'डर, हिंसा की बात करने वाली महिला की आवाज नजरअंदाज न हो', NCW सम्मेलन में बोले जस्टिस नाथ - the voice of a woman speaking of fear and violence must not be ignored says justice nath

Published on 8 अक्टू॰ 2026

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने बुधवार को कहा कि डर, हिंसा या परेशानी के बारे में बात ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने राष्ट्रीय महिला आयोग के सम्मेलन में भाषण दिया (फोटो- एएनआई)

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने राष्ट्रीय महिला आयोग के सम्मेलन में भाषण दिया (फोटो- एएनआई)

HighLights

  1. राष्ट्रीय महिला आयोग के सम्मेलन में हुई महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा

  2. अन्नपूर्णा देवी बोलीं बेटों को महिलाओं के सम्मान व समानता के संस्कार दें 

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने बुधवार को कहा कि डर, हिंसा या परेशानी के बारे में बात करने वाली महिला की आवाज को न तो नजरअंदाज की जानी चाहिए और न ही इसे सामान्य माना जाना चाहिए।

जस्टिस नाथ ने 'घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम' के तहत नियुक्त सुरक्षा अधिकारियों की उन कोशिशों की तारीफ की, जिनसे मुसीबत में फंसी महिलाओं को न्याय दिलाने में मदद मिलती है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से आयोजित सुरक्षा अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए जस्टिस नाथ ने कहा कि महिलाओं को यह पता होना चाहिए कि उनकी बात सुनी जाएगी, कानून उनकी रक्षा के लिए कार्रवाई करेगा और उन्हें गरिमा, सुरक्षा तथा अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की आजादी के साथ जीने के लिए आवश्यक सहयोग मिलेगा।

न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि उस समझ को बदलने में समय लग सकता है, लेकिन इसकी शुरुआत इस बात से होती है कि आज लोग अपने परिवारों और संस्थाओं में क्या चुनते हैं।

उन्होंने कहा कि जब कोई महिला पहली बार डर, हिंसा या परेशानी के बारे में बात करे, तो उसकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे सामान्य माना जाना चाहिए।

बेटों को महिलाओं के सम्मान व समानता के संस्कार दें : अन्नपूर्णा देवी

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बुधवार को घरेलू हिंसा का सामना कर रही महिलाओं के साथ पूरी संवेदनशीलता से पेश आने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और समानता के मूल्य बेटों में बचपन से ही विकसित किए जाने चाहिए।

राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को समाप्त करने के लिए कड़े कानूनों के साथ समाज में सांस्कृतिक और व्यवहारगत बदलाव भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि हमारा साझा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है..हर घर सुरक्षित हो, हर व्यवस्था संवेदनशील हो और हर पीड़ित को त्वरित न्याय मिले।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि संकट में फंसी महिलाओं को मदद के लिए व्यवस्था के पीछे भागना पड़े, बल्कि व्यवस्था को खुद उन तक पहुंचना चाहिए। रहाटकर ने संबोधित करते हुए कहा कि जिस महिला को सुरक्षा की जरूरत हो, उसे यह भरोसा दिलाया जाना चाहिए कि आप अकेली नहीं हैं, व्यवस्था आपके साथ है।’