Kids Healthy Diet Plan : बच्चों की सेहत के लिए क्यों जरूरी हैं फल-सब्जियां? जानिए उम्र के हिसाब से सही मात्रा और आसान टिप्स

Published on 11 अग॰ 2026

बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उनकी डाइट में सही मात्रा में फल और सब्जियों का होना बेहद जरूरी है। उम्र के अनुसार सही पोषण देकर और खाने की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके बच्चों को बचपन से ही हेल्दी बनाया जा सकता है।

Kids Healthy Diet Plan : बचपन में सीखी गई खाने की आदतें जिंदगी भर साथ निभाती हैं। अक्सर माता-पिता इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा सही मात्रा में पोषण ले रहा है या नहीं।

छोटे बच्चों के बेहतर शारीरिक विकास और दिमाग की तंदुरुस्ती के लिए फल और हरी सब्जियां सबसे अहम भूमिका निभाती हैं।

अगर शुरुआत से ही बच्चों की थाली में अलग-अलग रंग के फल और सब्जियां शामिल की जाएं, तो उनमें खाने को लेकर रुचि अपने आप बढ़ने लगती है।

उम्र के हिसाब से कितनी होनी चाहिए फल-सब्जियों की मात्रा?

हर उम्र में बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें बदलती हैं। शारीरिक गतिविधि और उम्र के अनुसार उनकी थाली में सही संतुलन होना जरूरी है:

12 से 23 महीने (1 से 2 साल): इस उम्र के बच्चों को रोजाना लगभग 1 सर्विंग (75-100 ग्राम) फल और करीब पौन कप (सवा सर्विंग) पकी हुई या कटी सब्जियां देनी चाहिए।

2 से 4 साल: इस उम्र में बच्चों को दिनभर में 1 से डेढ़ कप कटे हुए फल और लगभग सवा से पौने दो कप सब्जियों की जरूरत होती है।

थाली को बनाएं ‘रेनबो प्लेट’

बच्चों को खाना दिखने में जितना आकर्षक लगेगा, वे उसे उतनी ही खुशी से खाएंगे। उनकी थाली में अलग-अलग रंगों की चीजें शामिल करें:

सब्जियां: गाजर, मटर, पालक, शकरकंद और चुकंदर।

फल: केला, स्ट्रॉबेरी, नाशपाती, संतरा, खरबूजा और एवोकाडो।

ध्यान रखें कि सिर्फ फल-सब्जियां ही काफी नहीं हैं। बच्चे की ग्रोथ के लिए थाली में प्रोटीन, डेयरी उत्पाद और साबुत अनाज का होना भी उतना ही जरूरी है।

किस उम्र में शुरू करें ठोस आहार?

जब बच्चा 6 महीने का हो जाए, तब मां के दूध या फॉर्मूला मिल्क के साथ ऊपरी आहार (कॉम्प्लिमेंटरी फूड) देना शुरू कर देना चाहिए। 7 से 8 महीने का होते-होते बच्चा अलग-अलग स्वाद पहचानने लगता है।

2 साल की उम्र तक आते-आते बच्चा परिवार के साथ बैठकर सामान्य खाना खाने के लायक हो जाता है, बस ध्यान रखें कि खाना उसके लिए चबाने में आसान और सुरक्षित हो।

बच्चा खाने में नखरे करे तो क्या करें?

इस उम्र में बच्चों का खाने को लेकर नखरा करना बिल्कुल सामान्य है। हो सकता है जो चीज उसने कल पसंद से खाई हो, आज उसे खाने से मना कर दे।

किसी नए स्वाद को अपनाने में बच्चे को 8 से 10 बार तक का समय लग सकता है।

अगर बच्चा पहली बार में कोई सब्जी ना खाए, तो जबरदस्ती करने के बजाय कुछ दिनों बाद उसे नए तरीके से बनाकर दें।

फलों और सब्जियों को छोटे-छोटे, सुरक्षित टुकड़ों में काटकर पहले से एयरटाइट डिब्बे में रख लें ताकि भूख लगने पर उन्हें तुरंत दिया जा सके।

पीने की चीजों पर भी दें ध्यान

6 से 12 महीने के बच्चों को थोड़ी मात्रा में पानी दिया जा सकता है। 12 महीने के बाद डॉक्टर की सलाह से पाश्चराइज्ड गाय का दूध या फोर्टिफाइड डेयरी उत्पाद दिए जा सकते हैं।

बच्चों को डिब्बाबंद जूस या ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक्स से दूर रखें और सादा पानी पीने की आदत डालें।

खुद बनें रोल मॉडल

बच्चे हिदायतों से ज्यादा अपने आसपास के माहौल से सीखते हैं। अगर घर के बड़े खुद अपनी डाइट में फल, सब्जियां और पौष्टिक खाना शामिल करेंगे, तो बच्चे बिना किसी दबाव के अपने आप उन आदतों को अपना लेंगे।