Ranchi: राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जल संरक्षण और मृदा संरक्षण अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए. मंत्री जेएमटीटीसी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुई. कार्यशाला का आयोजन भूमि संरक्षण निदेशालय ने किया.
योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं
मंत्री ने भूमि संरक्षण योजनाओं की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि योजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए. सभी योजनाओं को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया. उन्होंने तालाब, पर्कोलेशन टैंक, डीप बोरिंग और BPCD के काम में तेजी लाने को कहा. पिछले वर्ष की देनदारियों का भुगतान अगस्त के अंत तक करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि काम पूरा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे.
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SMAM में 100 प्रतिशत लक्ष्य का निर्देश
कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन यानी SMAM की भी समीक्षा हुई. मंत्री ने इस वर्ष 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि लक्ष्य पूरा करने के लिए अभी से कार्ययोजना बनाएं. पिछले वर्ष के पात्र आवेदनों पर भी विचार करने को कहा. केवल स्वीकृति नहीं मिलने के कारण पुराने आवेदनों को खारिज नहीं करने का निर्देश दिया.
तालाब जीर्णोद्धार में जनप्रतिनिधियों से समन्वय
तालाब जीर्णोद्धार योजना पर भी चर्चा हुई. मंत्री ने पिछले वर्ष की अनुशंसाओं को शामिल करने को कहा. किसी अनुशंसा को लेकर भ्रम होने पर संबंधित विधायक से संपर्क करने का निर्देश दिया.15 अगस्त के बाद सभी जिलों में कार्यशाला आयोजित करने को कहा. इसमें जिला परिषद सदस्य, प्रमुख, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे.
योजनाओं का होगा Social Impact Study
मंत्री ने पिछले पांच वर्षों में पूरी हुई योजनाओं का Social Impact Study कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि योजना की सफलता केवल निर्माण से तय नहीं होगी. यह देखना होगा कि किसानों और ग्रामीणों को कितना फायदा हुआ. कृषक मित्र और VLW के माध्यम से लाभुक समितियों से संवाद करने को कहा गया. योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी लेने का निर्देश दिया.
वेबसाइट पर दर्ज होगा पूरा डाटा
मंत्री ने भूमि संरक्षण निदेशालय को अहम निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में किए गए सभी कार्यों का पूरा डाटा वेबसाइट पर दर्ज किया जाए. डाटा को अपडेट रखने को कहा गया. इससे योजनाओं की जानकारी आम लोगों को मिल सकेगी. पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी.
डैशबोर्ड से होगी योजनाओं की निगरानी
भूमि संरक्षण योजनाओं की निगरानी के लिए राज्य स्तरीय डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा. हर योजना का विवरण दर्ज होगा. योजनाओं की जियो-टैगिंग भी की जाएगी. जियो-टैग्ड तस्वीरों के जरिए काम की निगरानी होगी. इससे योजनाओं की प्रगति की वास्तविक स्थिति सामने आएगी.
सामूहिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
मंत्री ने जल संरचनाओं के आसपास Group Farming को बढ़ावा देने की बात कही. उन्होंने कहा कि इससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा. जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादन भी बढ़ेगा. किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
कृषि उपकरणों की सूची की होगी समीक्षा
मंत्री ने सभी जिलों को कृषि उपकरणों की सूची की समीक्षा करने को कहा. स्थानीय जरूरत के अनुसार नए उपकरण शामिल किए जाएंगे. अनुपयोगी उपकरणों को हटाने पर भी सुझाव मांगे गए हैं.
BPCD की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी करने का निर्देश
बिरसा पक्का चेक डैम (BPCD) को लेकर भी समय-सीमा तय की गई. मंत्री ने अगले 15 दिनों में स्थल चयन पूरा करने को कहा. प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी. इसके बाद प्रस्ताव निदेशालय को भेजना होगा.
जिलों से मांगा गया श्वेत पत्र
कार्यशाला के अंत में सभी जिलों को सुझाव देने का निर्देश दिया गया. जिलों को लिखित रूप में अनुशंसाएं देनी होंगी. इसके लिए श्वेत पत्र (White Paper) तैयार किया जाएगा. इसमें भूमि संरक्षण योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के सुझाव शामिल होंगे.
तीन महिला समूहों को मिला ट्रैक्टर
कार्यशाला के दौरान तीन महिला लाभुक समूहों को ट्रैक्टर दिए गए. मंत्री ने कहा कि कृषि यंत्रीकरण से महिला समूह मजबूत होंगे. किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. कार्यक्रम में विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीक, भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार सहित विभाग के कई वरीय अधिकारी और पदाधिकारी मौजूद रहे.
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