इंदौर, 11 सितंबर 2026: इंदोरियों के लिए झटका देने वाली खबर है। देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026' में अपने शीर्ष स्थान से खिसक कर दूसरे स्थान पर आ गया है। चिंता की बात यह है कि इंदौर के तीन नंबर PM10 कणों की वजह से कटे हैं। यह एक गंभीर स्थिति है। इंदौर नंबर दो पर आ गया तो नंबर वन पर कौन है और PM10 कणों को खतरनाक क्यों कहा जाता है। सब कुछ जानिए सिर्फ 1 मिनट में:-
2025 में 100% नंबर मिले थे
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर ने 200 में से 197 अंक प्राप्त किए, जबकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। लखनऊ को आजकल मलाई मक्खन वाला शहर भी कहा जाता है। यहां की शीरमल, कचौड़ी, चाट और मलाई मक्खन वर्ल्ड फेमस हो गई है। यूनेस्को ने लखनऊ को Creative City of Gastronomy का दर्जा दिया है। भारत सरकार के स्थानीय प्रशासन ने इंदौर की रैंकिंग में गिरावट के लिए खतरनाक वायु जनित PM10 कणों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर राज्य में सबसे अधिक वाहन घनत्व वाला शहर है। गौरतलब है कि 2025 के सर्वेक्षण में इंदौर ने 200 में से पूरे 200 अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया था। इस बार वह लखनऊ से केवल एक अंक पीछे रह गया और अपनी शीर्ष स्थिति को बरकरार रखने में असमर्थ रहा।
इंदौर में पेट्रोल डीजल की खपत कम करनी पड़ेगी
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि PM10 कणों के मानकों में पिछड़ने के कारण शहर का एक अंक कम हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ट्रैफिक और उद्योगों से होने वाले प्रदूषण तथा PM10 कणों के प्रभाव को कम करने के लिए पूरे वर्ष विशेष उपाय किए जाएंगे। वाहन जनित प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए शहर में कई महत्वपूर्ण पहलों को गति दी जाएगी, जिनमें शामिल हैं:
ट्रैफिक सिग्नलों पर "रेड लाइट ऑन, इंजन ऑफ" जैसी जन जागरूकता पहल।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के इस्तेमाल को बढ़ावा देना।
शहर में ई-बसों (e-buses) के संचालन को तेज करना।
PM10 कण क्या होते हैं
PM10 कण हवा में तैरते हुए सूक्ष्म ठोस और तरल कण हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर (μm) या उससे कम होता है। इन्हें श्वसन योग्य कणिका पदार्थ (Respirable Particulate Matter) भी कहा जाता है। मानव बाल की मोटाई आमतौर पर 50-70 माइक्रोमीटर होती है, यानी PM10 कण बाल से कई गुना छोटे होते हैं। आंखों से ये दिखते नहीं हैं। PM10 कण नाक और गले से होते हुए फेफड़ों के ऊपरी हिस्से तक पहुंच सकते हैं। जिसके कारण ये समस्याएं हो सकती हैं:
- आंख, नाक और गले में जलन
- खांसी, सांस लेने में तकलीफ और अस्थमा बढ़ना
- हृदय और फेफड़ों संबंधी बीमारियां
