
भारतीय खेल के महानायक. (फोटो- AI Generated)
Independence Day: 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और देशभक्ति का जश्न मनाने का दिन है. इस बार 15 अगस्त 2026 को हमारा देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. देश की आजादी और तिरंगे की शान सिर्फ सीमाओं पर खड़े वीरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि खेल के मैदानों पर भी जब तिरंगा लहराता है और राष्ट्रगान की धुन बजती है, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. इस खास मौके पर हम आपको भारतीय खेल जगत के उन 5 महानायकों के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपने खेल से दुनिया के नक्शे पर भारत का नाम हमेशा-हमेशा के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर दिया.
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद
जब भारत ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी के दौर से गुजर रहा था, तब ओलंपिक के मैदान पर भारत के नाम का डंका बजाने वाले खिलाड़ी थे मेजर ध्यानचंद. 1928 एम्स्टर्डम, 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन ओलंपिक में भारत को लगातार तीन गोल्ड मेडल दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही थी. बर्लिन ओलंपिक में तो उनके जादुई खेल को देखकर खुद एडॉल्फ हिटलर भी हैरान रह गया था. ध्यानचंद ने दिखाया कि एक भारतीय अपने खेल से दुनिया को कैसे नतमस्तक कर सकता है.
1983 का वो ऐतिहासिक मोड़
25 जून 1983 की वो तारीख भारतीय क्रिकेट और खेल इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई. लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर युवा कप्तान कपिल देव की अगुवाई में भारत ने दो बार की वर्ल्ड विजेता वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप अपने नाम किया था. इस जीत ने न सिर्फ भारतीय क्रिकेट का चेहरा बदला, बल्कि पूरे देश में यह विश्वास जगाया कि भारत भी ग्लोबल लेबल पर चैंपियन बन सकता है.
अभिनव बिंद्रा का ऐतिहासिक गोल्ड
ओलंपिक खेलों में भारत को व्यक्तिगत गोल्ड मेडल के लिए दशकों लंबा इंतजार करना पड़ा था. इस सूखे को साल 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में अभिनव बिंद्रा ने खत्म किया था. बिंद्रा का वह निशाना सिर्फ बीजिंग में नहीं लगा था, बल्कि उसने एक अरब से ज्यादा भारतीयों के मन में बैठा यह डर दूर कर दिया था कि भारतीय व्यक्तिगत खेलों में ओलंपिक चैंपियन नहीं बन सकते.
6 बार की वर्ल्ड चैंपियन मैरी कॉम
मणिपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर मुक्केबाजी की रिंग में वर्ल्ड चैंपियन बनने तक का सफर मैरी कॉम के जज्बे की मिसाल है. 6 बार वर्ल्ड मुक्केबाजी चैंपियनशिप जीतने वाली दुनिया की इकलौती महिला मुक्केबाज और 2012 लंडन ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडल विजेता मैरी कॉम ने यह साबित किया कि कोई भी सामाजिक या आर्थिक बाधा भारतीय महिलाओं के हौसलों को नहीं रोक सकती.
ट्रैक एंड फील्ड का पहला ‘गोल्डन बॉय’
टोक्यो 2020 ओलंपिक में जेवलिन थ्रो इवेंट में नीरज चोपड़ा का 87.58 मीटर का वह थ्रो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. उन्होंने भारत को एथलेटिक्स के इतिहास में पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल दिलाया था. इसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में भी लगातार सोना जीतकर नीरज ने दुनिया में भारत का सिर सबसे ऊंचा रखा है.

मोहिद खान
मोहिद खान TV9 Hindi में बतौर सीनियर सब-एडिटर स्पोर्ट्स डेस्क पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वह जर्नलिज्म में 4 साल का अनुभव रखते हैं. वह मूल रूप से राजस्थान के ब्यावर शहर के रहने वाले हैं. मोहिद ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से हासिल की है. वह पढ़ने, लिखने और खेलने का शौक रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंडिया न्यूज के साथ की थी. इसके बाद उन्होंने वनइंडिया हिंदी, ज़ी न्यूज और इंडिया टीवी जैसी संस्थानों में काम किया. वह किसी भी क्रिकेट मैच का बारीकी से विश्लेषण करने में माहिर हैं और उन्हें अन्य खेलों से जुड़ी खबरें बनाने में भी रुचि है.
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