ITBP जवान खिलेश ध्रुव को सैन्य सम्मान से अंतिम विदाई: धमतरी में गार्ड ऑफ ऑनर संग अंतिम संस्कार, शहीद को नम आंखों से दी श्रद्धांजलि - Dhamtari News

Published on 21 जुल॰ 2026

धमतरी जिले के ग्राम शंकरदहा ने मंगलवार को अपने वीर सपूत एवं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान खिलेश कुमार ध्रुव को अश्रुपूरित आंखों से अंतिम विदाई दी। ड्यूटी के दौरान असामयिक निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर गृहग्राम पहुंचा, जहां अंतिम दर्शन के

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धमतरी पहुंचते ही ग्रामीणों ने तिरंगा लेकर बाइक रैली निकाली। "भारत माता की जय" के जयघोष के बीच पार्थिव शरीर को शंकरदहा गांव लाया गया। घर पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों के साथ जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग पहुंचे।

नारों से गूंजा गांव, बारिश में भी उमड़ी भीड़

अंतिम यात्रा के दौरान "वीर जवान अमर रहे", "भारत माता की जय" और "जब तक सूरज-चांद रहेगा, खिलेश तेरा नाम रहेगा" के नारों से पूरा गांव गूंज उठा। बारिश के बावजूद महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम सलामी

शंकरदहा स्कूल परिसर में अंतिम संस्कार से पहले आईटीबीपी और पुलिस के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद राजकीय सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

नारायणपुर से लौटते समय बिगड़ी तबीयत

जानकारी के अनुसार, खिलेश कुमार ध्रुव (32) वर्ष 2013-14 से आईटीबीपी में पदस्थ थे। वे हाल ही में नक्सल प्रभावित नारायणपुर क्षेत्र में ड्यूटी पूरी कर गुवाहाटी (असम) लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उपचार के दौरान रविवार को उनका निधन हो गया।

‘राष्ट्र सेवा ही सबसे ऊपर’

परिजनों ने बताया कि खिलेश कुमार ध्रुव अपने सरल, मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव के कारण सभी के प्रिय थे। ड्यूटी पर जाते समय उन्होंने परिवार से कहा था कि "राष्ट्र सेवा ही उनके लिए सर्वोपरि है।" उनके निधन से परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंची है, जबकि जिले ने एक अनुशासित और राष्ट्रभक्त जवान खो दिया।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

ग्रामीणों ने बताया कि खिलेश ध्रुव की प्रेरणा से गांव के कई युवा सुरक्षा बलों में भर्ती हुए हैं और आगे भी उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प ले रहे हैं। ग्रामीण अमृत लाल ध्रुव ने कहा कि खिलेश गांव के होनहार, अनुशासित और मिलनसार युवा थे, जिनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।

स्कूल में मिली अंतिम सलामी

शंकरदहा के शिक्षकों ने बताया कि जिस स्कूल में खिलेश ने पढ़ाई की थी, उसी परिसर में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उनका मानना है कि इससे वर्तमान में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को देश सेवा की प्रेरणा मिलेगी और वे भी राष्ट्र की रक्षा के लिए आगे बढ़ने का संकल्प लेंगे।