MP Bal Vivah Report: मध्यप्रदेश में बाल विवाह के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, हर पांचवीं लड़की की शादी 18 साल से पहले

Published on 29 अग॰ 2026

MP Bal Vivah Report:  मध्य प्रदेश में बाल विवाह (Bal Vivah) को लेकर सामने आए आंकड़ चिंताजनक हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की NFHS-6 (2023-24) रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 20 से 24 वर्ष की उम्र की करीब 20 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल से कम उम्र में हुई है यानी राज्य में लगभग हर पांचवीं लड़की का विवाह बालिग होने से पहले हुआ।

 देखें, पूरी रिपोर्ट

गांवों में शहरों से 2.6 गुना ज्यादा बाल विवाह

रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की स्थिति शहरी क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक गंभीर है। शहरों में करीब 9 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हुई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा बढ़कर 23.4 प्रतिशत है यानी गांवों में बाल विवाह का आंकड़ा शहरों के मुकाबले करीब 2.6 गुना है।

आगर मालवा में सबसे ज्यादा बाल विवाह

प्रदेश के जिलों के आंकड़ों में पर नजर डालें तो, उज्जैन संभाग के आगर मालवा जिले की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई गई है। यहां करीब 49.4 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हुई। NFHS-5 की तुलना में जिले में बाल विवाह के आंकड़े में करीब 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज होने की बात सामने आई है।

MP Bal Vivah Report

इन जिलों में भी बढ़े बाल विवाह

उधर, हरदा में भी पिछले सर्वे की तुलना में बाल विवाह का आंकड़ा लगभग दोगुना होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में खंडवा और सतना में करीब 6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई गई है। बैतूल में यह आंकड़ा 11.2 प्रतिशत से बढ़कर 16.2 प्रतिशत तक पहुंच गया।

राजगढ़ में सबसे बड़ा सुधार

रिपोर्ट में कुछ जिलों में बाल विवाह की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार भी सामने आया है। राजगढ़ में बाल विवाह के आंकड़े में करीब 46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज होने की बात कही गई है।

इसके अलावा छतरपुर में 16.7 प्रतिशत, श्योपुर में 14.2 प्रतिशत, रीवा में 13 प्रतिशत और इंदौर व दतिया में करीब 11 प्रतिशत तक कमी बताई गई है।

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आंकड़ों से बढ़ी चिंता

NFHS-6 के ये आंकड़े प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों और जमीनी स्तर पर उनके असर को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति शहरी इलाकों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। वहीं कुछ जिलों में बाल विवाह के मामलों में हुई बढ़ोतरी ने प्रशासन और सामाजिक संगठनों की चुनौती बढ़ा दी है। यहां और प्रभावी तरीके से रोकथाम की जरूरत है।

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