आज का एक्सप्लेनर: बांग्लादेश चीन से J-10 लड़ाकू विमान खरीदेगा, कहा- 'इसने भारत के राफेल गिराए'; भारत को कैसे घेर रहे चीन-पाकिस्तान

Published on 28 अग॰ 2026

बांग्लादेश ने चीन से J-10CE फाइटर जेट खरीदने का ड्राफ्ट एग्रीमेंट तैयार कर लिया। ये एक सामान्य बात लगती है। लेकिन इसकी घोषणा करते हुए बांग्लादेशी मंत्री जाहिद उर रहमान ने जो दलील दी, वो भारत के लिए ज्यादा चिंताजनक है।

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रहमान ने कहा- ‘मई 2025 में भारत-पाकिस्तान की जंग के दौरान जिस चीनी J-10C ने भारत के राफेल मार गिराए, बांग्लादेश उसी जेट पर भरोसा जताने जा रहा है।’ हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल गिरने के दावों की आज तक पुष्टि नहीं हो सकी।

J-10C फाइटर जेट को लेकर क्या सौदा हुआ, चीन अब कैसे बांग्लादेश की मिलिट्री एडवांस बना रहा और बांग्लादेश का रुख भारत के लिए चिंताजनक क्यों है; आज के एक्सप्लेनर में इन्हीं सवालों के जवाब…

सवाल-1: बांग्लादेश और चीन के बीच J-10C को लेकर क्या सौदा हुआ है?

जवाब: अभी सौदा हुआ नहीं, सिर्फ मसौदा तैयार हुआ है। ड्राफ्ट एग्रीमेंट के मुताबिक…

  • बांग्लादेश, चीन से करीब 20 से 24 'J-10CE' फाइटर जेट खरीदेगा। पूरी डील करीब 2.2 अरब डॉलर यानी करीब 21 हजार करोड़ रुपए की है।
  • एक जेट की कीमत 62.7 मिलियन डॉलर, यानी करीब 595 करोड़ रुपए है। पायलट्स की ट्रेनिंग, पार्ट्स, मेंटेनेंस सपोर्ट वगैरह का खर्च जोड़कर बांग्लादेश को एक जेट 115 मिलियन डॉलर, यानी करीब 1092 करोड़ रुपए का पड़ेगा।
  • बांग्लादेश 2036 तक, यानी दस सालों में पूरी रकम चुकाएगा। हालांकि बांग्लादेश को जेट्स कब तक मिलेंगे, ये अभी साफ नहीं है।

इस डील के बाद बांग्लादेश, चीनी J-10CE खरीदने वाला दूसरा देश बन जाएगा। पहला पाकिस्तान है। चीनी वायुसेना भी एक सीट वाले मल्टीरोल कॉम्बैट जेट J-10C का इस्तेमाल करती है।

बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान के सलाहकार जाहिद उर रहमान ने बताया कि अगर 30 जून 2027 तक डील को बजट में मंजूरी मिल गई, तो खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इसी दौरान जाहिद रहमान ने कहा, ‘भारत और पाकिस्तान जंग में थे, तो भारत का राफेल फाइटर जेट चीन के J-10 ने गिराया था। ये अब साबित हो चुका है। बांग्लादेश ने राफेल के खिलाफ J-10 के परफॉरमेंस पर गौर किया है। चीनी फाइटर जेट, यूरोपियन एयरक्राफ्ट- यूरोफाइटर टाइफून और राफेल से सस्ते भी हैं।’

सवाल-2: क्या वाकई चीनी जेट ने भारत के राफेल मार गिराए थे?

जवाब: मई 2025 में पाक सेना प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ के दावे से इस बहस की शुरुआत हुई…

  • अहमद शरीफ ने कहा था, ‘पाकिस्तान ने भारत के तीन राफेल, एक सुखोई-30 और एक मिग-29 विमान को मार गिराया है। इनमें से कुछ पर चीन से मिली लॉन्ग रेंज की PL-15 मिसाइल्स से हमला हुआ था।’
  • कुछ विदेशी मीडिया में भी पाकिस्तान के सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें चलीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी बयान दिया कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष में 5 जेट गिरे थे। हालांकि उन्होंने विमान का नाम नहीं लिया।

भारत का रुख

  • भारत-पाक सीजफायर के दो दिन बाद, यानी 12 मई को एयर मार्शल एके भारती ने कहा था, ‘मैं अभी इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहूंगा, हम युद्ध की हालत में हैं। इसका उल्टा असर होगा।’
  • 30 मई को एक इंटरव्यू में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने भी न खंडन किया और न ही पुष्टि। उन्होंने कहा, ‘असली मुद्दा ये नहीं है कि कितने विमान गिरे, बल्कि ये है कि वे क्यों गिरे और हमने उनसे क्या सीखा। भारत ने अपनी गलतियों को पहचाना, उन्हें जल्दी सुधारा और फिर दो दिन में दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाकर प्रभावी तरीके से जवाब दिया।’
  • 29 जून को इंडोनेशिया के भारतीय दूतावास में कार्यरत भारतीय नेवी ऑफिसर कैप्टन शिव कुमार ने कहा, ‘मैं इस बात से सहमत हूं कि हमने कुछ विमान खो दिए और ऐसा पॉलिटिकल लीडरशिप द्वारा (पाकिस्तान के) सैन्य प्रतिष्ठानों और उनके एयर डिफेंस पर हमला न करने के निर्देश के चलते हुआ।

हालांकि 15 जून, 2026 को भारतीय वायुसेना के एक दस्तावेज से पता चला कि उसके पास मौजूद सभी 36 राफेल विमान सही-सलामत और ऑपरेशनल हैं। ये दस्तावेज राफेल के इंजन बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी 'सैफरान एयरक्राफ्ट इंजन्स' को राफेल के मेंटेनेंस के लिए भेजी गई रिक्वेस्ट का था।

सवाल-3: भारत के राफेल और चीन के J10 फाइटर जेट में कौन बेहतर?

जवाब: अभी दुनिया में 5 सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स हैं। जैसे- अमेरिका के F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग II, चीन के J-20 माइटी ड्रैगन और J-35A और रूस का सुखोई-57 फेलॉन। इन्हें 5th जनरेशन फाइटर जेट्स कहा जाता है।

राफेल और J-10 दोनों 4.5th जनरेशन के फाइटर जेट्स हैं।

भारतीय सेना के रिटायर्ड कैप्टन और एविएशन एक्सपर्ट अभिनय डोगरा कहते हैं, ‘जंग में राफेल, चीन के J-10C से कहीं बेहतर है। राफेल के स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और सेंसर चीन के मुकाबले बहुत मैच्योर और भरोसेमंद हैं। हालांकि J-10C की स्पीड कुछ ज्यादा है।’

ब्रिटेन के एयरपावर और मिलिट्री टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट जस्टिन ब्रॉन्क कहते हैं, ‘राफेल और J-10C की बियॉन्ड विजुअल रेंज, BVR यानी, हवा में दूर से ही होने वाली लड़ाई हो, तो राफेल हर मामले में J-10C से काफी आगे निकलेगा। J-10C का ईंधन बहुत तेजी से खत्म होता है। इसमें लगने वाली चीन की PL-15 मिसाइल्स, राफेल की मेटियोर मिसाइल्स के मुकाबले कमजोर है।’

सवाल-4: बांग्लादेश ने जानबूझकर राफेल और भारत का जिक्र क्यों किया?

जवाब: शेख हसीना के पीएम रहते बांग्लादेश का झुकाव भारत की तरफ था। 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना को तख्तापलट के बाद भागकर भारत आना पड़ा था। उसके बाद बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी और फरवरी 2026 से पीएम तारिक रहमान की पार्टी BNP सत्ता में हैं।

सत्ता बदलने के बाद से बांग्लादेश, भारत के बजाय पाकिस्तान-चीन के करीब जा रहा है। इसके कुछ संकेत देखिए…

1. चीन के दौरे, भारत के न्योते का जवाब नहीं दिया

  • पीएम मोदी ने तारिक को जीत की बधाई के साथ भारत आने का न्योता भी दिया था। हालांकि तारिक रहमान मलेशिया और चीन पहुंचे। उन्होंने चीन को ‘सबसे कीमती और भरोसेमंद पार्टनर’ कहा।
  • भारत ने 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में हो रहे BRICS सम्मेलन के लिए तारिक को आमंत्रित किया। इस पर भी अब तक बांग्लादेश की तरफ से जवाब नहीं आया है।

2. अपने डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भारत से लेकर चीन को दिए

  • 22 से 26 जून 2026 तक तारिक के चीन दौरे के बीच बांग्लादेश ने भारत के तट से महज 80 किमी दूर अपने मोंगला पोर्ट के डेवलपमेंट का प्रोजेक्ट चीन को देने का समझौता कर लिया। जबकि पहले भारतीय कंपनियों से बात चल रही थी।
  • दूसरे समझौते के तहत भारत की ‘चिकन नेक’ से 100 किमी दूर तीस्ता नदी को भी चीन मैनेज करेगा। भारत ने कहा था कि वह इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है।
  • 12 दिसंबर 1996 को दोनों देशों में 30 सालों के लिए हुई गंगा जल-संधि की मियाद भी खत्म हो रही है। इसे रिन्यू करने पर अब तक बात नहीं हुई है।

3. पाकिस्तान-तुर्किये-सऊदी के साथ डील की तैयारी

  • 21 अगस्त को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा, 'बांग्लादेश सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के मक्का-पैक्ट में शामिल हो सकता है।
  • मक्का पैक्ट में शर्त है कि इसके किसी भी एक सदस्य देश पर हमला हो, तो बाकी सभी देशों पर हमला माना जाएगा।
7 अगस्त 2026 को मक्का में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर साइन किए हैं।

7 अगस्त 2026 को मक्का में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर साइन किए हैं।

अब चीन से J-10C फाइटर जेट्स के सौदे में राफेल और J-10 की तुलना के बहाने जाहिद रहमान ने भारत के राफेल गिराने के पाकिस्तान के दावे को हवा दी है।

जाहिद ने ये भी कहा, '5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश दोबारा आजाद हुआ है। उससे पहले बांग्लादेश अपने हितों के मद्देनजर फॉरेन और डिफेंस पॉलिसी के फैसले नहीं ले पाता था। हम चीनी J-10C खरीदने पर सोच भी नहीं पाते, लेकिन अब हम इसे खरीदने जा रहे हैं।’

विदेशी मामलों के जानकार और JNU के प्रोफेसर राजन कुमार कहते हैं, ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बांग्लादेश ने सोच-समझकर बयान जारी किए थे। हालांकि अब BNP सरकार अपनी पुरानी नीति पर चलती दिखाई दे रही है। हसीना से पहले बांग्लादेश की पीएम और तारिक रहमान की मां खालिदा जिया भी एंटी इंडिया स्टैंड के लिए जानी जाती थीं।’

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 26 जून को बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 26 जून को बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी।

सवाल-5: तो क्या अब चीन, पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश को भी मजबूत कर रहा है?

जवाब: 2002 से चीन और बांग्लादेश के बीच डिफेंस एग्रीमेंट है। हथियारों के अलावा दोनों देशों की सेनाएं जॉइंट एक्सरसाइज करती हैं। बांग्लादेश का चीन से फाइटर जेट या हथियार खरीदना भी कोई नई बात नहीं है। कुछ आंकड़े देखिए…

  • स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट, SIPRI की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश चीनी हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार देश है।
  • 2019 से 2023 के बीच चीन के हथियार एक्सपोर्ट में पाकिस्तान की हिस्सेदारी 61% थी। फिर 11% हिस्सा बांग्लादेश का था।
  • मिंग क्लास पनडुब्बी से लेकर टैंक तक बांग्लादेश के 72% हथियार और उपकरण चीन के बने हैं।
  • अभी बांग्लादेश एयरफोर्स के पास 212 विमान हैं। इनमें से 44 फाइटर जेट्स हैं और इन 44 में से 36 विमान चीने के F-7 हैं और बाकी 8 रूसी मिग-29B हैं। यानी बांग्लादेश एयरफोर्स का 80% फाइटर स्क्वाड्रन चीनी जेट्स का है।
बांग्लादेश एयरफोर्स का F-7 जेट लैंड करते हुए।

बांग्लादेश एयरफोर्स का F-7 जेट लैंड करते हुए।

बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड सिक्योरिटी स्टडीज के प्रेसिडेंट मेजर जनरल (रिटायर्ड) मुनीरुज्जमान के मुताबिक, बांग्लादेश का नए फाइटर जेट्स खरीदने का प्लान पुराना है, हालांकि अभी ये सौदा बातचीत की स्टेज में है।

दरअसल, बांग्लादेश ने 2009 में 'फोर्सेज गोल 2030' नाम का प्लान शुरू किया था। इसके तहत बांग्लादेश की तीनों फोर्सेज को 2030 तक आधुनिक हथियारों से लैस करने की योजना है। इसके तहत बांग्लादेश, चीन से बैटल टैंक, कई मिसाइल्स, रॉकेट लॉन्चर, रडार सिस्टम और F-7 जेट्स और रूस से 16 याक-130 लाइट अटैक एयरक्राफ्ट, MI-17 और कुछ रडार सिस्टम खरीद चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, J-10C बांग्लादेश की विशलिस्ट में तब शामिल हुआ, जब बांग्लादेश एयरफोर्स के चीफ मार्शल हसन महमूद खान ने 2024 में चीन का दौरा किया। उन्होंने चीन से कुछ लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर खरीदने की बात की। मार्च 2025 में मोहम्मद यूनुस के चीन दौरे पर ये बातचीत आगे बढ़ी। बांग्लादेश चीन से चौथी जनरेशन के कुछ फाइटर जेट्स, अटैक हेलीकॉप्टर और ड्रोन वगैरह खरीदने की भी बात कर रहा है।

जनरल मुनीरुज्जमान कहते हैं, ‘बेशक बांग्लादेश को नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है, लेकिन आज दुनिया में एक नए तरह का जियो-पॉलिटिकल डिवीजन है। खास तौर पर अमेरिका और चीन के बीच तनाव है। इसलिए किसी भी देश से जेट खरीदने से पहले इसके राजनीतिक असर की एनालिसिस करना भी जरूरी है।’

सवाल-6: इससे भारत को खतरा क्या है?

जवाब: 1971 की जंग हारने के बाद पाकिस्तानी नेवी को बंगाल की खाड़ी से भागना पड़ा था। तब से इस इलाके में पाकिस्तान की मौजूदगी नहीं रही है। पकिस्तान से कोई जंग हुई, तो भी पूर्वी मोर्चे से भारत को कोई बड़ा खतरा नहीं हुआ।

हालांकि अब भारत के लिए कई चिंताएं हैं…

  • 55 साल बाद जून 2026 में पाकिस्तान को चीन से नई ‘हैंगोर क्लास’ पनडुब्बियां मिली हैं। पकिस्तान का कहना है कि वो इन्हें बंगाल की खाड़ी में तैनात करेगा।
  • बांग्लादेश के पाकिस्तान के नजदीक आने से तनाव की स्थिति में भारत के लिए दो मोर्चों पर जंग का खतरा बढ़ सकता है।
  • बांग्लादेश का मोंगला पोर्ट भारतीय जमीन से सिर्फ 80 किमी दूर है। जबकि उसका तीस्ता नदी प्रोजेक्ट भारत की ‘चिकन नेक’, यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर से सिर्फ 100 किमी दूर है।
  • स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट ब्रह्म चेलानी कहते हैं, 'अगर बांग्लादेश मक्का पैक्ट में भी शामिल होता है, तो अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और भूमध्य सागर के इलाके में सिक्योरिटी से जुड़ा पूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलेगा।’
  • बांग्लादेश शामिल हुआ, तो सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये को साउथ एशिया में मजबूत पकड़ मिल जाएगी। इनकी पहुंच भारत के पूर्व तक हो जाएगी।

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