सितंबर के बाद LADCS में नई नियुक्तियां नहीं: सीजेआई की घोषणा के बाद पंजाब में वकीलों की 28 दिन लंबी हड़ताल ख़त्म, कल से अदालतों में लौटेंगे वकील - Ludhiana News

Published on 3 अग॰ 2026

लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (एलएडीसीएस) को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल को राहत मिली है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने घोषणा की है कि सितंबर 2026 के बाद लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADCS) में नई

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इसके चलते पंजाब में 28 दिन से चल रही वकीलों की हड़ताल खत्म हो गई। अब वकील मंगलवार से काम पर लौटेंगे। इसको लेकर जिले के बार एसोशिएशनों नें खुशी जताई गई।

यह फैसला सोमवार को उस समय सामने आया, जब पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के नेतृत्व में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के बार नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ से मुलाकात की।

बार एसोसिएशन ने रखी वकीलों की चिंताएं

बैठक के दौरान बार काउंसिल और विभिन्न बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने मौजूदा एलएडीसीएस व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था का स्वतंत्र रूप से वकालत करने वाले अधिवक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने पहले पारित प्रस्तावों का हवाला देते हुए योजना की समीक्षा और पुनर्गठन की मांग की।

मुख्य न्यायाधीश ने दिया आश्वासन

चंडीगढ़ बार काउंसिल के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और उनकी चिंताओं पर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सितंबर 2026 के बाद एलएडीसीएस में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी। नई व्यवस्था लागू होने तक कानूनी सहायता से जुड़े मामलों का आवंटन जिला एवं सत्र न्यायाधीश संबंधित बार एसोसिएशन और पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल से परामर्श कर करेंगे।

नई योजना बनाने के संकेत

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी संकेत दिए कि सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद नई योजना तैयार की जाएगी। इसमें एक ओर आम लोगों को प्रभावी और सुलभ कानूनी सहायता सुनिश्चित की जाएगी, वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं के हितों और वकालत पेशे की स्वतंत्रता का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।

पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे वकीलों के हित में सकारात्मक कदम बताया। काउंसिल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, विभिन्न बार एसोसिएशनों और उन सभी अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया, जिनके संयुक्त प्रयासों से यह निर्णय संभव हो सका।

बार काउंसिल ने कहा कि वह भविष्य में भी सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर ऐसी कानूनी सहायता व्यवस्था बनाने के लिए काम करेगी, जिससे आम लोगों को न्याय आसानी से मिले और वकालत पेशे की गरिमा, स्वतंत्रता तथा स्थायित्व भी सुरक्षित रहे।

लुधियाना में वकीलों न मनाया जश्न

जिला बार एसोसिएशन (लुधियाना) ने इस फैसले पर खुशी जताई और कहा कि वकीलों के इस एकजुट संघर्ष के आगे सरकार को सकारात्मक रुख अपनाना पड़ा है। मंगलवार से अदालतों में कामकाज पूरी तरह बहाल हो जाएगा, जिससे तारीखों का इंतजार कर रहे आम लोगों को एक बहुत बड़ी राहत मिलेगी।

दिल्ली में हुई निर्णायक बैठक

वकीलों ने कहा कि केंद्रीय कानून मंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के साथ वकीलों के प्रतिनिधिमंडल की अहम बैठक सफल रही। सरकार ने वकीलों की प्रमुख मांगों पर सहमति जता दी है। सरकार इस बात पर राजी हो गई है कि 30 सितंबर के बाद वर्तमान LADC पैनल का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। वकीलों के सुझावों के आधार पर या तो मौजूदा LADC नीति में व्यापक बदलाव किए जाएंगे या फिर एक नई नीति तैयार की जाएगी (हालांकि, अभी सरकार के लिखित आदेश का इंतजार है)।

विपन सगड़ CJI से मिले

विपन सगड़ CJI से मिले

मंगलवार से काम पर लौटेंगे वकील: न्यायिक कार्य की पूरी तरह से बहाली होगी। वकील नियमित रूप से अदालतों में पैरवी करेंगे आगे की औपचारिक रणनीति तय करने के लिए मंगलवार दोपहर 12:30 बजे बार एसोसिएशन की बैठक होगी, जिसमें संयुक्त एक्शन कमेटी के फैसलों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

नोटिस वाले वकीलों पर फिलहाल राहत: जिन वकीलों (जो LADC के रूप में काम कर रहे थे) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, उन पर कोई भी कार्रवाई अब सरकार के लिखित आदेश और एक्शन कमेटी के अगले फैसले के बाद ही होगी।

ख़ुशी मानते हुए वकील

ख़ुशी मानते हुए वकील

एकजुटता की जीत: जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट विपन सग्गड़ और महासचिव एडवोकेट हिमांशु वालिया ने इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय वकीलों की अटूट एकजुटता और शांतिपूर्ण संघर्ष को दिया है। पिछले एक महीने से चल रही भूख हड़ताल और धरने ने सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर झुकने के लिए मजबूर कर दिया।