Kanpur Bikru Case: मौत के 6 साल बाद भी जिंदा है बिकरू कांड का मुख्य आरोपी विकास दुबे! STF ने किया था ढेर - Haribhoomi

Published on 20 जुल॰ 2026

कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड का मुख्य सूत्रधार और दुर्दांत अपराधी विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के 6 साल बाद भी सरकारी कागजों में आज तक 'जिंदा' है। पोस्टमार्टम हाउस की एक लिपिकीय त्रुटि के कारण आज तक उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है।

Kanpur Bikru Case Vikas Dubey

विकास दुबे ( फाइल फोटो )

  • Published: 20 Jul 2026, 05:54 PM IST
  • Last Updated: 20 Jul 2026, 05:54 PM IST

उत्तर प्रदेश के कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या करने वाला और बाद में एसटीएफ के हाथों एनकाउंटर में ढेर हुआ बिकरू गांव का कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे अपनी मौत के 6 साल बीत जाने के बाद भी सरकारी फाइलों में आज तक जिंदा है। क्योंकि स्वास्थ्य और राजस्व विभाग आज तक उसका आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं कर पाए हैं।

इस देरी के पीछे पोस्टमार्टम हाउस से जारी की गई उसकी बॉडी डिस्पोजल स्लिप में अक्षरों का एक बड़ा हेरफेर है, जिसके तहत विकास दुबे के असली पिता 'रामकुमार दुबे' के स्थान पर गलती से 'राजकुमार दुबे' अंकित कर दिया गया था। जब पीड़ित परिजनों ने मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया, तो नगर निगम और संबंधित जिम्मेदारों ने पिता का नाम गलत लिखे होने का तकनीकी हवाला देकर इसे बनाने से साफ इन्कार कर दिया और मामला फाइलों में दफन होकर रह गया।

बॉडी डिस्पोजल स्लिप में गलत लिखा पिता का नाम; पत्नी ऋचा दुबे पहुंचीं हाई कोर्ट
विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए जो शव के साथ बॉडी डिस्पोजल स्लिप सौंपी गई थी, उसमें हुई इस बड़ी लापरवाही के कारण गैंगस्टर का परिवार पिछले छह सालों से लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने इस विसंगति को सुधारने के लिए जिलाधिकारी की चौखट से लेकर लखनऊ के प्रशासनिक गलियारों तक कई बार लिखित गुहार लगाई।

यहाँ तक कि मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने मुख्यमंत्री से सपरिवार इच्छामृत्यु तक की मांग कर डाली थी, लेकिन जब प्रशासन के स्तर पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने अंततः उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ माननीय हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर दी। कोर्ट में इस मामले की औपचारिक सुनवाई होने से ठीक पहले, अब प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है और पोस्टमार्टम प्रभारी चिकित्साधिकारी ने इस तकनीकी भूल को सुधारने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

इस पूरे घटनाक्रम ने साल 2020 के उस खौफनाक मंजर की यादें ताजा कर दी हैं, जब 2 जुलाई 2020 की देर रात चौबेपुर के बिकरू गांव में दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने छतों से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस कायराना हमले में बिल्हौर के तत्कालीन सीओ देवेंद्र मिश्रा, शिवराजपुर थानाध्यक्ष महेश चंद यादव समेत 8 जांबाज पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

इसके बाद, 9 जुलाई 2020 को विकास दुबे को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से गिरफ्तार किया गया था और 10 जुलाई को कानपुर लाते समय सचेंडी थाना क्षेत्र में एसटीएफ की गाड़ी पलटने के बाद भागने की कोशिश के दौरान उसे मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया था।