देश के उत्तर और पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून पूरी तरह से आफत बनकर बरस रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में अगले एक सप्ताह तक मानसूनी सक्रियता बने रहने का पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके चलते अरुणाचल, हिमाचल और उत्तराखंड में जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
विभाग के अनुसार, 20 जुलाई से मैदानी इलाकों में मानसूनी गतिविधियां और तेज होंगी।
- Published: 19 Jul 2026, 08:27 AM IST
- Last Updated: 19 Jul 2026, 08:28 AM IST
भारत के उत्तरी और पूर्वोत्तर हिस्सों में मानसूनी बारिश अब लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। मौसम विभाग (IMD) की ओर से रविवार को जारी ताजा अपडेट के अनुसार, देश के उत्तर-पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों में आगामी छह से सात दिनों तक मानसून के अत्यधिक सक्रिय रहने के प्रबल आसार हैं।
हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने राहत की खबर देते हुए बताया है कि इस अवधि के दौरान पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियों में अपेक्षाकृत कमी देखी जा सकती है। वर्तमान में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी राज्यों में बाढ़, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
अरुणाचल के 35 गांवों में तबाही
पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में पिछले कई दिनों से हो रही रिकॉर्ड तोड़ बारिश के चलते बाढ़ और विनाशकारी भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई है। सूबे के अपर सुबनसिरी जिले के अंतर्गत आने वाले गिबा, निलिंग, चेतम और दापोरिजो सर्किलों के करीब 35 गांवों में बाढ़ का पानी पूरी तरह घुस चुका है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक 1,13,674 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो चुके हैं और सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।
हिमाचल में फटा बादल
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मौसम का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, जिसके मद्देनजर विभाग ने अगले दो दिनों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का 'रेड अलर्ट' घोषित कर दिया है। किन्नौर की सांगला वैली में अचानक बादल फटने से मस्तरंग के पास बने ग्रागा नाले में भयंकर बाढ़ आ गई। इस मलबे और पानी के तेज बहाव में सांगला-छितकुल सड़क पूरी तरह जमींदोज हो गई, साथ ही वहां स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) कैंप के मुख्य गेट पर बनी सुरक्षा गुमटी और मां दुर्गा का एक प्राचीन मंदिर पूरी तरह बह गया। इसके अतिरिक्त, चंबा में शनिवार की सुबह केरूं के समीप हुए भारी भूस्खलन के चलते पठानकोट-भरमौर नेशनल हाईवे कई घंटों तक पूरी तरह ठप रहा।
मानसरोवर यात्रा रोकी गई
पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भी भारी मानसूनी बारिश ने तबाही मचा रखी है। तवाघाट-गुंजी कैलाश यात्रा मार्ग पर गर्भाधार और तंपा मंदिर के बीच अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर मलबे के रूप में सड़क पर आ गिरा। इस भीषण भूस्खलन के कारण प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा को एहतियातन बीच में ही रोकना पड़ा है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से चौथे दल के सभी श्रद्धालुओं को धारचूला में ही रोक दिया है।
सीमा सड़क संगठन (BRO) के कार्मिक भारी जेसीबी और आधुनिक मशीनों की मदद से मलबे तथा बड़े बोल्डरों को हटाकर हाईवे को दोबारा चालू करने के काम में युद्धस्तर पर जुटे हैं। मौसम साफ होने और सड़क खुलने पर ही रविवार को यात्रियों को धारचूला से गुंजी की तरफ रवाना किया जाएगा।
पंजाब और दिल्ली का हाल
मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब में भी मानसून तेजी से पैर पसार रहा है। मौसम विभाग ने रविवार से अगले पांच दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश का 'येलो अलर्ट' जारी किया है, जिसका सबसे ज्यादा व्यापक असर पंजाब के सीमावर्ती जिले पठानकोट और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। दूसरी तरफ, देश की राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर क्षेत्र में उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। दिल्ली-एनसीआर में 19 जुलाई को दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और कुछ चुनिंदा स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने की उम्मीद है।