मध्यप्रदेश में 13 सितंबर 2026 तक 718.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है। पिछले वर्षों में 2022, 2024 और 2025 में सामान्य से अधिक बारिश रही। सितंबर की बारिश अब 2026 के मानसूनी आंकड़े और प्रदेश की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
मध्यप्रदेश में 13 सितंबर 2026 तक 718.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है। पिछले वर्षों में 2022, 2024 और 2025 में सामान्य से अधिक बारिश रही
- Published: 13 Sep 2026, 03:18 PM IST
- Last Updated: 13 Sep 2026, 03:31 PM IST
भोपाल। मध्यप्रदेश में इस साल मानसून ने पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले अब तक कुछ कमजोर प्रदर्शन किया है। मौसम विभाग, भोपाल के आंकड़ों के अनुसार 13 सितंबर 2026 तक प्रदेश में 718.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि पिछले वर्षों में इसी अवधि और पूरे मानसून सीजन में बारिश का आंकड़ा कई बार सामान्य से ऊपर रहा है। 2022 में 1169.1 मिमी, 2024 में 1111.95 मिमी और 2025 में 1148.1 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। इस साल अभी मानसून का पूरा सीजन बाकी आंकड़ों के लिहाज से समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए बचे हुए सितंबर महीने की बारिश तय करेगी कि 2026 का कुल आंकड़ा कहां पहुंचता है।
मौसम विभाग के डायरेक्टर अरुण शर्मा के अनुसार, मानसून की स्थिति को केवल एक समय के आंकड़े से नहीं देखा जाना चाहिए। सितंबर में होने वाली बारिश प्रदेश के कुल सीजन के आंकड़े को बदल सकती है। हालिया मौसम अपडेट में भी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में मानसून के दोबारा सक्रिय होने और बारिश की संभावना जताई गई है।
2022 में सबसे ज्यादा बारिश, 2025 भी रहा मेहरबान
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 में मध्यप्रदेश में 1169.1 मिमी बारिश हुई थी। यह सामान्य से करीब 23 प्रतिशत अधिक थी। इसके बाद 2024 में 1111.95 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 18 प्रतिशत ज्यादा रही।
साल 2025 भी बारिश के लिहाज से अच्छा रहा। प्रदेश में 1148.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 21 प्रतिशत अधिक थी। यानी 2022, 2024 और 2025 में प्रदेश को सामान्य से अधिक बारिश मिली।
इसके मुकाबले 2021 में 945.2 मिमी और 2023 में 945.5 मिमी बारिश हुई थी। दोनों साल बारिश सामान्य के आसपास रही।
मध्यप्रदेश में बारिश का सालवार आंकड़ा
| वर्ष | बारिश | स्थिति |
| 2021 | 945.2 मिमी | सामान्य |
| 2022 | 1169.1 मिमी | सामान्य से +23% |
| 2023 | 945.5 मिमी | सामान्य |
| 2024 | 1111.95 मिमी | सामान्य से +18% |
| 2025 | 1148.1 मिमी | सामान्य से +21% |
| 2026 | 718.8 मिमी* | सामान्य से -6% |
स्रोत: मौसम विभाग, भोपाल, मध्यप्रदेश
*2026 का आंकड़ा 13 सितंबर 2026 तक का है।
2026 में क्यों खास है 718.8 मिमी का आंकड़ा?
इस साल 13 सितंबर तक प्रदेश में 718.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है। आंकड़ा देखने में पिछले वर्षों से काफी कम है, लेकिन इसकी तुलना करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2026 का आंकड़ा अभी पूरे मानसून सीजन का अंतिम आंकड़ा नहीं है।
सितंबर मानसून के लिए महत्वपूर्ण महीना होता है। अगर इस महीने अच्छी बारिश होती है तो प्रदेश की कुल बारिश में तेजी से इजाफा हो सकता है। हाल के मौसम अपडेट में भी मध्यप्रदेश में मानसून के फिर सक्रिय होने और कई जिलों में बारिश की संभावना सामने आई है।
यानी अभी 2026 के मानसून को कमजोर या सामान्य घोषित करना जल्दबाजी होगी। सितंबर के बचे दिनों की बारिश तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है।
पांच साल में बारिश का ट्रेंड क्या बता रहा?
आंकड़ों को देखें तो मध्यप्रदेश में बारिश का पैटर्न हर साल एक जैसा नहीं रहा है। 2021 में बारिश सामान्य रही। 2022 में अचानक सामान्य से 23 प्रतिशत ज्यादा पानी बरसा। इसके बाद 2023 में बारिश फिर सामान्य स्तर के आसपास आ गई।
2024 में बारिश ने फिर जोर पकड़ा और सामान्य से 18 प्रतिशत अधिक पानी बरसा। 2025 में भी यही स्थिति रही और बारिश सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई।
इस तरह लगातार दो साल-2024 और 2025 में प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश हुई। अब 2026 में 13 सितंबर तक का आंकड़ा पिछले दो वर्षों की तुलना में कम है।
2026 में सितंबर बदल सकता है पूरा गणित
इस साल सबसे ज्यादा नजर अब सितंबर के बाकी दिनों पर है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार मध्यप्रदेश में मानसून फिर सक्रिय हो रहा है और कई हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। 13 सितंबर को पश्चिमी मध्यप्रदेश में भी बारिश की संभावना भी बताई गई थी।
अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो प्रदेश के मौजूदा 718.8 मिमी आंकड़े में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। खासकर जिन क्षेत्रों में अब तक बारिश कम हुई है, वहां सितंबर की बारिश किसानों और जल स्रोतों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।
किसानों और जल स्रोतों के लिए भी अहम है सितंबर का पानी
मानसून की अंतिम बारिश खेती के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होती है। खरीफ फसलों के लिए सितंबर में मिलने वाली बारिश मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करती है। वहीं तालाब, बांध और दूसरे जल स्रोतों में भी पानी का स्तर बढ़ता है।
हालांकि, बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर दूसरी तरह की परेशानी भी सामने आ सकती है। तेज बारिश से खेतों में पानी भरने, फसलों को नुकसान, निचले इलाकों में जलभराव और नदियों-नालों के जलस्तर बढ़ने की स्थिति बन सकती है।
2026 की तुलना अभी अंतिम नहीं
पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में मानसून का प्रदर्शन साल-दर-साल बदलता रहा है। 2022 में 1169.1 मिमी और 2025 में 1148.1 मिमी जैसी अच्छी बारिश के बाद इस साल 13 सितंबर तक 718.8 मिमी बारिश दर्ज होना निश्चित रूप से अंतर दिखाता है।
लेकिन 2026 के आंकड़े को अभी अंतिम मानना सही नहीं होगा, क्योंकि मानसून की विदाई से पहले सितंबर में बारिश के कई दौर आ सकते हैं। इसलिए इस साल की वास्तविक स्थिति का आकलन मानसून सीजन खत्म होने के बाद ही ज्यादा सटीक तरीके से किया जा सकेगा।
फिलहाल आंकड़ों का सबसे बड़ा संकेत यही है कि पिछले दो साल सामान्य से ज्यादा बारिश वाले रहे, जबकि 2026 में अब तक बारिश कम है और सितंबर की बारिश पर प्रदेश का मानसूनी आंकड़ा काफी हद तक निर्भर करेगा।