Nag Panchami 2026: 16 या 17 अगस्त, कब है नाग पंचमी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Published on 14 अग॰ 2026

Published: Friday, August 14, 2026, 16:00 [IST]

Nag Panchami 2026: हिंदू धर्म में श्रावण मास में आने वाली नाग पंचमी का विशेष महत्व है। इस दिन नाग देवता के साथ भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही, इस दिन पूजा करने से कालसर्प दोष जैसी बाधाओं से भी राहत मिलती है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग को उनके प्रिय गणों में भी गिना जाता है, इसलिए इस दिन शिव पूजा का भी विशेष महत्व होता है। पूजा के दौरान नाग देवता को दूध, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है तथा कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। आइए, जानते हैं इस साल नाग पंचमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और पूजा विधि के बारे में -

Nag Panchami 2026
फोटो क्रेडिट: Chat GPT

नाग पंचमी 2026 तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावन शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त 2026, रविवार को शाम 4 बजकर 55 मिनट से होगी और इसका समापन 17 अगस्त,2026, सोमवार को शाम 5 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी।

नाग पंचमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

नाग पंचमी के दिन पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6 बजे से 8 बजाकर 10 मिनट तक रहेगा। इस दौरान करीब 2 घंटे 10 मिनट तक पूजा का उत्तम मुहूर्त रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस शुभ समय में विधि-विधान से नाग देवता और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:24 बजे से 5:08 बजे तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात 12:03 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा।

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचमी तिथि को नाग देवताओं की पूजा के लिए विशेष माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से नाग देवता की आराधना करने पर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। नाग पंचमी पर भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है, क्योंकि नाग उनके आभूषण और प्रिय गण माने जाते हैं। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। कई श्रद्धालु इस दिन कालसर्प दोष की शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए भी विशेष पूजा करते हैं।

नाग पंचमी की पूजा विधि

नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद घर के पूजा स्थान या मुख्य द्वार के पास नाग देवता का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
अगर चित्र उपलब्ध न हो, तो पारंपरिक रूप से दीवार या कागज पर नाग का चित्र भी बनाया जा सकता है।
इसके बाद हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें।
भगवान शिव का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करें तथा नाग देवता की भी श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

पूजा के दौरान इन मंत्रों का करें जाप

पूजा के समय श्रद्धा के साथ इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है -
ॐ सर्पेभ्यो नमः।
ॐ नमः शिवाय।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी पर श्रद्धापूर्वक की गई पूजा से भगवान शिव और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

Story first published: Friday, August 14, 2026, 16:00 [IST]