दैनिक भास्कर की सियासी कहानियों की सीरीज ‘पावर प्ले’ में आज कहानी राजीव गांधी की उस यात्रा की जब वे युद्धपोत INS विराट से लक्षद्वीप छुट्टियां मनाने गए थे। जिसमें इटली के ससुराल वाले और अमिताभ बच्चन भी साथ थे। आगे चलकर यह बड़ा मुद्दा भी बना…
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28 दिसंबर 1987 की एक शाम। केरल के त्रिवेंद्रम तट से थोड़ी दूर, अरब सागर के नीले पानी में खड़ा है भारत का विशाल युद्धपोत INS विराट। करीब 226.5 मीटर लंबा और 28,700 टन वजनी एक ‘तैरता हुआ’ हवाई अड्डा, जिसके डेक से 26 विमान उड़ान भर सकते हैं। यह इतना बड़ा है कि इसे तैरता हुआ शहर भी कहा जाता है।
भारतीय नौसेना में इसे शामिल हुए 7 महीने ही हुए हैं। कैप्टन हैं- विनोद पसरीचा।
आज यह युद्धपोत किसी जंग के लिए तैयार नहीं हो रहा। इसके मेहमान हैं देश के सबसे ताकतवर शख्स और उनके अपने लोग। मंजिल है लक्षद्वीप का मिनिकॉय आइलैंड, और वहां से आगे एक सुनसान टापू, बंगाराम।
105 किलो बासमती चावल, 100 मुर्गे, 20 किलो आटा, 40 पेटी कोल्ड ड्रिंक, 300 बोतल मिनरल वाटर, महंगी शराब, ढेर सारी चॉकलेट, पनीर, काजू, मसाले, मक्खन और ब्रेड पहले ही तीन खेपों में बंगाराम पहुंचाए जा चुके हैं।
रात के करीब 8 बजे, जहाज की गड़गड़ाहट गूंजती है। गैंगवे यानी युद्धपोत तक जाने वाली सीढ़ियों के पास सहायक स्टाफ हाथ में एम्बार्केशन रजिस्टर लिए खड़ा है।
तभी प्रधानमंत्री दफ्तर का एक अफसर उसके पास आता है और धीरे से फुसफुसाता है- ‘प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी, बस ये दो नाम दर्ज कर लो। बाकी लिस्ट बाद में आएगी।’
सहायक स्टाफ चुपचाप दो नाम दर्ज करता है।
जहाज पर बाकी और लोग भी एक-एक करते चढ़ते हैं। प्रियंका गांधी, अभिनेत्री जया बच्चन, उनके बच्चे श्वेता, अभिषेक बच्चन, अमिताभ के भाई अजिताभ, उनकी बेटी और राजीव गांधी के ससुराल इटली से आए खास मेहमान।
युद्धपोत अपनी मंजिल मिनिकॉय की तरफ बढ़ता है, करीब 430 किलोमीटर दूर।
उधर, जहाज पर महफिल सज चुकी है। हवा में समंदर के नमक की तीखी गंध है, जहाज के रसोई से तली हुई मछलियों की महक, चाय की चुस्कियां, देसी-विदेशी मेहमानों की हंसी-ठिठोली और गानों की गूंज है।
पूरी रात जश्न चलता है। 29 दिसंबर को INS विराट मिनिकॉय पहुंचता है। यहां से आगे सफर बंगाराम का है।
प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी के साथ सभी जहाज से नीचे उतरते हैं और आइलैंड की सैर करते हैं। लक्षद्वीप प्रशासन का एक हेलिकॉप्टर लैंड करता है।
राजीव गांधी और सोनिया गांधी यहीं रुक जाते हैं और बाकी मेहमान हेलीकॉप्टर से सीधे बंगाराम पहुंचते हैं, जहां छुट्टी मनाने की 4 महीना पहले से ही तैयारी हो चुकी थी।
इसके बाद 30 दिसंबर को राजीव गांधी के जिगरी दोस्त बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन एक विशेष हेलीकॉप्टर से कोच्चि से सीधे बंगाराम पहुंचते हैं।
अखबारों में इस छुट्टी की तस्वीरें छपती हैं और यह देश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ने भी इसे चुनावी मुद्दा बना लिया।

INS विराट पर पत्नी सोनिया गांधी के साथ राजीव गांधी। AI जनरेटेड।
बंगाराम को ही क्यों चुना गया
लक्षद्वीप का एक छोटा सा टापू- बंगाराम। करीब ढाई वर्ग किलोमीटर का सूना टापू, जहां नारियल और मछली के सिवा कुछ नहीं।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सितंबर 1987 में यहां हेलीपैड बनाने का काम शुरू हुआ। आधुनिक सुविधाओं वाली झोपड़ियां खड़ी की गईं। रसोइए, पानी और जनरेटर, सब कुछ हवाई रास्ते पहुंचाया गया।
देश को आजाद हुए 40 साल हो चुके थे, और लक्षद्वीप में एक टापू के विकास पर सचमुच तेजी से काम हो रहा था। वजह साफ थी- प्रधानमंत्री राजीव गांधी यहां छुट्टियां बिताने आने वाले थे।
पिछले साल का अंत प्रधानमंत्री ने ससुराल वालों और दोस्तों के साथ अंडमान में बिताया था। इस बार ठिकाना लक्षद्वीप का यह टापू था।
लक्षद्वीप प्रशासन के तेल टैंकर MT सुहेली और MT भारत भी वहां थे। यात्री जहाज MV भारतसीमा जैसे और सागरदीप जैसे रिसर्च शिप अपनी सामान्य ड्यूटी से हटाकर इस छुट्टी के लिए लगाए गए थे।
यही नहीं, प्रधानमंत्री की छुट्टी के लिए इस सूनसान टापू पर आना-जाना लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया था। 15 जनवरी तक सभी जहाजों के टिकट जारी करना बंद कर दिए गए।
अधिकारियों ने वजह बताई कि सारी सीटें पहले ही यात्रियों ने बुक कर ली हैं और कुछ सीटें प्रधानमंत्री के दौरे से जुड़े मंत्रियों और अधिकारियों के लिए रखी गई हैं।
अब बारी आती है रसोई की। मेन्यू, दिल्ली से गांधी परिवार का निजी रसोइए की निगरानी में तय हो रहा था। पकाने का जिम्मा लक्षद्वीप प्रशासन की संस्था ‘SPORTS’ (Society for Promotion of Nature Tourism and Sports) के पांच कर्मचारियों पर था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘लक्षद्वीप प्रशासन ने प्रधानमंत्री और उनकी टोली के लिए केरल की सबसे पसंदीदा मिठाइयों में से एक अंबलप्पुझा पालपायसम (खीर) बड़ी मात्रा में हवाई रास्ते से बंगाराम भेजी गई थी।
आइलैंड पर मनोरंजन की भरपूर व्यवस्था थी। प्रधानमंत्री और उनकी टोली ने समुद्र में नौका चलाई और टूना मछली पकड़ी। पुरुषों और महिलाओं की अलग-अलग टीमों के बीच कबड्डी खेली गई।इसके बाद रेत पर अलाव की रोशनी में नए साल की पार्टी हुई।
कुछ दिनों तक यह आलीशान पार्टी राज बनी रही, लेकिन पत्रकार अनीता प्रताप ने इंडिया टुडे में 31 जनवरी 1988 को इसका पूरा ब्योरा छापा।
इस आइलैंड को काफी सोच-समझकर चुना गया था। यह इकलौता आइलैंड था, जहां विदेशियों के आने पर पाबंदी नहीं थी। यहां शराबबंदी भी लागू नहीं थी और काफी सुरक्षित था।
आईएनएस विराट गांधी परिवार की आवाजाही के काम आया और 10 दिनों तक अरब सागर में घूमता रहा- रोजाना का खर्च बेहद ज्याद था, क्योंकि विराट एस्कॉर्ट जहाजों का पूरा काफिला लेकर चलता था।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस काफिले में एक पनडुब्बी भी शामिल थी। प्रशासन को सारे बिल जमा करने को कहा गया था, ताकि राजीव गांधी खुद पेमेंट कर सकें।

लक्षद्वीप दौरे के दौरान पीएम राजीव गांधी।
मेहमानों की लिस्ट खुद खबर बन गई
प्रधानमंत्री के दल में राजीव गांधी, उनकी पत्नी सोनिया, दोनों बच्चे राहुल और प्रियंका, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अभिषेक, श्वेता, भाई अजिताभ बच्चन की तीन बेटियां,... सोनिया गांधी की मां आर माइनो, बहन नादिया वाल्दिमेरो और उनका बेटा जी वाल्दिमेरो, सोनिया के जीजा वाल्टर विंची..., और सोनिया की एक जर्मन दोस्त सबीना शामिल थीं।
अजिताभ उस वक्त फॉरेन एक्सचेंज का नियम तोड़ने से जांच के दायरे में थे। बाकी भारतीय मेहमानों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण सिंह के भाई बिजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक छुट्टी की शुरुआत 26 दिसंबर को हुई, जब राहुल गांधी चार दोस्तों के साथ लक्षद्वीप प्रशासन के नारंगी-सफेद हेलीकॉप्टर से बंगाराम पहुंचे- यह कई जत्थों में पहला जत्था था।
राजीव-सोनिया 30 दिसंबर दोपहर को बंगाराम पहुंचे। खास मेहमान अमिताभ बच्चन एक दिन बाद यानी 31 दिसंबर कोच्चि से कवरत्ती होते हुए विशेष हेलिकॉप्टर से बंगाराम पहुंचे।
सरकार की पूरी कोशिश थी कि मीडिया इस जगह से दूर रहे। अमिताभ बच्चन की यात्रा को छुपाने की पूरी कवायद हुई थी- पर कावारत्ती में यह राज 31 दिसंबर को ही खुल गया, जब बंगाराम जाते वक्त हेलीकॉप्टर ईंधन भरने के लिए रुका।
लौटते वक्त कोच्चि एयरपोर्ट पर इंडियन एक्सप्रेस के एक फोटोग्राफर नाराजगी के बावजूद उनकी चार तस्वीरें खींचने में कामयाब रहा।

कोचिन एयरपोर्ट के बाहर अमिताभ बच्चन। सोर्स- इंडिया टुडे
छुट्टी का अंत और विवाद शुरू हुआ
6 जनवरी 1988 को छुट्टी खत्म हुई- प्रियंका सबसे पहले अपने साथियों के साथ गोवा रवाना हुईं। फिर विदेशी मेहमानों का जत्था गया, उसके बाद बच्चन परिवार निकला।
दोपहर 1:20 बजे राजीव गांधी राहुल के साथ नौसेना के हेलीकॉप्टर से अमिनी आइलैंड के लिए निकले, जहां नए साल 1988 का पहला ऑफिशियल इवेंट होना था।
रास्ते में राहुल को आईएनएस विराट पर उतारा गया, ताकि वे पिता के साथ मंगलौर तक की सवारी कर सकें। सोनिया गांधी और उनके रिश्तेदार सबसे आखिर में निकले।
रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि राहुल-प्रियंका सितंबर 1987 में भी चार दोस्तों के साथ लक्षद्वीप आए थे, जिसका 18,000 रुपए का बिल राजीव गांधी ने खुद चुकाया था।
प्रशासन इस हाई-प्रोफाइल छुट्टी से टूरिज्म बढ़ने की उम्मीद कर रहा था। लक्षद्वीप के सांसद पीएम सईद ने कहा- ‘इसके प्रचार से हमें बहुत फायदा होगा।’
असर दिखने भी लगा- 8 जनवरी को कोचीन के लक्षद्वीप दफ्तर में पूछताछ सामान्य दिनों से पांच गुना ज्यादा थी।
उस समय लक्षद्वीप के एडमिनिस्ट्रेटर वजाहत हबीबुल्लाह ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि पर्यटन पूरी तरह विकसित उद्योग बने, जिससे द्वीपों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ें और बड़ी संख्या में शिक्षित बेरोजगारों को काम मिले।’
इससे पहले राजीव गांधी नवंबर 1985 में भी एक दिन के लिए बंगाराम आ चुके थे- यह जगह उन्हें बेहद पसंद थी। राजीव ने तट के पास फंसी एक घायल डॉल्फिन बचाई थी।
वजाहत हबीबुल्ला याद करते हैं- ‘उन्हें यह जगह बहुत पसंद थी। वे बहुत तैरते थे।’

लक्षद्वीप में समंदर के पानी से निकलते हुए राजीव गांधी। सोर्स- इंडिया टुडे
मेहमानों की लिस्ट ही विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार बनी। कावारत्ती में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के महासचिव कुंजी कोया ने तीखी टिप्पणी की- ‘यह शर्मनाक है कि प्रशासन के हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल सिर्फ एक आदमी को ले जाने के लिए किया जाए- वह भी ऐसा आदमी, जिसका नाम देश के सबसे बड़े घोटाले में आता है।'
इशारा सीधे अमिताभ बच्चन की तरफ था, जो विशेष कोच्चि-कावारत्ती हेलीकॉप्टर फ्लाइट से बंगाराम पहुंचे थे- बोफोर्स घोटाला तब चर्चा में था।
कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि एक पारिवार की छुट्टी के लिए नौसेना के सबसे कारगर जहाज को लगाना उचित नहीं है।
32 साल बाद किस्सा चुनावी मंच पर
8 मई 2019, चार दिन बाद छठे फेज की वोटिंग थी। दिल्ली का रामलीला मैदान खचाखच भरा था। भाजपा ने रैली में 2 लाख से ज्यादा लोगों के आने का दावा किया था। मंच पर राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज और माइक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
मोदी ने मुद्दा उछाला- जब INS विराट समुद्र की सीमाओं की रखवाली के लिए तैनात था, तब उसे राजीव गांधी और उनके परिवार को एक आइलैंड पर छुट्टी मनाने भेज दिया गया।
इटली से आए राजीव के ससुराल वाले भी जहाज पर थे। जहाज 10 दिन आइलैंड के पास उनकी सेवा में लगा रहा। फिर वे भीड़ से सीधा सवाल पूछते हैं- क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं था?
तालियां गूंज उठती हैं।
उसी शाम बात एक्स (तब ट्विटर) पर पहुंची। प्रधानमंत्री के हैंडल से इंडिया टुडे की 1988 की रिपोर्ट शेयर की गई, जिसकी हेडिंग थी- ‘लक्षद्वीप समूह पर गांधी परिवार की आलीशान छुट्टी।’
साथ में सवाल उछाला- क्या किसी ने कभी सोचा था कि सेना के प्रमुख युद्धपोत INS विराट को निजी छुट्टी के लिए 'टैक्सी' की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है?
इसके साथ ही मोदी ने अपील की- इस न्यूज रिपोर्ट को पढ़िए और शेयर कीजिए। पोस्ट घंटों में वायरल हो गई।
वित्तमंत्री अरुण जेटली भी मैदान में उतरे। उन्होंने एक्स पर लिखा- मोदी जैसा 'कामदार' पीएम आतंक से लड़ने के लिए सेना का इस्तेमाल करता है, बालाकोट स्ट्राइक करता है। जबकि राजीव गांधी जैसा 'नामदार' पीएम सेना का इस्तेमाल परिवार, ससुराल वालों के साथ छुट्टी मनाने के लिए करता है।
जवाब भी तुरंत आया। उमर अब्दुल्ला ने तंज कसा- ‘क्या मोदी जी को टाइम मशीन मिल गई है? लगता है वे 1989 लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।’
कांग्रेस पलटवार के लिए एक RTI का जवाब खोद निकाला, जिसमें दावा था कि मोदी चुनावी यात्राओं में वायुसेना के विमान का इस्तेमाल सिर्फ 744 रुपए देकर करते हैं।
उसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मोदी को 'सीरियल लायर' कहा।

8 मई, 2019 को दिल्ली के रामलीला मैदान में पीएम मोदी।
कुछ दिन बाद यह डिबेट नौसेना के पूर्व अधिकारियों के बीच पहुंची। वाइस एडमिरल विनोद पसरीचा, जो उस वक्त INS विराट के कप्तान थे और एडमिरल एल रामदास, जो तब कोच्चि में दक्षिणी नौसेना कमान के प्रमुख थे। दोनों ने दावे को खारिज किया।
उनका कहना था कि राजीव गांधी सिर्फ दो-तीन दिन जहाज पर रहे, वह भी आइलैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) की सरकारी बैठक के लिए गए थे।
पसरीचा के मुताबिक, राजीव और सोनिया हेलीकॉप्टर से पांच-छह आइलैंड्स पर गए और रात को जहाज पर लौट आते थे। जहाज पर कोई विदेशी मेहमान नहीं था।
पर बंगाराम की छुट्टी पर पसरीचा रुक जाते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया से उन्होंने कहा- ‘छुट्टी शायद अलग से हुई हो, उन्हें नहीं मालूम।’
एक RTI के जवाब में नौसेना ने बताया कि प्रधानमंत्री 28 दिसंबर 1987 को त्रिवेंद्रम के पास जहाज पर सवार हुए और 29 दिसंबर को मिनिकॉय के पास उतरे। सोनिया गांधी साथ थीं। बाकी लोगों का ब्योरा 'उपलब्ध नहीं' है।
उस वक्त विराट पर जूनियर अधिकारी रहे रिटायर्ड कमांडर वीके जैत्ली का दावा है कि एडमिरल के केबिन में गांधी परिवार के लिए कमरा तैयार किया गया था। ये जहाज बंगाराम की तरफ गया था।
INS विराट अब रिटायर हो चुका है, लेकिन 1987 की उस छुट्टी पर सवाल अब भी उठते रहते हैं।

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रेफरेंस:
1- India today
2- The Indian express
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