LPG को छोड़ अब इस गैस की ओर दौड़ रहे लोग! जुलाई के आंकड़ों ने सबको चौंकाया

Published on 2 अग॰ 2026

Aug 03, 2026 12:20 am ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

Follow us on Google News

share

मुख्य बातें

  • भारत में जुलाई के दौरान फ्यूल की डिमांड का ट्रेंड बदलता नजर आया
  • पेट्रोल और डीजल की बिक्री में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एलपीजी (LPG) की डिमांड में बड़ी गिरावट आई
  • उद्योगों और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर के कई उपभोक्ता अब PNG की ओर शिफ्ट हो रहे हैं
LPG sales decline 24pc

पेट्रोल-डीजल और LPG की खपत को लेकर आया बड़ा अपडेट।

भारत में फ्यूल की खपत का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। जुलाई महीने में जहां पेट्रोल और डीजल की डिमांड में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली, वहीं एलपीजी (LPG) की बिक्री में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि होटल, रेस्टोरेंट और कई औद्योगिक उपभोक्ता अब एलपीजी की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को प्राथमिकता देने लगे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि देश में स्वच्छ और लगातार उपलब्ध गैस की ओर झुकाव बढ़ रहा है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

देश की तीन सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की संयुक्त पेट्रोल बिक्री जुलाई में 9.7% बढ़कर 34.5 लाख टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 31.4 लाख टन थी। हालांकि, जून के मुकाबले इसमें 1.1% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर डीजल की डिमांड में भी 10.7% की मजबूत बढ़ोतरी हुई और बिक्री 71.2 लाख टन तक पहुंच गई। डीजल को देश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख संकेतक माना जाता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, कृषि मशीनों और सिंचाई पंपों में बड़े पैमाने पर होता है।

एक्सपर्ट के अनुसार इस बार मानसून देर से आने के कारण किसानों को बुवाई के दौरान डीजल से चलने वाले पंपों का अधिक इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे डीजल की मांग बढ़ गई। आमतौर पर बारिश के मौसम में ईंधन की खपत घटती है, लेकिन इस बार कृषि जरूरतों ने मांग को सहारा दिया। वहीं जून की तुलना में जुलाई में डीजल बिक्री 9.2% कम रही, क्योंकि जून में छुट्टियों के दौरान सड़क यात्रा अधिक होती है।

हवाई यात्रा से जुड़ा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) भी जुलाई में 2.9% बढ़कर करीब 6.60 लाख टन पहुंच गया। हालांकि जून की तुलना में इसकी बिक्री 4.6% कम रही, लेकिन सालाना आधार पर इसमें अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जो लगातार बढ़ रही हवाई यात्राओं का संकेत देती है।

सबसे बड़ा बदलाव एलपीजी की मांग में देखने को मिला। जुलाई में एलपीजी की बिक्री 17.4% घटकर 23.7 लाख टन रह गई। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान सप्लाई प्रभावित होने के बाद कई होटल, रेस्टोरेंट और औद्योगिक उपभोक्ताओं ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। अब सप्लाई सामान्य होने के बावजूद इनमें से कई उपभोक्ता एलपीजी पर लौटने के बजाय PNG का ही इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले समय में व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में पाइप्ड गैस का उपयोग और बढ़ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो एलपीजी की मांग पर दबाव बना रह सकता है, जबकि पेट्रोल और डीजल की खपत देश की आर्थिक गतिविधियों और कृषि जरूरतों के अनुसार आगे भी मजबूत बनी रह सकती है।