महोबा के चर्चित हत्याकांड से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीजीपी और प्रदेश के महाधिवक्ता को तलब किया है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने हत्यारोपी की जमानत याचिका पर बार-बार निर्देश के बावजूद काउंटर एफिडेविट जवाबी हलफनामा दाखिल न किए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है।
महोबा हत्याकांड में काउंटर एफिडेविट दाखिल न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट नाराज (फाइल फोटो)
- Published: 01 Sep 2026, 05:24 PM IST
- Last Updated: 01 Sep 2026, 05:24 PM IST
प्रयागराज : महोबा जनपद के एक चर्चित हत्याकांड में अभियुक्त की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली और ढिलाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। मामले में समय से जवाबी हलफनामा दाखिल न किए जाने को गंभीरता से लेते हुए जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डीजीपी और महाधिवक्ता एडवोकेट जनरल को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई दोपहर भोजन अवकाश के बाद नियत की गई है, जहां डीजीपी और महाधिवक्ता न्यायालय के समक्ष सरकार व पुलिस महकमे का पक्ष रखेंगे।
जवाबी हलफनामा दाखिल न होने पर कोर्ट सख्त
यह पूरा मामला महोबा के श्रीनगर थाना क्षेत्र में वर्ष 2025 में दर्ज हुए हत्या के एक अभियोग से जुड़ा है। मामले में जेल में बंद अभियुक्त पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई है। 24 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई के दौरान डीजीपी की ओर से एडीजी जोन प्रयागराज ज्योति नारायण अदालत में पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान जब सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को दो बार पत्र भेजे जाने के बावजूद अब तक कोई काउंटर एफिडेविट जवाबी हलफनामा प्राप्त नहीं कराया गया है, तो अदालत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया।
अदालती आदेशों की अनदेखी पर जताई नाराजगी
जस्टिस समीर जैन ने तल्ख टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि आखिर पुलिस अधिकारी न्यायिक आदेशों के अनुपालन में इस तरह की हीलाहवाली और आनाकानी क्यों कर रहे हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट स्थिति बताई जाए कि आदेश के बावजूद समय पर जवाब क्यों नहीं भेजा गया।
इससे पूर्व 19 अगस्त की सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के इस रवैये को अदालत की अवमानना की श्रेणी का करार दिया था। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि हत्या जैसे जघन्य और गंभीर अपराधों में दाखिल जमानत अर्जियां केवल इसलिए लंबे समय तक लंबित रह जाती हैं, क्योंकि पुलिस अधिकारी समय पर अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करते और जवाबी हलफनामा दाखिल करने में अत्यधिक लापरवाही बरतते हैं।
जून 2025 से जेल में बंद है अभियुक्त
याचिकाकर्ता पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की ओर से अधिवक्ता शाल्विन ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि पुष्पराज के खिलाफ महोबा जिले के श्रीनगर थाने में वर्ष 2025 में हत्या की धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और वह 23 जून 2025 से लगातार जेल में निरुद्ध है। पुलिस द्वारा समय पर जवाब दाखिल न किए जाने के कारण जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय में अनावश्यक विलंब हो रहा है। अदालत द्वारा डीजीपी और महाधिवक्ता को तलब किए जाने के बाद पुलिस व प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।