म्यूचुअल फंड NFO की बाढ़: क्या नए फंड में पैसा लगाना सही है?

Published on 6 सित॰ 2026

Published: Sunday, September 6, 2026, 19:24 [IST]

7 से 11 सितंबर के बीच बाजार में एक साथ कई म्यूचुअल फंड NFO की कतार लग रही है। इनमें ओवरनाइट, बैलेंस्ड-एडवांटेज, इंडेक्स और थीमैटिक जैसे हर तरह के विकल्प शामिल हैं। हालांकि, इनमें से कई में अप्लाई करने की विंडो बेहद सीमित है। जैसे, Monarch Overnight Fund 7 सितंबर को बंद हो रहा है, तो ICICI Prudential Dynamic Asset Allocation Passive FoF में 9 सितंबर तक ही मौका है। Bank of India Value और Motilal Oswal Quality समेत कई इक्विटी NFO भी 10 से 11 सितंबर के बीच बंद हो जाएंगे। वहीं, JioBlackRock Balanced Advantage 11 सितंबर को खुलेगा और 25 सितंबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेगा।

इस हफ्ते आ रहे NFOs में न्यूनतम निवेश की रकम में भी काफी फर्क है, इसलिए आदत के मुताबिक आंख मूंदकर अप्लाई न करें। Navi Nifty REITs and Realty Index Fund में महज ₹100 से शुरुआत कर सकते हैं, तो Motilal Oswal Quality के लिए ₹500 लगेंगे। UTI BSE India Sector Leaders Index Fund में ₹1,000 और Bank of India Value में कम से कम ₹5,000 लगाने होंगे। किसी भी NFO में दांव लगाने से पहले उसकी लागत, स्ट्रैटेजी और फंड हाउस (AMC) के पुराने रिकॉर्ड की तुलना मार्केट के स्थापित फंड्स से जरूर कर लें।

Mutual Fund NFO Investment Guide September 2026: Should You Invest in New Funds or Existing Schemes?
कैटेगरीउदाहरणलिक्विडिटीअनुमानित खर्चटैक्स
कमओवरनाइट, लिक्विडT+0/T+1कम TER1 अप्रैल 2023 से डेट स्लैब के मुताबिक
मध्यमबैलेंस्ड‑एडवांटेज, मल्टी‑एसेट, गोल्ड FoFT+2औसत; FoF में एक्स्ट्रा लेयरइक्विटी ओरिएंटेड होने पर इक्विटी टैक्स; अन्य पर स्लैब दरें
ज्यादाफ्लेक्सी/मल्टी‑कैप, थीमैटिकT+2एक्टिव TERइक्विटी STCG 20%; LTCG ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5%

फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में दो स्तरों पर फीस ली जाती है, इसलिए डायरेक्ट प्लान चुनते वक्त कुल लागत (Look-through costs) जरूर जांचें। ध्यान रखें कि 23 जुलाई 2024 से इक्विटी टैक्स के नियम बदल चुके हैं। अब शॉर्ट-टर्म गेंस (STCG) पर 20% और ₹1.25 लाख से ज्यादा के लॉन्ग-टर्म गेंस (LTCG) पर 12.5% टैक्स लागू होता है। डेट और गोल्ड FoFs पर निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। तुलना के लिए बता दें कि बड़े बैंकों की 1 साल की FD पर 6.5–7.1% ब्याज मिल रहा है, जो कुछ बैंकों में 8.0% तक जाता है। वहीं, ओवरनाइट फंड्स का रिटर्न फिलहाल 5.7–6.1% के आसपास चल रहा है।

ब्याज दर का गणित: NFO बनाम FD विकल्प

विकल्पअवधिदर / रिटर्नलिक्विडिटी
बैंक FD (बड़े बैंक)1 साल6.5%–7.1%समय से पहले निकासी पर पेनल्टी
बैंक FD (चुनिंदा SFBs)1 साल8.0% तकशर्तें अलग-अलग
ओवरनाइट म्यूचुअल फंडपिछला 1 साल5.7%–6.1%T+0 रिडेम्प्शन

60 सेकंड में समझें: NFO में पैसे लगाएं या नहीं?

अगर आपको 1 से 3 महीने के लिए रकम पार्क करनी है, तो NFO के बजाय ओवरनाइट या लिक्विड फंड बेहतर हैं। अगर कम उतार-चढ़ाव के साथ डायनामिक इक्विटी का फायदा चाहते हैं, तो सबसे पहले बाजार में मौजूद जमे-जमाए बैलेंस्ड-एडवांटेज फंड्स पर गौर करें। हां, अगर आपके पोर्टफोलियो में कोई खास थीम या इंडेक्स मिसिंग है, तो नया NFO सही विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर ऐसा एक्सपोजर आपके पास पहले से ही है, तो नया NFO लेने के बजाय पुराने परफॉर्मर फंड्स में ही टॉप-अप करें।

NFO में अप्लाई करने से पहले की जरूरी चेकलिस्ट

आज ही यानी रविवार, 6 सितंबर को ही अपना KYC स्टेटस और बैंक मैंडेट चेक कर लें। जब तक वैल्युएशन काफी आकर्षक न लगे, लंपसम की जगह SIP के जरिए ही एंट्री लें। आखिरी मिनट के नेट-बैंकिंग झंझटों से बचने के लिए कट-ऑफ टाइम का ध्यान रखें। एग्जिट लोड, एसआईपी डेट्स और रीबैलेंसिंग के नियम पहले ही समझ लें। अगर जरा भी संशय हो, तो थोड़ा इंतजार करना ही सही है; मार्केट के दिग्गज फंड्स सब्र का फल देते हैं, जबकि NFO में दांव लगाने के लिए पक्का भरोसा होना जरूरी है।

Story first published: Sunday, September 6, 2026, 19:24 [IST]

Other articles published on Sep 6, 2026