसनीय रूप में पहुंचाना है, ताकि वे जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय अधिक स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ ले सकें.

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