
अपने दादा के साथ प्रभात यादव
NEET UG 2026: MBBS में एडमिशन के लिए काउंसलिंग प्रोसेस जारी है. इस बीच MBBS की आधे से अधिक सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो गई है. इस एडमिशन प्रोसेस के साथ ही स्टूडेंट्स व उनके पैरेंट्स के संघर्ष, त्याग, मेहनत और सफलता की कहानी भी सामने आ रही है. संघर्ष, त्याग, मेहनत और सफलता की एक ऐसी ही कहानी जौनपुर के प्रभात यादव की भी है, जिनके पिता ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना देखा. इसके लिए प्रभात के पिता ने घर से दूर 20 साल तक मुंबई में रहकर ऑटो चलाया. मुंबई के चाॅल में जीवन बिताया. अब प्रभात ने अपनी मेहनत से NEET UG पास कर लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) में MBBS में एडमिशन लिया है.
आइए, प्रभात यादव की सक्सेस स्टोरी के बारे में विस्तार से जानते हैं. जानते हैं कि प्रभात यादव ने कैसे और कितने प्रयासों के बाद NEET UG में सफलता प्राप्त की है. जानेंगे कि वह जौनपुर में कहां के रहने वाले हैं. NEET UG में उनकी कितनी रैंक है.
दादा ने नाचकर पोते की उपलब्धि पर जताया जश्न
NEET UG में सफलता के बाद प्रभात यादव ने KGMU लखनऊ में MBBS में एडमिशन ले लिया है.बेटे की इस सफलता की खबर मिलते ही पिता महेंद्र कुमार यादव भावुक हो गए. वहीं, प्रभात के दादा इन्द्र बहादुर यादव भी पोते की सफलता से बेहद खुश हैं. उन्होंने पोते की उपलब्धि पर नाचकर जश्न मनाया है. उनका कहना है कि प्रभात ने अपने पिता की मेहनत और त्याग को अपनी सफलता से सम्मान दिया है. वहीं इस उपलब्धि पर प्रभात का कहना है कि परिजनों की मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन से वह ये सफलता प्राप्त कर सके हैं. उन्होंने कहा कि वह एक अच्छा डाॅक्टर बनकर गांव व समाज की सेवा करना चाहते हैं.
मछली तहसील के निवासी हैं प्रभात, NEET में मिली 3864 रैंक
प्रभात यादव उत्तरप्रदेश के जौनपुर जिले में मछली तहसील के देवकीपुर गांव के निवासी हैं. प्रभात कुमार यादव ने नीट यूजी 2026 में ऑल इंडिया रैंक 3864 हासिल कर KGMU के लखनऊ कैम्पस में एडमिशन लिया है. प्रभात ने कोटा में एक प्राइवेट कोचिंग संस्थान में रहकर पढ़ाई की है.इससे पूर्व प्रभात ने 10वीं में 89.44 फीसदी और 12वीं में 83.44 फीसदी नंबर हासिल किए थे.
वहीं प्रभात की इस उपलब्धि पर निजी कोचिंग संस्थान के फाउंडर डाॅ. नवीन माहेश्वरी ने कहा कि कोटा बच्चों के सपने पूरे कर रहा है. उनकी प्रतिभा को सम्मान देते हुए आगे बढ़ा रहा है, ये बच्चे परिवार ही नहीं समाज और देश के लिए प्रेरणा बन रहे हैं.
पिता मुंबई की चॉल में रहते हैं, परिवार गांव में रहता है
प्रभात और उसके दादा इन्द्र बहादुर यादव, मां बंशराजी एवं भाई-बहिनों सहित पूरा परिवार गांव रहता है, जबकि प्रभात के पिता महेंद्र कुमार यादव पिछले करीब 20 वर्षों से अपने परिवार से दूर रहकर मुंबई में ऑटो रिक्शा चलाते हैं. वे मुंबई में एक छोटी सी चॉल में रहकर मेहनत करते हुए परिवार की जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं.
दूसरे प्रयास में मिली सफलता, EMI और मामा की मदद से भरी फीस
प्रभात पहले अपने गांव में रहकर पढ़ाई करते थे. डॉक्टर बनने के लक्ष्य को लेकर उन्होंगे करीब दो वर्षों तक गांव में रहकर ही नीट की तैयारी की. इसके बाद वह बेहतर तैयारी के लिए कोटा आ गए. कोचिंग संस्थान ने उन्हें फीस में कुछ छूट दी, लेकिन फीस के लिए बाकी पैसे जुटाना भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण था. कुछ फीस पिता ने EMI के माध्यम से भरी. तो कुछ मदद प्रभात के मामा दयाराम यादव ने की. वहीं प्रभात ने मेहनत और लगन से नीट की तैयारी की. प्रभात ने अपने पहले प्रयास में 504 नंबर हासिल किए थे. इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी को और मजबूत किया और नीट यूजी 2026 में 627 नंबर हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 3864 प्राप्त की.
प्रभात की सफलता पर आस-पास के गांवों में भी खुशी
प्रभात की इस सफलता से देवकीपुर गांव के साथ-साथ आसपास के करीब चार गांवों में भी खुशी का माहौल है. प्रभात की सफलता पर ग्रामीणों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभात ने जिस तरह नीट में सफलता हासिल की है, वह क्षेत्र के अन्य स्टूडेंट्स के लिए भी प्रेरणादायक है. प्रभात की इस उपलब्धि पर ग्रामीण, रिश्तेदार और क्षेत्रवासी परिवार को लगातार बधाइयां दे रहे हैं.

मनोज भट्ट
पत्रकारिता में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. नवोदय टाइम्स, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान में लंबे समय तक फील्ड रिपोर्टिंग. कई मुद्दों व खबरों को लीड किया, जो चर्चा में रही. अभी तक पंचायत, कृषि, प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा, राजनीति, पर्यावरण, स्वास्थ्य, चुनाव, बिजनेस से जुड़े विषयों पर काम किया है और इनमें लेखन की दिलचस्पी है.
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