ग्वालियर की सड़कों का 'ऑपरेशन एक्स-रे', हाई कोर्ट टीम ने JCB से खोदी आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे की परतें

Published on 4 सित॰ 2026

Gwalior News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बार-बार सड़क धंसने और जल्द खराब होने के मामले में ग्वालियर हाई कोर्ट की जांच अब सड़क की ऊपरी सतह से नीचे तक पहुंच गई है. सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता और तय मानकों की जांच के लिए हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय विशेष टीम ने आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर सड़क की खुदाई कर सैंपल लिए हैं. टीम ने मेहरा टोल प्लाजा से सिकरौदा चौराहे के बीच जेसीबी की मदद से सड़क की अलग-अलग परतों को खोदा. ऊपरी डामर की परत हटाने के बाद नीचे मौजूद गिट्टी और बेस मटेरियल के नमूने लिए गए. इन नमूनों को अब प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा.

ऊपर से नहीं, सड़क के अंदर तक जांच

ग्वालियर हाई कोर्ट की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सड़क निर्माण के दौरान जिन तकनीकी मानकों और गुणवत्ता का दावा किया गया था, क्या जमीन के नीचे भी सड़क उसी मानक के मुताबिक बनाई गई है. सड़क की अलग-अलग परतों से लिए गए सैंपल में डामर की मात्रा, गिट्टी की गुणवत्ता, कॉम्पैक्शन और परतों की मजबूती जैसे तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सड़क निर्माण में कहीं गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया. खास बात यह है कि जिस सड़क की जांच की जा रही है, वह नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI के अधीन आती है. हाई कोर्ट के निर्देश पर हाईवे को मौके पर खुदवाकर सैंपल लेना जांच की गंभीरता को दर्शाता है.

ये भी पढ़ें- न तैरना आता था, न सरकारी मदद फिर भी अकेले साफ कर डाली गंदी नदी, बिट्टू तबाही की कहानी

एक साल में 12 से ज्यादा सड़कें धंसीं

दरअसल, ग्वालियर में पिछले करीब एक साल में 12 से ज्यादा सड़कों के धंसने और कई सड़कों के कम समय में खराब होने के मामले सामने आए थे. इसके बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे. इसी मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केवल सरकारी विभागों की रिपोर्ट के आधार पर मामला खत्म करने के बजाय स्वतंत्र और तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए. इसके बाद चार सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया गया. टीम ने ग्वालियर शहर की कई प्रमुख सड़कों का निरीक्षण भी किया.

कई सड़कों से लिए जा चुके हैं सैंपल

जांच के दौरान विक्की फैक्ट्री से झांसी रोड, चेतकपुरी-सिंधिया महल गेट और चेतकपुरी से एजी ऑफिस पुल मार्ग समेत कई प्रमुख सड़कों को देखा गया. बीते 19 अगस्त को गुढ़ी-गुढ़ा नाका और बेटी बचाओ चौराहे से भी सड़क के कोर सैंपल लिए गए थे. इन सैंपल के जरिए सड़क की अंदरूनी परतों की गुणवत्ता और मजबूती की जांच की जा रही है. अब इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नेशनल हाईवे की सड़क को भी खोदकर उसके अंदर इस्तेमाल किए गए मटेरियल के नमूने लिए गए हैं.

ये भी पढ़ें- नर्मदा में पेट्रोलिंग बोट का इंजन हुआ बंद, तेज बहाव में डूबी नाव; सवार थे 15 लोग- Video

पहले हाईटेक स्कैनिंग, अब सड़क की खुदाई

हाई कोर्ट की जांच टीम सिर्फ सड़क का निरीक्षण करके वापस नहीं लौट रही है. इससे पहले आधुनिक उपकरणों और लेजर कैमरों की मदद से सड़कों की हाईटेक स्कैनिंग की गई थी. स्कैनिंग के जरिए सड़कों की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया. अब सड़क की परतों को वास्तविक रूप से खोलकर सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है. यानी जांच अब सड़क की सतह से नीचे उसकी नींव तक पहुंच गई है.

अचानक चुनी जाती है जांच वाली सड़क

जांच प्रक्रिया में इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि संबंधित निर्माण एजेंसी को पहले से किसी तरह की जानकारी न मिले. बताया गया है कि सैंपलिंग के लिए सड़क का चयन कुछ समय पहले किया जाता है, लेकिन जगह को सार्वजनिक नहीं किया जाता. इसका मकसद यह है कि जांच से पहले सड़क या उसके आसपास किसी तरह की तैयारी की गुंजाइश न रहे और टीम को वास्तविक स्थिति के नमूने मिल सकें.

लैब रिपोर्ट से तय होगी आगे की कार्रवाई

सड़क से लिए गए सैंपल की वैज्ञानिक जांच पीडब्ल्यूडी की केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला, ग्वालियर में की जाएगी. रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री तय मानकों के मुताबिक है या नहीं. अगर जांच में घटिया सामग्री या तकनीकी खामी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे कार्रवाई हो सकती है.

वहीं, अगर निर्माण सामग्री और तकनीकी मानक सही पाए जाते हैं तो सड़क धंसने के दूसरे संभावित कारणों की जांच की जाएगी. फिलहाल हाईवे की खुदाई ने ग्वालियर की सड़कों को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या सड़कें सिर्फ ऊपर से मजबूत थीं या उनकी नींव भी उतनी ही मजबूत थी? अब इसका जवाब हाईकोर्ट की जांच और लैब रिपोर्ट से सामने आएगा.

शिव चौबे

शिव चौबे

शिव चौबे को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक का अनुभव है. शिव ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत विषय में शिक्षा प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक अखबार से की. इसके बाद वर्ष 2019 में वे ETV भारत से बतौर संवाददाता जुड़े, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और शिक्षा से जुड़ी उनकी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जान जोखिम में डालकर जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की और व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया. उनकी रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े. वर्ष 2021 में शिव चौबे ने TV9 भारतवर्ष में जिला रिपोर्टर के रूप में नई भूमिका की शुरुआत की. इसके बाद वर्ष 2023 में वे PTI (Press Trust of India) से जुड़े. यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण खोजी रिपोर्टें कीं, जिनमें सिवनी जिले का चर्चित सर्पदंश घोटाला, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से जुड़ा गोबर घोटाला तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई घोटाले शामिल है. इसके अलावा उन्होंने CAA के दौरान लगे कर्फ्यू, बरगी क्रूज हादसे और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की जमीनी रिपोर्टिंग कर अपनी अलग पहचान बनाई. निष्पक्ष, जनसरोकारों से जुड़ी और खोजी पत्रकारिता के लिए शिव चौबे को विशेष रूप से जाना जाता है.

Read More

google button