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- Edited by: पीयूष कुमार
- Updated Aug 10, 2026, 05:23 PM IST
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर इस बार लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह आयोजन स्वतंत्रता दिवस समारोह की प्रमुख विशेषताओं में शामिल होगा। स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है।
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80वें स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार लाल किले से गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’। PTI
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80th Independence Day: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह ऐतिहासिक होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस बार लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान होने वाला यह आयोजन इस साल के कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं में शामिल होगा। समारोह में युवाओं की 'युवा शक्ति' के योगदान को भी सम्मानित किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के तहत ‘वंदे मातरम्’ को लाल किले की प्राचीर से प्रस्तुत किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय गीत को इस ऐतिहासिक स्थल से स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनाया जा रहा है।
स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा जुड़ाव
‘वंदे मातरम्’ का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष महत्व रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना से निकला यह गीत आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना जगाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना था। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है। वहीं ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान है।

लाल किले की प्राचीर से पहली बार वंदे मातरम् का होगा गायन। ANI
लाल किले से जुड़ेगा नया अध्याय
हर साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हैं। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान के साथ कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इस बार ‘वंदे मातरम्’ को भी समारोह में शामिल किए जाने से स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में एक नया आयाम जुड़ जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह आयोजन देश की स्वतंत्रता यात्रा और राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक योगदान को याद करने का अवसर भी होगा।
हाल ही में देश के दोनों सदनों से वंदे मातरम् बिल पास किया गया। बिल के प्रावधानों के तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान या उसका अपमान आपराधिक कृत्य माना जाएगा और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है।
बिल में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के दिए बयान का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया था कि ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और बराबर का दर्जा दिया जाएगा। बिल में यह भी कहा गया है कि फिलहाल ऐसा कोई विशेष कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके तहत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या इसके अपमान के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
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पीयूष कुमारauthor
पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।
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