Published: Thursday, September 3, 2026, 17:04 [IST]
कई बैंकों ने सितंबर महीने के लिए अपने MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) में बढ़ोतरी कर दी है। इससे MCLR से जुड़े लोन ग्राहकों की EMI अगली रीसेट डेट से बढ़ने के पूरे आसार हैं। हालांकि, EBLR (एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट) या फिक्स्ड-रेट लोन वाले ग्राहकों पर इसका तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर आपका भी लोन चल रहा है, तो आज ही अपना 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS) और सेंक्शन लेटर चेक करके अपना बेंचमार्क और स्प्रेड जरूर जान लें।
MCLR लोन की दरें सिर्फ तय रीसेट डेट पर ही बदलती हैं, जो मासिक, तिमाही या छमाही हो सकती है। उस तारीख तक आपकी किस्त या लोन की अवधि में कोई बदलाव नहीं होता। जब तक आप खुद न कहें, ज्यादातर बैंक EMI बढ़ाने के बजाय पहले लोन की अवधि (tenure) बढ़ाते हैं। दूसरी तरफ, EBLR लोन बाहरी बेंचमार्क (आमतौर पर रेपो रेट) के हिसाब से घटते-बढ़ते हैं। वहीं फिक्स्ड-रेट लोन की दरों में बदलाव तभी होता है जब एग्रीमेंट में रीसेट क्लॉज शामिल हो।

MCLR बनाम EBLR: जानिए किसकी बढ़ेगी EMI
अपने की फैक्ट स्टेटमेंट या लोन एग्रीमेंट में बेंचमार्क चेक करें और तीन बातें नोट करें—बेंचमार्क का प्रकार, स्प्रेड और रीसेट की अवधि। अपनी इंटरनेट बैंकिंग में जाकर लोन की अगली रीसेट डेट भी देख लें। अगर आपका लोन MCLR से जुड़ा है, तो बैंक से इसे EBLR में इंटरनली स्विच करने के बारे में पूछें। साथ ही नए स्प्रेड, टैक्स समेत कन्वर्जन फीस और नई दर लागू होने की तारीख का लिखित कोटेशन जरूर लें।
EBLR में स्विच करने का प्रोसेस, फीस और जरूरी बातें
बैंक के भीतर ही स्विच (इंटरनल स्विच) करने के लिए आवेदन दें, कन्वर्जन फीस भरें और नए 'की फैक्ट स्टेटमेंट' एडेडम की कॉपी जरूर लें। यह पक्का कर लें कि बैंक ने चुपके से स्प्रेड न बढ़ा दिया हो। वहीं, दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर (एक्सटर्नल रिफाइनेंस) कराने के लिए नया सेंक्शन, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन, लीगल चेक और फोरक्लोजर लेटर की जरूरत होगी। इसमें प्रोसेसिंग फीस और राज्य के टैक्स भी लगेंगे। इसके लिए क्रेडिट स्कोर चेक हो सकता है, हालांकि फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर कोई प्री-पेमेंट पेनल्टी नहीं लगती।
| ब्याज दर में बढ़ोतरी | प्रति लाख EMI में बढ़ोतरी | 50 लाख के लोन पर असर |
|---|---|---|
| +0.10% | लगभग ₹6 | लगभग ₹300 |
| +0.25% | लगभग ₹15 | लगभग ₹750 |
| +0.50% | लगभग ₹30 | लगभग ₹1,500 |
उदाहरण के तौर पर, 20 साल की अवधि वाले ₹50 लाख के लोन पर ब्याज दर 0.50 फीसदी कम होने से आपकी EMI में हर महीने करीब ₹1,400 से ₹1,600 तक की बचत हो सकती है। अगर लोन स्विच करने में कुल ₹20,000 का खर्च आता है, तो 12 से 15 महीनों में इस लागत की भरपाई (ब्रेक-इवेन) हो जाएगी। ध्यान रखें कि बैंक आपको जबरन इंश्योरेंस न बेचे, स्प्रेड न बढ़ाए या बिना वजह लोन की अवधि न बढ़ाए। अगर आपकी रीसेट डेट पास है, तो तुरंत कदम उठाएं ताकि अगली साइकिल से ही नई शर्तों का फायदा मिल सके।
Story first published: Thursday, September 3, 2026, 17:04 [IST]
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