जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर सिंजारा उत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि यहां चढ़ाई गई मेहंदी लगाने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। जानिए मंदिर का इतिहास और खास परंपराएं।
Jaipur Moti Dungri Ganesh Temple
- Published: 14 Sep 2026, 08:52 AM IST
- Last Updated: 14 Sep 2026, 08:52 AM IST
Jaipur Moti Dungri Ganesh Temple: राजस्थान की राजधानी जयपुर में भगवान गणेश का एक ऐसा मंदिर है, जहां गणेश चतुर्थी पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में इस दिन सिंजारा उत्सव मनाया जाता है और बप्पा को बड़ी मात्रा में मेहंदी अर्पित की जाती है। मान्यता है कि विवाह में बाधा का सामना कर रहे अविवाहित लोग इस मेहंदी को हाथों पर लगाते हैं, जिससे उनकी मनोकामना पूरी होती है। इसी खास परंपरा के कारण यह मंदिर जयपुर ही नहीं, देशभर के श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है।
Jaipur Moti Dungri Ganesh Temple: गणेश चतुर्थी पर क्यों चढ़ाई जाती है मेहंदी?
जयपुर के बीचों-बीच स्थित मोती डूंगरी गणेश मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां पूरे साल श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। खासतौर पर गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में अलग ही माहौल देखने को मिलता है।
गणेश चतुर्थी पर यहां सिंजारा उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान भक्त भगवान गणेश को मेहंदी अर्पित करते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, विवाह में बार-बार बाधा आ रही हो तो भक्त मेहंदी चढ़ाकर उसे अपने हाथों पर भी लगाते हैं। मान्यता है कि इससे विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर का इतिहास क्या है?
मोती डूंगरी गणेश मंदिर के इतिहास को लेकर एक प्रचलित कथा भी सामने आती है। बताया जाता है कि 1761 में दूरदर्शी सेठ जय राम पालीवाल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार, मेवाड़ के राजा लंबी यात्रा से लौट रहे थे। उनके साथ बैलगाड़ी में भगवान गणेश की एक विशाल प्रतिमा भी थी। राजा ने तय किया कि बैलगाड़ी जहां पहली बार रुक जाएगी, वहीं भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी।
कहा जाता है कि बैलगाड़ी मोती डूंगरी की पहाड़ियों की तलहटी में आकर रुक गई। इसके बाद इसी स्थान पर गणेश मंदिर की स्थापना की गई। आज यह मंदिर जयपुर की धार्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
किसी भी शुभ काम से पहले यहां आता है पहला निमंत्रण
मोती डूंगरी गणेश मंदिर का जयपुर के लोगों के बीच विशेष महत्व है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, घर में कोई शुभ कार्य हो तो सबसे पहले भगवान गणेश को निमंत्रण देने की परंपरा है।
शादी जैसे मांगलिक अवसरों पर भी लोग मंदिर पहुंचकर गणपति का आशीर्वाद लेते हैं। कई नवविवाहित जोड़े भी विवाह के बाद मंदिर जाकर भगवान गणेश के दर्शन करते हैं।
भक्तों में यह भी मान्यता है कि मोती डूंगरी गणेश जी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। हालांकि ये धार्मिक आस्थाएं और स्थानीय परंपराएं हैं, जिन्हें श्रद्धालु अपनी मान्यता के अनुसार मानते हैं।
गणेश चतुर्थी पर होता है सिंजारा उत्सव
मोती डूंगरी मंदिर की सबसे खास परंपराओं में सिंजारा उत्सव शामिल है। गणेश चतुर्थी के दिन बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचते हैं और भगवान गणेश को मेहंदी अर्पित करते हैं।
इस अवसर पर मंदिर में कई कुंतल मेहंदी चढ़ाए जाने की परंपरा बताई जाती है। इसके बाद श्रद्धालु इस मेहंदी को प्रसाद के रूप में अपने हाथों पर लगाते हैं।
खास तौर पर अविवाहित युवक-युवतियां विवाह की कामना लेकर इस परंपरा में शामिल होते हैं। मान्यता है कि बप्पा को चढ़ाई गई मेहंदी हाथों पर लगाने से विवाह में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं और जल्द शादी के योग बनते हैं।
हर बुधवार भी उमड़ती है भक्तों की भीड़
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिर्फ गणेश चतुर्थी के दिन ही नहीं, बल्कि पूरे साल श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में हर बुधवार मेले की परंपरा भी बताई जाती है। यही वजह है कि जयपुर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए मोती डूंगरी गणेश मंदिर एक खास धार्मिक स्थल बना हुआ है। मंदिर का इतिहास, गणेश जी के प्रति आस्था और सिंजारा उत्सव से जुड़ी मेहंदी की परंपरा इसे राजस्थान के दूसरे मंदिरों से अलग पहचान देती है।