जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) स्टूडेंट्स को “डेप्रिवेशन पॉइंट्स” के आधार पर एडमिशन दे सकेगा. दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को JNU को इस संबंध में मंजूरी दी है. असल में 14 अगस्त को जारी किए गए एक अंतरिम आदेश में जस्टिस जसमीत सिंह ने JNU को डेप्रिवेशन पॉइंट्स पॉलिसी के आधार पर स्टूडेंट्स को एडमिशन देने से रोक दिया था. उन्होंने अपने आदेश में कहा था कि JNU ने डेप्रिवेशन पॉइंट्स के जरिए JNU ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) में स्टूडेंट्स को मिले मार्क्स में बदलाव किया है. इस आदेश में मंगलवार को हुई सुनवाई में बदलाव किया गया है, जिसके बाद JNU डेप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर स्टूडेंट्स को एडमिशन दे सकेगा.
आइए, विस्तार से पूरा मामला जानते हैं. जानते हैं कि डेप्रिवेशन पॉइंट्स क्या है और JNU कैसे डेप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर एडमिशन देता है. इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं.
JNU इन स्टूडेंट्स देता है डेप्रिवेशन पॉइंट्स
JNU एडमिशन के समय स्टूडेंट्स कोडेप्रिवेशन पॉइंट्स देता है, जो CUET नंबरों से अलग होते हैं. डेप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर स्टूडेंट्स की एडमिशन मेरिट तैयार होती है. हालांकि एडमिशन के लिए प्रत्येक स्टूडेंट को डेप्रिवेशन पॉइंट्स नहीं दिए जाते हैं. JNU के मुताबिक डेप्रिवेशन पॉइंट्स देना देश के अलग-अलग इलाकों से काफी संख्या में स्टूडेंट्स को एडमिशन देने की उसकी पॉलिसी पर आधारित है, जो स्टूडेंट्स को उनकी पिछली स्कूलिंग की ज्योग्राफिकल लोकेशन के आधार पर दिए जाते हैं.
JNU स्टूडेंट्स को 12 डेप्रिवेशन पॉइंट्स देता है
असल में JNU ने एकेडमिक सेशन 2026-27 प्रॉस्पेक्टस में स्टूडेंट्स को एडमिशन के लिए 12 डेप्रिवेशन पॉइंट्स देने का प्रावधान किया है, जिसके तहत प्रत्येक डेप्रिवेशन पॉइंट के बदले 3 मार्क्स दिए जाते हैं. इस तरह स्टूडेंट्स को एडमिशन के लिए 36 एक्स्ट्रा मार्क्स मिल सकते हैं.
क्यों लगाई गई थी रोक
जस्टिस सिंह ने बीते दिनों अंतरिम आदेश में डेप्रिवेशन पॉइंट्स पर रोक लगा दी थी. अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि अगर इसकी इजाज़त दी गई, तो एंट्रेंस एग्जाम की पवित्रता नहीं रहेगी और यूनिवर्सिटी ऑर्डिनेंस के जरिए किसी कैंडिडेट के कॉम्पिटिटिव एग्जाम में मिले स्कोर को बदल सकेगी. यह कॉम्पिटिटिव एग्जाम के पूरे कॉन्सेप्ट के बिल्कुल उल्टा है.
JNU ने दायर की थी अपील
JNU ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी. JNU की अपील को मंजूरी देते हुए, चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि JNU में डेप्रिवेशन पॉइंट देने की पॉलिसी 1974 से चली आ रही है और सिंगल जज के ऑर्डर की वजह से पूरा एडमिशन प्रोसेस रुक गया है.डिवीजन बेंच ने आदेश दिया कि इसके हिसाब से, यूनिवर्सिटी ई-प्रॉस्पेक्टस में दिए गए प्रोविजन के हिसाब से एडमिशन प्रोसेस जारी रखेगी, जिसमें वे प्रोविजन भी शामिल हैं, जिन्हें सिंगल जज के सामने चुनौती दी गई है. हालांकि, इसके बाद किया गया कोई भी एडमिशन रिट पिटीशन के नतीजे पर निर्भर करेगा.कोर्ट ने सिंगल जज से यह भी रिक्वेस्ट की कि वे कार्रवाई में तेजी लाएं और इसे जल्द से जल्द खत्म करें.
JNU ने पॉलिसी का बचाव करते हुए कहा कि डेप्रिवेशन पॉइंट्स स्टूडेंट्स का सही रिप्रेजेंटेशन पक्का करने की उसकी पॉलिसी पर आधारित थे, जो JNU एक्ट, 1966 के प्रोविजन पर निर्भर थे. यूनिवर्सिटी ने कोर्ट को यह भी बताया कि एकेडमिक काउंसिल ने सोच-विचार के बाद डेप्रिवेशन पॉइंट्स देने पर विचार किया और मंज़ूरी दी.

जीतेन्द्र भाटी
करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.
Read More