Published: Friday, October 16, 2026, 21:43 [IST]
फिल्म: नई नवेली (Nayyi Navelli)
स्टारकास्ट: यामी गौतम, आदित्य कुलश्रेष्ठ, सुनीता राजवर, आदिनाथ एम. कोठारे
डायरेक्टर: बालाजी मोहन
रनटाइम: 2 घंटे 18 मिनट
रेटिंग: 2 (**)
Nayyi Navelli Review: बॉलीवुड में हॉरर-कॉमेडी का चलन पिछले कुछ सालों में काफी लोकप्रिय हुआ है। 'स्त्री', 'मुंज्या' और 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' जैसी फिल्मों ने लोककथाओं, रहस्यमयी शक्तियों और डर को मनोरंजन के साथ पेश करने की कोशिश की है। इसी कड़ी में निर्देशक बालाजी मोहन की फिल्म 'नई नवेली' एक अलग विचार लेकर आती है।
एक नई बहू की रहस्यमयी दुनिया
फिल्म में एक नई बहू की रहस्यमयी दुनिया को रामायण और रावण से जुड़े पौराणिक प्रसंगों के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। यामी गौतम की मौजूदगी और पहले हिस्से का हास्य फिल्म को दिलचस्प बनाते हैं, लेकिन कमजोर कहानी और बिखरी हुई पटकथा आखिरकार इसकी चमक फीकी कर देते हैं। आइए जानते हैं कि ये फिल्म मनोरंजन की कसौटी पर कितनी खरी उतरती है।
क्या है 'नई नवेली' की कहानी?
-फिल्म की कहानी मेरठ में रहने वाले अवस्थी परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। इस परिवार में हर उम्र के सदस्य हैं और सभी का अपना अलग अंदाज है। इसी घर में नई बहू मोहिनी (यामी गौतम) कदम रखती है। खूबसूरती, समझदारी और अपने मिलनसार स्वभाव से मोहिनी जल्द ही पूरे परिवार का दिल जीत लेती है। घर की छोटी-बड़ी परेशानियों को सुलझाने में उसकी भूमिका अहम हो जाती है और देखते ही देखते वह सभी की चहेती बन जाती है।
-मोहिनी का पति राजा अवस्थी (आदिनाथ एम. कोठारे) भी उसे बेहद प्यार करता है। हालांकि परिवार में एक शख्स ऐसा है जिसे मोहिनी का यह असाधारण व्यवहार खटकने लगता है। राजा का भाई बंटू (अनुराग ठाकुर) अपनी भाभी की गतिविधियों को गौर से देखने लगता है। घर में होने वाली अजीब घटनाएं उसके शक को और गहरा कर देती हैं। उसे लगने लगता है कि मोहिनी कोई साधारण महिला नहीं, बल्कि एक डायन हो सकती है।
-इसके बाद बंटू अपनी भाभी की असलियत पता लगाने में जुट जाता है। एक तरफ परिवार मोहिनी को अपने घर की खुशहाली की वजह मानता है, तो दूसरी तरफ बंटू उसके रहस्यमयी व्यक्तित्व की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करता है। इसी बीच कहानी में हास्य, रहस्य और अलौकिक घटनाओं का सिलसिला शुरू होता है। फिल्म का शुरुआती आकर्षण इसी सवाल में छिपा है कि आखिर मोहिनी कौन है और उसके आसपास होने वाली घटनाओं के पीछे क्या राज है?
कैसी है फिल्म की कहानी और निर्देशन?
-निर्देशक बालाजी मोहन फिल्म के पहले हिस्से में कहानी को मनोरंजक बनाए रखने में सफल नजर आते हैं। एक अजीबोगरीब परिवार, उसमें आई रहस्यमयी बहू और उस पर शक करने वाले देवर का समीकरण दिलचस्प है। मोहिनी और बंटू के बीच होने वाली नोकझोंक कहानी में हास्य पैदा करती है। परिवार के दूसरे सदस्यों की हरकतें भी कई मौकों पर हंसने का मौका देती हैं।
-फिल्म की खासियत ये है कि शुरुआत में रहस्य और कॉमेडी के बीच अच्छा संतुलन दिखाई देता है। दर्शकों के मन में मोहिनी की असलियत जानने की उत्सुकता बनी रहती है लेकिन इंटरवल के बाद कहानी अचानक ऐसी दिशा पकड़ती है, जहां फिल्म की मूल अवधारणा पीछे छूटने लगती है।
-मेरठ के एक परिवार में चल रहा रहस्य अचानक रामायण और राम-रावण युद्ध के प्रसंगों तक पहुंच जाता है। पौराणिक संदर्भों को हॉरर-कॉमेडी के साथ जोड़ने का विचार नया जरूर है, लेकिन उसे पर्दे पर उतारने के लिए जिस मजबूत पटकथा और तार्किक जुड़ाव की जरूरत थी, उसकी कमी महसूस होती है। कई घटनाएं इतनी अटपटी लगती हैं कि दर्शक कहानी से भावनात्मक रूप से जुड़ने के बजाय उसके घटनाक्रम पर सवाल उठाने लगता है।
रामायण का ट्विस्ट क्यों नहीं आया पसंद?
-फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका दूसरा हिस्सा है। कहानी में रावण और उसकी सेना से जुड़े प्रसंगों को जिस अंदाज में पेश किया गया है, वह कई बार प्रभावशाली होने के बजाय बनावटी लगता है। राक्षसों की दुनिया में जॉम्बीज का डांस और शिव के त्रिशूल तथा हनुमान की गदा जैसे पौराणिक प्रतीकों के इस्तेमाल से जुड़े दृश्य कहानी को एक अलग रंग देने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनका प्रभाव सीमित रह जाता है।
-दशहरे और दिवाली जैसे त्योहारों का संदर्भ भी कहानी में आता है, मगर इन प्रसंगों को मुख्य कथानक से जोड़ने का तरीका सहज नहीं लगता। रामायण जैसे विशाल और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण आख्यान को हॉरर-कॉमेडी में पिरोना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। फिल्म इस चुनौती को पूरी तरह पार नहीं कर पाती।
-कमजोर पटकथा के कारण कई संभावनाएं अधूरी रह जाती हैं। रावण का किरदार भी उतना प्रभावशाली नहीं बन पाता, जितनी उससे उम्मीद की जाती है। नतीजतन, क्लाइमेक्स कहानी को संतोषजनक अंजाम देने में चूक जाता है। यदि फिल्म अपने शुरुआती रहस्य और हास्य को आगे बढ़ाते हुए पौराणिक प्रसंगों को अधिक मजबूती से जोड़ती, तो इसका प्रभाव कहीं बेहतर हो सकता था।
फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी दमदार एक्टिंग
-अभिनय के मोर्चे पर फिल्म को कुछ मजबूत कलाकारों का साथ मिला है। मोहिनी के किरदार में यामी गौतम सबसे ज्यादा ध्यान खींचती हैं। वह एक तरफ आदर्श बहू की मासूमियत और सहजता दिखाती हैं, तो दूसरी तरफ अपने रहस्यमयी व्यक्तित्व से दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखती हैं। उनके हाव-भाव और स्क्रीन प्रेजेंस किरदार को आकर्षक बनाते हैं। हालांकि, कमजोर लेखन के कारण उनके किरदार की पूरी क्षमता सामने नहीं आ पाती।
-राजा अवस्थी के रूप में आदिनाथ एम. कोठारे भावनात्मक दृश्यों में अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं लेकिन जब उनका किरदार राक्षसी रूप में सामने आता है, तो कुछ दृश्यों में जरूरत से ज्यादा आक्रामकता और नाटकीयता देखने को मिलती है।
-फिल्म में बंटू की भूमिका निभाने वाले अनुराग ठाकुर कॉमेडी के मामले में बाजी मार लेते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, संवाद बोलने का अंदाज और चेहरे के हाव-भाव कई दृश्यों को मजेदार बना देते हैं। मोहिनी पर शक करने वाले देवर के रूप में वह कहानी के हास्य पक्ष को मजबूती देते हैं।
-इसके अलावा सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ और सुष्मिता मुखर्जी जैसे अनुभवी कलाकार भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद ये कलाकार कई सीन्स में मनोरंजन बढ़ाते हैं। कुल मिलाकर, कलाकारों का प्रदर्शन फिल्म के कमजोर पक्षों के बीच राहत देता है।
संगीत और तकनीकी पक्ष में कितना है दम?
-'नई नवेली' का संगीत इसके मनोरंजक पहलुओं में शामिल है। 'फटा पटाखा' और 'भाभी तबाही' जैसे गाने फिल्म के मिजाज के अनुरूप हैं और हल्के-फुल्के मनोरंजन का माहौल बनाते हैं। हालांकि केवल संगीत और कुछ मजेदार दृश्यों के सहारे कमजोर कहानी की कमियों को पूरी तरह ढका नहीं जा सकता।
-फिल्म की गति और संपादन पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत महसूस होती है। कहानी के कुछ हिस्सों को अधिक चुस्त बनाया जाता, तो दूसरे भाग में पैदा होने वाला बिखराव कम हो सकता था। अनावश्यक विस्तार घटाकर और घटनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाकर फिल्म को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता था।
देखें या नहीं 'नई नवेली'?
-अगर आप यामी गौतम के फैन हैं और हॉरर-कॉमेडी के साथ पौराणिक कहानियों के नए प्रयोग देखना पसंद करते हैं, तो 'नई नवेली' को एक मौका दे सकते हैं। फिल्म का पहला हिस्सा मनोरंजन करता है और अनुराग ठाकुर की कॉमिक टाइमिंग के साथ यामी गौतम का अभिनय इसे देखने लायक बनाता है।
-अगर आप एक मजबूत कहानी, सहज पटकथा और प्रभावशाली क्लाइमेक्स की उम्मीद कर रहे हैं, तो फिल्म निराश कर सकती है। दिलचस्प विचार के बावजूद रामायण और हॉरर-कॉमेडी के बीच संतुलन नहीं बन पाता। कुल मिलाकर, 'नई नवेली' कुछ अच्छे अभिनय और हंसी-मजाक वाले दृश्यों के बावजूद अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाती। यामी गौतम और अनुराग ठाकुर की परफॉर्मेंस फिल्म की ताकत है लेकिन कमजोर पटकथा और उलझे हुए पौराणिक ट्विस्ट इसके मनोरंजन पर भारी पड़ते हैं।