Name Plate As per Vastu: घर का मुख्य दरवाजा सिर्फ घर में प्रवेश का रास्ता नहीं होता, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे घर की ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है. यही वजह है कि मुख्य द्वार से जुड़ी छोटी-छोटी चीजों पर भी खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है. दरवाजे पर लगी नेम प्लेट भी इन्हीं चीजों में शामिल है. वास्तु के अनुसार नेम प्लेट का रंग, आकार और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का भी अपना महत्व माना गया है.
अगर आप भी अपने घर के मुख्य दरवाजे पर नई नेम प्लेट लगाने की सोच रहे हैं, तो आपके मन में ये सवाल जरूर आ सकता है कि लकड़ी, मेटल या पत्थर में से कौन सी नेम प्लेट घर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है? वास्तु के मुताबिक अलग-अलग दिशाओं और घर की ऊर्जा के अनुसार नेम प्लेट के मटेरियल का चुनाव किया जा सकता है. इसलिए सिर्फ डिजाइन पसंद आने पर नेम प्लेट चुनने के बजाय वास्तु से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना बेहतर माना जाता है.
नेम प्लेट को क्यों माना जाता है शुभ?
वास्तु में लकड़ी को प्राकृतिक और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा मटेरियल माना जाता है. इसी वजह से लकड़ी की नेम प्लेट को घर के मुख्य द्वार के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है. खासतौर पर जिन जगहों पर प्राकृतिक तत्वों का संतुलन जरूरी माना जाता है, वहां लकड़ी का इस्तेमाल सकारात्मक प्रभाव देने वाला माना जाता है.
लकड़ी की नेम प्लेट घर को एक गर्मजोशी भरा और प्राकृतिक लुक भी देती है. अगर इसे सही दिशा और रंग के साथ लगाया जाए, तो यह घर के मुख्य द्वार की खूबसूरती बढ़ाने के साथ वास्तु की दृष्टि से भी अनुकूल मानी जा सकती है.
मेटल की नेम प्लेट कब मानी जाती है बेहतर?
धातु यानी मेटल को भी वास्तु में महत्वपूर्ण माना गया है. हालांकि हर दिशा के लिए एक जैसा मेटल उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है. वास्तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार की दिशा को ध्यान में रखते हुए मेटल की नेम प्लेट का चुनाव करना चाहिए. मेटल की नेम प्लेट मजबूत और टिकाऊ होने के साथ मुख्य दरवाजे को आकर्षक लुक भी देती है. इसलिए अगर आप मेटल की नेम प्लेट लगाना चाहते हैं, तो उसके रंग और डिजाइन के साथ घर की दिशा का भी ध्यान रखें.
पत्थर की नेम प्लेट कैसी रहती है?
पत्थर को मजबूत और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण पत्थर से बनी नेम प्लेट भी कई घरों में इस्तेमाल की जाती है. वास्तु की मान्यताओं में पत्थर का संबंध स्थिर ऊर्जा से जोड़ा जाता है. हालांकि, पत्थर की नेम प्लेट चुनते समय उसका रंग, आकार और वजन भी ध्यान में रखना चाहिए. मुख्य द्वार के लिए बहुत भारी या ऐसा डिजाइन चुनने से बचना बेहतर माना जाता है, जो दरवाजे के पूरे लुक को दबा दे.
नेम प्लेट लगाते समय दिशा का रखें ध्यान
वास्तु के अनुसार नेम प्लेट के मटेरियल के साथ-साथ मुख्य द्वार की दिशा भी महत्वपूर्ण होती है. इसलिए घर की दिशा को ध्यान में रखकर ही नेम प्लेट के लिए सामग्री और रंग का चुनाव करना चाहिए. नेम प्लेट ऐसी जगह लगानी चाहिए जहां वह साफ दिखाई दे और उस पर घर के मालिक का नाम स्पष्ट रूप से लिखा हो. उसे बहुत नीचे या ऐसी जगह लगाने से बचना चाहिए जहां वह आसानी से नजर न आए.
नेम प्लेट का रंग और डिजाइन भी है जरूरी
नेम प्लेट चुनते समय केवल उसका मटेरियल ही नहीं, बल्कि रंग और डिजाइन भी देखा जाता है. वास्तु में अलग-अलग दिशाओं के लिए अलग रंगों को अनुकूल माना गया है. इसलिए मुख्य द्वार की दिशा के हिसाब से नेम प्लेट का रंग चुनना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा, नेम प्लेट टूटी, गंदी या खराब स्थिति में नहीं होनी चाहिए. अगर पुरानी नेम प्लेट टूट गई है या उसका नाम स्पष्ट दिखाई नहीं देता, तो उसे बदल देना चाहिए.
कौन सी नेम प्लेट सबसे शुभ?
वास्तु की मान्यताओं के अनुसार, किसी एक मटेरियल को हर घर के लिए सबसे शुभ नहीं कहा जा सकता. लकड़ी, मेटल और पत्थर—तीनों का चुनाव घर की दिशा, रंग और अन्य वास्तु स्थितियों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है. इसलिए नेम प्लेट लगाते समय सिर्फ उसकी खूबसूरती नहीं, बल्कि मुख्य द्वार की दिशा और मटेरियल के तालमेल पर भी ध्यान देना चाहिए.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

सना चौधरी
सना यूपी के गाजियाबाद की रहने वाली हैं. सना ने हाईटेक इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है. पढ़ाई के साथ-साथ कंटेंट ऑप्टिमाईजेशन और वीडियो एडिटिंग भी सीखा है. जिसके बाद सना ने अलग-अलग जगहों पर डिजिटल कॉन्टेंट राइटर और वीडियो एडिटर के तौर पर काम किया. इससे पहले सना Zee मीडिया में बतौर वीडियो और कंटेंट एडिटर काम कर चुकी हैं. उन्होंने जी न्यूज में सोशल मीडिया पेज मैनेज किया है. Zee के बाद सना ने टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट TV9hindi.com में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया. सना को न्यूज़ एंकरिंग का भी शौक है.
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