ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर अचानक सख्ती क्यों? केंद्रीय मंत्री ने बताई बड़ी वजह

Published on 16 जुल॰ 2026

ISRO Resignation Policy: ISRO में गगनयान मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सख्ती और कुडनकुलम परमाणु संयंत्र को लेकर उठे सवालों पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बड़ा बयान दिया।

भारत के अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। एक ओर ISRO ने गगनयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) पर सख्ती बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना (KKNPP) को लेकर संवेदनशील डेटा लीक होने की खबरों पर भी चर्चा तेज रही। अब केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोनों मुद्दों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है।

ISRO में इस्तीफों पर सख्ती क्यों बढ़ाई गई?

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO द्वारा जारी किया गया नया निर्देश पूरी तरह प्रशासनिक कारणों से है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे किसी तरह का विवाद या असाधारण स्थिति नहीं है।

मंत्री के अनुसार, ISRO में बड़ी संख्या में वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारी कार्यरत हैं। समय-समय पर कुछ लोग संस्थान छोड़ते हैं तो नए विशेषज्ञ भी जुड़ते हैं। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अनुभवी वैज्ञानिकों की भूमिका को देखते हुए अब ऐसे मामलों में निर्णय उच्च स्तर पर अधिक सावधानी से लिया जाएगा। 14 जुलाई को जारी निर्देश में गगनयान और अन्य अहम मिशनों से जुड़े ग्रुप 'A' के वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS आवेदन नियमित रूप से स्वीकार नहीं करने की बात कही गई थी।

गगनयान मिशन पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री?

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के सेवानिवृत्त होने से ISRO की परियोजनाएं नहीं रुकतीं। उन्होंने पूर्व ISRO अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि संस्थान में काम निरंतरता के साथ चलता है और सेवानिवृत्त वैज्ञानिक भी जरूरत पड़ने पर परियोजनाओं में योगदान देते रहते हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि गगनयान मिशन की तैयारी वर्षों से चल रही है। मानव को अंतरिक्ष में भेजने के साथ उसे सुरक्षित वापस लाना सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है और ISRO उसी दिशा में लगातार काम कर रहा है।

कुडनकुलम परमाणु संयंत्र पर सरकार का क्या कहना है?

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर संवेदनशील डेटा लीक होने की आशंकाओं पर भी केंद्रीय मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह माना जाए कि संयंत्र की संवेदनशील जानकारी से समझौता हुआ है।

उन्होंने संकेत दिया कि जिस तरह की चर्चाएं हो रही हैं, उनका रणनीतिक सुरक्षा से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इस मामले की जांच न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) कर रही हैं।

गौरतलब है कि तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परियोजना में फिलहाल दो 1000 मेगावाट क्षमता वाले परमाणु रिएक्टर संचालित हैं, जबकि चार अतिरिक्त इकाइयों का निर्माण जारी है। सभी इकाइयों के पूरा होने के बाद यह 6000 मेगावाट क्षमता के साथ देश का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा पार्क बनने की दिशा में अग्रसर है।

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