करीब दो दशक तक देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात रहे ITBP जवान नीरज शर्मा शुक्रवार को अपने पैतृक कस्बे भौंती लौटे, लेकिन इस बार उनकी वापसी ने पूरे कस्बे को गमगीन कर दिया। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जैसे ही भौंती पहुंचा, बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। माहौल में देशभक्ति के नारों के साथ अपनों को खोने का दर्द भी साफ दिखाई दिया।
ITBP के जवानों के साथ नीरज का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा। अंतिम यात्रा जब कस्बे की सड़कों से निकली तो जगह-जगह लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। ‘भारत माता की जय’ और देशभक्ति के नारों से भौंती का वातावरण गूंजता रहा। देशभक्ति गीतों के बीच निकली अंतिम यात्रा में हर उम्र के लोग शामिल हुए। अंतिम संस्कार स्थल पर ITBP के जवानों ने अपने साथी नीरज शर्मा को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया। सैन्य सम्मान के बाद उनके छोटे भाई प्रदीप शर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार के सदस्यों के साथ प्रशासनिक अधिकारी, पुलिसकर्मी, ITBP के जवान और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
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14 सितंबर को ही हुए थे रवाना
नीरज के निधन की खबर के बाद से ही भौंती में शोक का माहौल था। शुक्रवार को जब उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो परिवार के सदस्यों के साथ उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हो गईं। परिवार के मुताबिक नीरज शर्मा पिछले करीब एक वर्ष से लेह-लद्दाख में ITBP की ड्यूटी पर तैनात थे। 14 सितंबर को छुट्टी पूरी होने के बाद वे वापस ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। उस समय उनकी तबीयत कुछ खराब बताई जा रही थी। उन्हें लेह-लद्दाख पहुंचने से पहले दिल्ली स्थित ITBP मुख्यालय में रिपोर्ट करना था। नीरज को दिल्ली तक छोड़ने के लिए उनके पिता सुदामा प्रसाद शर्मा भी साथ गए थे। दिल्ली पहुंचने के बाद नीरज ITBP मुख्यालय में रुक गए, जबकि उनके पिता मथुरा दर्शन के लिए चले गए।
2007 में हुए थे भर्ती
नीरज के छोटे भाई प्रदीप शर्मा के अनुसार 16 सितंबर को परिवार के पास दिल्ली स्थित ITBP मुख्यालय से फोन आया। उन्हें नीरज की तबीयत खराब होने की जानकारी दी गई। खबर मिलते ही परिवार उसी शाम दिल्ली के लिए रवाना हो गया। परिजन रास्ते में मथुरा पहुंचे और वहां से नीरज के पिता सुदामा प्रसाद शर्मा को भी अपने साथ ले लिया। परिवार दिल्ली पहुंचता, उससे पहले ही नीरज के निधन की सूचना मिल गई। अचानक आई इस खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
नीरज शर्मा वर्ष 2007 में ITBP में आरक्षक जीडी के पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार करीब 19 वर्षों तक बल में अपनी सेवाएं दीं। कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र लेह-लद्दाख में भी वह पिछले एक साल से तैनात थे।
पत्नी और बेटी को छोड़ गए
परिवार में नीरज के पीछे उनकी पत्नी और 16 वर्षीय बेटी है। बेटी अपनी मां के साथ भौंती में रहती है। नीरज दो भाइयों में बड़े थे। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ पूरा कस्बा शोक में डूब गया। नीरज ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश सेवा को समर्पित किया। शुक्रवार को जब अंतिम यात्रा निकली तो भौंती के लोगों ने एकजुट होकर उन्हें विदाई दी।