Sep 13, 2026 03:29 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) का फेलो चुना गया है।

कौन हैं प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (NASI) का फेलो चुना गया है। आईआईटी कानपुर ने सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी और प्रोफेसर भट्टाचार्य को बधाई दी। बता दें कि उनकी फेलोशिप 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगी। चलिए जानते हैं कि कौन हैं प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य।
कौन हैं प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य
प्रोफेसर भट्टाचार्य वर्तमान में CSIR-सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (CSIR-CSIO), चंडीगढ़ के निदेशक हैं। इसके अलावा, वह CSIR-सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-CEERI), पिलानी के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।आईआईटी कानपुर की फैकल्टी प्रोफाइल के अनुसार, उनके शोध के मुख्य फील्ड बायो-एमईएमएस, लैब-ऑन-चिप, नैनो टेक्नोलॉजी, माइक्रोसिस्टम्स फैब्रिकेशन और माइक्रोफ्लूडिक्स हैं।
अमेरिका से की पढ़ाई
बता दें कि प्रोफेसर भट्टाचार्य काफी पढ़े-लिखे हैं। उन्होंने जून 2006 में यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी, कोलंबिया से PhD पूरी की। बता दें कि इससे पहले उन्होंने दिसंबर 2003 में टेक्सास टेक यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में M.S. किया था। वहीं, उन्होंने जून 1996 में दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंडस्ट्रियल एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में B.E. की डिग्री हासिल की।
बायो-MEMS और नैनो टेक्नोलॉजी में शोध
प्रोफेसर भट्टाचार्य का शोध कई आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों से जुड़ा है। उन्होंने PDMS और ग्लास की सतह की वेटेबिलिटी, माइक्रोमिक्सर्स, DNA इलेक्ट्रोफोरेसिस और सूक्ष्मजीवों की छंटाई व रियल-टाइम PCR डिटेक्शन के लिए इंटीग्रेटेड सिस्टम जैसे विषयों पर काम किया है। उनके शोध में नैनोपोरस सिलिका में एम्बेडेड ZnO नैनोबंडल्स की मदद से हाइड्रोजन सेंसरिंग भी शामिल है। आईआईटी कानपुर के मुताबिक, उनका व्यापक शोध कार्य अलग-अलग लेवल पर फंक्शनल मैटेरियल्स के डिजाइन, विकास और उनकी निर्माण प्रक्रियाओं से जुड़ा है।
कई पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित
प्रोफेसर भट्टाचार्य के IIT कानपुर प्रोफाइल में कई पुरस्कार और सम्मान दर्ज हैं। इनमें 2013 का आईएसएसएस यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, 2009-10 का आईईआई यंग इंजीनयिर्स अवॉर्ड और 2009-10 का बोइंग आउटस्टैंडिग लीडरशिप सर्टिफिकेट शामिल हैं। प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य का NASI फेलो चुना जाना उनके लंबे अकादमिक और शोध करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी रिसर्च आधुनिक तकनीक से जुड़े कई क्षेत्रों में उपयोगी मानी जाती है।
क्या है नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया
वर्ष 1914 में स्थापित नासी का मुख्यालय प्रयागराज में है। संस्था विज्ञान के प्रसार, नीति निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम करती है। हर साल यह भारत और विदेश के उत्कृष्ट वैज्ञानिकों को फेलो के रूप में सम्मानित करती है। इसमें 2000 वैज्ञानिक आवेदन करते हैं। जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों को चुना जाता है।